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पीएम-सीएम पर टिप्पणी पड़ी महंगी: एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष मोहम्मद इस्लाम के खिलाफ केस दर्ज, जांच में जुटी पुलिस
Mon, 06 Dec 2021 01:30 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 06 Dec 2021 01:30 PM IST
सार
एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम के खिलाफ राजघाट थाने में समाज में वैमनस्यता फैलाने, प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने का मुकदमा दर्ज किया है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के जिलाध्यक्ष मोहम्मद इस्लाम के खिलाफ राजघाट थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने उनके खिलाफ समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने, प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और ऐसा करने वाली सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
जानकारी के मुताबिक अलहदादपुर निवासी सैयद शादान ने राजघाट थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक वह तीन दिसंबर की सुबह अपने मोबाइल पर यूट्यूब देख रहे थे। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो मिला। वीडियो में एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष मोहम्मद इस्लाम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्द बोल रहे थे। मो. इस्लाम ने यह भी कहा कि इस वीडियो को पूरे देश में चलाइए अर्थात वायरल कीजिए। संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्तियों के लिए इस तरह अभद्र भाषा का प्रयोग देशद्रोह की श्रेणी में आता है।
मो. इस्लाम के इस कृत्य से इस्लाम धर्म की भी छवि खराब हुई है। वह भयभीत हैं कि कहीं प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा के प्रयोग का वीडियो वायरल होने से देश में दंगे न भड़क जाएं। उनकी तहरीर पर राजघाट थाना पुलिस ने मो. इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की धारा 505(2) (विभिन्न वर्गों में शत्रुता, घृणा, वैमनस्यता करने वाला बयान), धारा 469 (ख्याति को अपहानित पहुंचाने वाली इलेक्ट्रॉनिक रचना जिससे पक्षकार की ख्याति अपहित की जाए) और आईटी एक्ट की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक साधन का प्रयोग करना) में दर्ज की है। इन धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष की कैद और दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। राजघाट थाना प्रभारी रणधीर मिश्रा ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
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एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम ने बताया कि लोकतंत्र में अपनी बातों को तर्क की बुनियाद पर कहना मौलिक अधिकार है। जनता से किए वादे से मुकर जाने वाले को झूठा कहना गलत नहीं है। यदि मेरे बयान से वैमनस्यता फैलती है तो उन कथित कट्टर हिंदूवादी संगठनों के खिलाफ पहले कार्रवाई होनी चाहिए जो इस्लाम की पवित्र शख्सियत और पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करते हैं, इन संगठनों के बयान भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
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जानकारी के मुताबिक अलहदादपुर निवासी सैयद शादान ने राजघाट थाने में तहरीर दी थी। इसके मुताबिक वह तीन दिसंबर की सुबह अपने मोबाइल पर यूट्यूब देख रहे थे। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो मिला। वीडियो में एआईएमआईएम जिलाध्यक्ष मोहम्मद इस्लाम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ अपशब्द बोल रहे थे। मो. इस्लाम ने यह भी कहा कि इस वीडियो को पूरे देश में चलाइए अर्थात वायरल कीजिए। संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्तियों के लिए इस तरह अभद्र भाषा का प्रयोग देशद्रोह की श्रेणी में आता है।
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मो. इस्लाम के इस कृत्य से इस्लाम धर्म की भी छवि खराब हुई है। वह भयभीत हैं कि कहीं प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा के प्रयोग का वीडियो वायरल होने से देश में दंगे न भड़क जाएं। उनकी तहरीर पर राजघाट थाना पुलिस ने मो. इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की धारा 505(2) (विभिन्न वर्गों में शत्रुता, घृणा, वैमनस्यता करने वाला बयान), धारा 469 (ख्याति को अपहानित पहुंचाने वाली इलेक्ट्रॉनिक रचना जिससे पक्षकार की ख्याति अपहित की जाए) और आईटी एक्ट की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक साधन का प्रयोग करना) में दर्ज की है। इन धाराओं में अधिकतम पांच वर्ष की कैद और दस लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। राजघाट थाना प्रभारी रणधीर मिश्रा ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।
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एआईएमआईएम के जिलाध्यक्ष मो. इस्लाम ने बताया कि लोकतंत्र में अपनी बातों को तर्क की बुनियाद पर कहना मौलिक अधिकार है। जनता से किए वादे से मुकर जाने वाले को झूठा कहना गलत नहीं है। यदि मेरे बयान से वैमनस्यता फैलती है तो उन कथित कट्टर हिंदूवादी संगठनों के खिलाफ पहले कार्रवाई होनी चाहिए जो इस्लाम की पवित्र शख्सियत और पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करते हैं, इन संगठनों के बयान भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।