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यूपी: फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले में पूर्व मंत्री के खिलाफ केस दर्ज, डीएम ने पहले ही दिया था ये आदेश

Sun, 09 Feb 2020 11:47 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर।
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर। Published by: विजय जैन Updated Sun, 09 Feb 2020 11:47 AM IST
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Case registered against former minister Ram Bhuwal Nishad in fake arms license case
राम भुआल निषाद। (file) - फोटो : अमर उजाला।

फर्जी लाइसेंस बनवाकर असलहा खरीदने की फेहरिस्त में पूर्व मंत्री राम भुआल निषाद का नाम भी जुड़ गया है। सपा नेता व पूर्व मंत्री ने दूसरे के लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल कर लाइसेंस बनवा लिया था और फिर रायफल खरीदी थी। पुलिस रिपोर्ट पर डीएम ने जांच का आदेश दिया था। जांच में पुष्टि होने के बाद बड़हलगंज थाने में असलहा बाबू सुनील कुमार गुप्ता की तहरीर पर शुक्रवार की देर रात कूटरचित दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।

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जानकारी के मुताबिक बड़हलगंज के दौनाडिह गांव निवासी पूर्व मंत्री राम भुआल ने बड़हलगंज के मुंडेरा निवासी बेचू यादव पुत्र महेंद्र यादव के नाम से स्वीकृत शस्त्र लाइसेंस के नंबर का इस्तेमाल कर अपने नाम फर्जी लाइसेंस बनवा लिया और उस पर एक राइफल भी खरीद ली।
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पुलिस की रिपोर्ट के बाद जब डीएम कोर्ट में प्रकरण की जांच हुई तो प्रथम दृष्टया शस्त्र लाइसेंस फर्जी पाया गया। पता चला कि असली लाइसेंसी बेचू यादव की मौत भी हो चुकी है। बेचू का असलहा भी दुकान पर जमा है। इसी आधार पर जिलाधिकारी ने पूर्व मंत्री रामभुआल निषाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश जारी किया था। इंस्पेक्टर रामज्ञा सिंह ने बताया कि असलहा बाबू सुनील कुमार गुप्ता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी गई है।

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डकैती के दूसरे दिन मिल गई थी रायफल

एक जुलाई 2019 को रामभुआल निषाद के पैतृक गांव बड़हलगंज के दवनाडीह गांव में डकैती हुई थी। थाने में दर्ज केस के मुताबिक इस दौरान आए बदमाशों ने नशीले पदार्थ का इस्तेमाल किया था और असलहे के बल पर बंधक बनाकर 50 लाख की कीमत के जेवरात, दो लाख नकद के साथ ही रायफल भी लूटकर फरार हो गए थे। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की तो रायफल बाउंड्रीवाल के किनारे कूड़े के ढेर से बरामद हो गई थी। हालांकि अभी इस घटना का पर्दाफाश नहीं हो सका है।

रायफल मिलते ही पुलिस को हो गया था संदेह
रायफल पूर्व मंत्री के घर परिसर से ही बरामदगी के बाद ही पुलिस को शक हो गया था। कुछ समय बाद ही 14 अगस्त को जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला सामने आ गया। इसी दौरान पुलिस ने पूर्व मंत्री की रायफल की भी जांच की और संदेह होने के आधार पर प्रशासन को रिपोर्ट भेज दी थी। पुलिस रिपोर्ट के आधार पर ही डीएम ने पूरे प्रकरण की जांच का आदेश दे दिया था।

हाईकोर्ट चले गए हैं पूर्व मंत्री
पुलिस सूत्रों की माने कि फर्जी लाइसेंस पर असलहा खरीदने की पुष्टि होते ही पूर्व मंत्री हाईकोर्ट चले गए है। हाईकोर्ट से वह गिरफ्तारी पर स्टे लेना चाहते हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे कोई स्वीकार नहीं कर रहा है। उनके करीबियों ने इसकी पुष्टि की है।

बदनाम करने की हो रही साजिश

पूर्व मंत्री (वर्तमान में सपा नेता) रामभुआल निषाद ने कहा कि बेचू के लाइसेंस के पांच महीने पहले मेरा लाइसेंस बना है। ऐसे में मेरा लाइसेंस कैसे फर्जी हो सकता है। विरोधियों को कुछ नहीं मिल रहा है तो बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं। बदनाम करने के लिए नया मुद्दा खोजा गया है। विपक्षी दल फंसाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं।

फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में कब क्या हुआ
14 अगस्त : तनवीर की गिरफ्तारी की गई। तत्कालीन असलहा बाबू राम सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया।
15 अगस्त : पुलिस ने गोरखनाथ के नामजद आरोपित तनवीर को जेल भेजा।
23 अगस्त : प्रापर्टी डीलर विजय प्रताप गिरफ्तार हुआ।
26 अगस्त : गोपी उर्फ  शमशेर और विकास तिवारी पकड़े गए।
28 अगस्त : ढाबा संचालक प्रणय प्रताप और प्रापर्टी डीलर शमशाद जेल गए।
29 अगस्त : रवि आर्म्स कारपोरेशन के संचालक रवि पांडेय को पुलिस ने पकड़ा।
05 सितंबर : असलहा बाबू राम सिंह, अशोक गुप्ता और संविदा कर्मचारी अजय गिरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया।
12 सितंबर : रवि पांडेय व विजय प्रताप को कैंट पुलिस ने रिमांड पर लिया।
21 सितंबर : पूर्व असलहा बाबू विजय प्रकाश श्रीवास्तव व सपा नेता मो. आजम को गिरफ्तार किया।
07 अक्टूबर : खोराबार पुलिस ने आबकारी सिपाही समेत 10 को जेल भेजा। जांच में सभी निर्दोष मिले।
25 अक्टूबर : चिलुआताल पुलिस ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने वाले दो भाइयों को आर्म्स एक्ट में जेल भेजा।
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