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गोरखपुर: जून तक पूरा हो जाएगा तरकुलानी परियोजना का कार्य, बैठक में मुख्य अभियंता ने मंत्री को दिया आश्वासन
Sat, 21 Nov 2020 12:54 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 21 Nov 2020 12:54 PM IST
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निर्माणाधीन राजघाट।
- फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता ने उम्मीद जताई है कि अगले साल जून तक तरकुलानी की परियोजना का काम पूरा हो जाएगा। परियोजना का 75 प्रतिशत काम हो गया है। बारिश बंद होने के बाद काम में तेजी आई है। सिंचाई मंत्री को मुख्य अभियंता ने बताया कि तरकुलानी परियोजना की लागत पहले 40.60 करोड़ रुपये की थी। बाद में इसकी लागत बढ़कर 84.86 करोड़ की हो गई है।
सिंचाई मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने जनपद की सिंचाई विभाग से संबंधित परियोजनाओं की विडियो कांफ्रेंसिंग से समीक्षा की। इस दौरान विभाग के मुख्य अभियंता ने कार्यों की प्रगति के बारे में बताया। सिंचाई मंत्री ने वैसे तो विभाग की सभी परियोजनाओं के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उनका विशेष जोर तरकुलानी और राप्ती नदी पर बन रहे घाटों पर रहा।
समीक्षा बैठक की सूचना मिलने के बाद ही विभाग तैयारी में लग गया था। मुख्य अभियंता आलोक जैन एवं अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने तरकुलानी रेग्यूलेटर का मौका मुआयना भी किया। इसके बाद शाम को समीक्षा बैठक में परियोजनाओं के संबंध में जानकारी दी।
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सिंचाई मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने जनपद की सिंचाई विभाग से संबंधित परियोजनाओं की विडियो कांफ्रेंसिंग से समीक्षा की। इस दौरान विभाग के मुख्य अभियंता ने कार्यों की प्रगति के बारे में बताया। सिंचाई मंत्री ने वैसे तो विभाग की सभी परियोजनाओं के बारे में जानकारी मांगी, लेकिन उनका विशेष जोर तरकुलानी और राप्ती नदी पर बन रहे घाटों पर रहा।
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समीक्षा बैठक की सूचना मिलने के बाद ही विभाग तैयारी में लग गया था। मुख्य अभियंता आलोक जैन एवं अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने तरकुलानी रेग्यूलेटर का मौका मुआयना भी किया। इसके बाद शाम को समीक्षा बैठक में परियोजनाओं के संबंध में जानकारी दी।
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राजघाट का 95 प्रतिशत कार्य पूरा
सिंचाई मंत्री ने राप्ती नदी पर बन रहे घाटों के बारे में भी जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि राजघाट का कार्य लगभग 95 प्रतिशत हो गया है। राजघाट बिस्तार का कार्य 70 प्रतिशत हुआ है। नदी में जहां शीट पायल डालना है वहां दो मीटर पानी है। जब नदी का जलस्तर नीचे जाएगा तब शीट पायल धंसाया जाएगा। जो कार्य ऊपर के हैं उन्हें दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।
क्या है इसके बनने से फायदा
तरकुलानी रेग्यूलेटर के बनने से 2838 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होने से बच जाएगी। 47 गांवों की 32 हजार आबादी लाभान्वित होगी। 14 पंपों के माध्यम से 300 क्यूसेक पानी लगातार नदी में फेंका जाएगा। दो पंप रिजर्व में रहेंगे। यदि किसी पंप में गड़बड़ी आ गई तो रिजर्व में रहने वाले पंपों को चालू किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि सिंचाई मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जनपद में कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उनका पूरा जोर तरकुलानी और राप्ती नदी पर बन रहे घाटों पर था। उनसे बताया गया कि सभी कार्य निर्धारित समय पर पूरा हो जाएंगे।
क्या है इसके बनने से फायदा
तरकुलानी रेग्यूलेटर के बनने से 2838 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होने से बच जाएगी। 47 गांवों की 32 हजार आबादी लाभान्वित होगी। 14 पंपों के माध्यम से 300 क्यूसेक पानी लगातार नदी में फेंका जाएगा। दो पंप रिजर्व में रहेंगे। यदि किसी पंप में गड़बड़ी आ गई तो रिजर्व में रहने वाले पंपों को चालू किया जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता दिनेश सिंह ने बताया कि सिंचाई मंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जनपद में कराए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। उनका पूरा जोर तरकुलानी और राप्ती नदी पर बन रहे घाटों पर था। उनसे बताया गया कि सभी कार्य निर्धारित समय पर पूरा हो जाएंगे।