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गोरखपुर विश्वविद्यालय: स्नातक स्तर पर इसी सत्र से लागू होगा सीबीसीएस, पाठ्यक्रम बनाकर भेजेंगे विभागाध्यक्ष
Mon, 21 Jun 2021 06:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 21 Jun 2021 06:32 PM IST
सार
कुलपति ने बैठक कर बनाई मार्गदर्शन समिति, सप्ताह भर में पाठ्यक्रम बनाकर भेजेंगे विभागाध्यक्ष।
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DDU gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में इसी सत्र से सीबीसीएस (च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) प्रणाली लागू की जाएगी। हालांकि अभी इसे स्नातक स्तर पर ही लागू करने की सहमति बनी है। कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने मार्गदर्शन समिति गठित कर दी है। वहीं सभी विभागाध्यक्ष सप्ताह भर में पाठ्यक्रम तैयार करके भेजेंगे।
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शैक्षणिक सत्र 2021-22 के दौरान स्नातक स्तर पर सीबीसीएस प्रणाली शुरू करने पर चर्चा के लिए सभी संकायाध्यक्षों और विभागाध्यक्षों की बैठक सोमवार को कमेटी हाल में आयोजित हुई। इस संबंध में संकायाध्यक्षों और विभागाध्यक्षों का मार्गदर्शन करने के लिए समिति बनाई गई। जिसमें अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. अजय सिंह, अधिष्ठाता विज्ञान प्रो. शांतनु रस्तोगी, प्रो. गौर हरी बेहरा, प्रो. विनय सिंह और डॉ. सचिन कुमार सिंह शामिल हैं।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि सभी विभागाध्यक्ष सीबीसीएस प्रणाली के अनुसार स्नातक के पाठ्यक्रमों को बनाएंगे और एक सप्ताह में बोर्ड ऑफ स्टडीज के माध्यम से भेजेंगे। कहा कि मुख्य विषयों के लिए सरकार द्वारा प्रस्तावित कोर्स संरचना पर भी चर्चा की जाएगी तथा उसको और समृद्ध किया जाएगा।
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लघु व व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी तैयार होंगे
कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि इसके अलावा लघु (वैकल्पिक), व्यावसायिक पाठ्यक्रम, सह पाठ्यक्रमों के तहत नए पाठयक्रम तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही विश्वविद्यालय ने प्रत्येक विषय (विभाग) का एक बुनियादी पाठ्यक्रम शुरू करने की भी योजना बनाई है। वह ऐसा कोर्स होगा जो कक्षा 12 वीं के छात्र को उस विषय के बारे में पता होना चाहिए जो वह स्नातक स्तर पर कर रहा है।
इतिहास विभाग द्वारा प्रस्तावित दीनदयाल उपाध्याय पर तैयार किया गया पाठ्यक्रम प्रत्येक स्नातक छात्र के लिए अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग द्वारा तैयार किया गया। नाथपंथ का पाठ्यक्रम भी स्नातक स्तर पर वैकल्पिक कोर्स के रूप में चलाया जाएगा।
इतिहास विभाग द्वारा प्रस्तावित दीनदयाल उपाध्याय पर तैयार किया गया पाठ्यक्रम प्रत्येक स्नातक छात्र के लिए अनिवार्य होगा। विश्वविद्यालय के दर्शन शास्त्र विभाग द्वारा तैयार किया गया। नाथपंथ का पाठ्यक्रम भी स्नातक स्तर पर वैकल्पिक कोर्स के रूप में चलाया जाएगा।