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Gorakhpur News: नाक से बह रहा था दिमाग का पानी, गंभीर मतिष्क रोग के संकेत
Fri, 21 Aug 2026 02:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 21 Aug 2026 02:29 AM IST
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गोरखपुर। नाक से लगातार पानी जैसा तरल पदार्थ निकलना हर बार सर्दी-जुकाम की वजह से नहीं होता। कई मामलों में यह दिमाग से जुड़े गंभीर रोग का संकेत भी हो सकता है। एम्स गोरखपुर में सीएसएफ राइनोरिया के मरीज सामने आए हैं। इस बीमारी में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास मौजूद सेरेब्रोस्पाइनल फ्लूड (सीएसएफ) नाक के रास्ते बाहर निकलने लगता है। समय रहते इसकी पहचान और उपचार नहीं होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
डॉ. नीरज कनौजिया ने बताया कि मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर झिल्लियां और हड्डियों की संरचना होती है। किसी कारण से इन झिल्लियों या हड्डी में छेद कमजोरी होने पर सीएसएफ नाक की गुहा तक पहुंच सकता है। इसके बाद नाक से लगातार या बार-बार पानी जैसा पारदर्शी तरल रिसने लगता है।
उन्होंने बताया कि कई बार मरीज इसे सामान्य सर्दी, एलर्जी या नाक की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देता है। सीएसएफ राइनोरिया के पीछे सिर में चोट, पहले हुई सर्जरी, जन्मजात संरचनात्मक समस्या या बिना किसी स्पष्ट कारण के भी सीएसएफ का रिसाव हो सकता है।
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डॉ. नीरज कनौजिया के मुताबिक इस समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सीएसएफ राइनोरिया की पुष्टि के लिए मरीज की जांच के साथ जरूरत के अनुसार सीटी स्कैन, एमआरआई और नाक से निकलने वाले तरल की विशेष जांच की जाती है। रिसाव के स्थान और कारण की पहचान के बाद उपचार तय किया जाता है।
कुछ मामलों में निगरानी और दवाओं से सुधार हो सकता है जबकि लगातार रिसाव होने पर एंडोस्कोपिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर ने बताया कि लंबे समय तक नाक से साफ पानी जैसा तरल निकलने को सामान्य सर्दी समझकर खुद से इलाज न करें। समय पर जांच कराने से बीमारी की पहचान के साथ गंभीर संक्रमण जैसी जटिलताओं से भी बचाव किया जा सकता है।
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डॉ. नीरज कनौजिया ने बताया कि मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए उसके चारों ओर झिल्लियां और हड्डियों की संरचना होती है। किसी कारण से इन झिल्लियों या हड्डी में छेद कमजोरी होने पर सीएसएफ नाक की गुहा तक पहुंच सकता है। इसके बाद नाक से लगातार या बार-बार पानी जैसा पारदर्शी तरल रिसने लगता है।
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उन्होंने बताया कि कई बार मरीज इसे सामान्य सर्दी, एलर्जी या नाक की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देता है। सीएसएफ राइनोरिया के पीछे सिर में चोट, पहले हुई सर्जरी, जन्मजात संरचनात्मक समस्या या बिना किसी स्पष्ट कारण के भी सीएसएफ का रिसाव हो सकता है।
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डॉ. नीरज कनौजिया के मुताबिक इस समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। सीएसएफ राइनोरिया की पुष्टि के लिए मरीज की जांच के साथ जरूरत के अनुसार सीटी स्कैन, एमआरआई और नाक से निकलने वाले तरल की विशेष जांच की जाती है। रिसाव के स्थान और कारण की पहचान के बाद उपचार तय किया जाता है।
कुछ मामलों में निगरानी और दवाओं से सुधार हो सकता है जबकि लगातार रिसाव होने पर एंडोस्कोपिक सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। डॉक्टर ने बताया कि लंबे समय तक नाक से साफ पानी जैसा तरल निकलने को सामान्य सर्दी समझकर खुद से इलाज न करें। समय पर जांच कराने से बीमारी की पहचान के साथ गंभीर संक्रमण जैसी जटिलताओं से भी बचाव किया जा सकता है।