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Gorakhpur News: सुथनी में कचरे से बनेगा चारकोल, रिएक्टर का ट्रायल सफल
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एनटीपीसी के सहयोग से 500 टन प्रतिदिन क्षमता का बन रहा चारकोल प्लांट
गोरखपुर। सुथनी में नगर निगम इंटीग्रेटेड गारबेज सिटी बना रहा है। यहां एनटीपीसी के सहयोग से 500 टन प्रतिदिन की क्षमता का चारकोल प्लांट बन रहा है। सोमवार को इस प्लांट के पहले रिएक्टर सेल का ट्रायल सफल हुआ।
सुथनी में 40 एकड़ में इंटीग्रेटेड गारबेज सिटी बन रही है। नगर निगम की टीम श्रेडर, 100 एमएम ट्रामल, ब्लैस्टिक सेपरेटर, रोटरी ड्रायर, 10 एमएम ट्रायल, आरडीएफ टैंक और कूलिंग सेल का भी बिना लोड ट्रायल कर रही है। ट्रायल की यह प्रक्रिया अगले कुछ दिन तक लगातार चलेगी। 15 एकड़ में 255 करोड़ रुपये की लागत की परियोजना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पिट (एमएसडब्ल्यू पिट) निर्माण अंतिम दौर में है।
रिएक्टर सेल में तापमान 250 से 400 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। यहां से निकलने वाला चारकोल पाउडर की तरह होता है। उसे हवा के संपंर्क में लाए बिना कूलिंग प्लांट में डालते हैं। इसके बाद पाउडर की तरह मिले चारकोल को पैलेट फार्म में तब्दील कर एनटीपीसी को ईधन के रूप में भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के उपरांत भी तकरीबन 15 फीसदी कचरा (इनर्ट) अवशेष बचता है जिसे साइंटिक लैंडफिल साइड पर जैविक खाद में तब्दील किया जाएगा। रिएक्टर सेल का ट्रायल सफल होने के बाद अब यहां 250-250 टीपीडी क्षमता के दो और रिएक्टर सेल इंस्टॉल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
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मुख्य अभियंता संजय चौहान ने कहा कि प्रथम चरण का रिएक्टर समेत अन्य प्लांट का ट्रायल सफल रहा है। इसे कुछ दिन और किया जाएगा।
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गोरखपुर। सुथनी में नगर निगम इंटीग्रेटेड गारबेज सिटी बना रहा है। यहां एनटीपीसी के सहयोग से 500 टन प्रतिदिन की क्षमता का चारकोल प्लांट बन रहा है। सोमवार को इस प्लांट के पहले रिएक्टर सेल का ट्रायल सफल हुआ।
सुथनी में 40 एकड़ में इंटीग्रेटेड गारबेज सिटी बन रही है। नगर निगम की टीम श्रेडर, 100 एमएम ट्रामल, ब्लैस्टिक सेपरेटर, रोटरी ड्रायर, 10 एमएम ट्रायल, आरडीएफ टैंक और कूलिंग सेल का भी बिना लोड ट्रायल कर रही है। ट्रायल की यह प्रक्रिया अगले कुछ दिन तक लगातार चलेगी। 15 एकड़ में 255 करोड़ रुपये की लागत की परियोजना में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पिट (एमएसडब्ल्यू पिट) निर्माण अंतिम दौर में है।
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रिएक्टर सेल में तापमान 250 से 400 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। यहां से निकलने वाला चारकोल पाउडर की तरह होता है। उसे हवा के संपंर्क में लाए बिना कूलिंग प्लांट में डालते हैं। इसके बाद पाउडर की तरह मिले चारकोल को पैलेट फार्म में तब्दील कर एनटीपीसी को ईधन के रूप में भेजा जाता है। इस पूरी प्रक्रिया के उपरांत भी तकरीबन 15 फीसदी कचरा (इनर्ट) अवशेष बचता है जिसे साइंटिक लैंडफिल साइड पर जैविक खाद में तब्दील किया जाएगा। रिएक्टर सेल का ट्रायल सफल होने के बाद अब यहां 250-250 टीपीडी क्षमता के दो और रिएक्टर सेल इंस्टॉल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
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मुख्य अभियंता संजय चौहान ने कहा कि प्रथम चरण का रिएक्टर समेत अन्य प्लांट का ट्रायल सफल रहा है। इसे कुछ दिन और किया जाएगा।