गोरखपुर: ताल जहदा में सीलिंग की जमीन पर कब्जा करने वाले 644 लोगों पर केस, मामले की जांच शुरू
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि डीएम के आदेश पर चकबंदी अधिकारी ने जांच की थी। जांच के आधार पर चकबंदी अधिकारी ने थाने में तहरीर दी है, जिस पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस जांच कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।
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ताल जहदा में कई दशक से सीलिंग की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा जमाए 644 लोगों पर चिलुआताल पुलिस ने केस दर्ज किया है। चकबंदी अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने सभी को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर जालसाजी करने का आरोपी बनाया है। डीएम के आदेश पर केस दर्ज कर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला डीएम कोर्ट में चल रहा था। इस पर 16 अप्रैल 2021 को ही डीएम कोर्ट ने केस खारिज करते हुए इसे सरकारी जमीन घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बाद भी लोगों का कब्जा बना हुआ है। वर्तमान में जमीन पर किसान खेती करते हैं।
जानकारी के मुताबिक, ताल जहदा की जमीन सरहरी स्टेट परमेश्वरी राय की थी। बाद में यह जमीन सीलिंग में आ गई। वर्ष 1970 से 1980 के बीच रामपुर गोपालपुर गांव के तुलसी निगम प्रधान थे। तब उन्होंने जमीन को गांव के लोगों को पट्टा कर दिया। तभी से लोग जमीन पर काबिज हो गए। 1984 में मामला डीएम कोर्ट में चला गया।
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सरकार बनाम रामपुर गोपालपुर गांव के बीच केस चलता रहा। प्रधानी में जब तक तुलसी निगम सक्रिय थे, तब तक तो वह कोर्ट में पैरवी के लिए हर तारीख पर जाते थे, लेकिन बाद के साल में इस पर ग्रामीणों ने बहुत ध्यान नहीं दिया और कोर्ट में मामले में तारीख पर तारीख पड़ती रही।
कई तारीख के बाद डीएम ने 2021 में जमीन को सरकारी घोषित कर उसे दस्तावेजों में चढ़वा भी दिया। इसके बाद कुछ लोग हाईकोर्ट भी गए, लेकिन इनकी संख्या बहुत कम है। अब डीएम ने इस मामले में केस दर्ज कराने का आदेश दिया है। डीएम के आदेश पर चकबंदी अधिकारी ने चिलुआताल थाने में केस दर्ज कराया है।
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इनको बनाया गया है नामजद आरोपी
रामपुर गोपालपुर गांव के रामभवन, राकेश, कनीक लाल, मैना देवी, देवेंद्र, योगेंद्र, कैलाशी देवी पत्नी रामसेवक, ओमप्रकाश, धनपत, दयालाल, दिलीप कुमार, रणजीत कुमार, प्रिती देवी पत्नी सुरजलाल, कुमार, कृष्ण प्रसाद मिश्र, नजाम, उनकी वबू, गिरीश, गोपी, गनपती, रामाशंकर, रामसमुझ, गंगा को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा 622 लोग अन्य नामजद आरोपी हैं।
जमीन पुश्तैनी है
वर्षों से जमीन पर खेती की जा रही है, जब से जन्म हुआ है, तब से यही पता है कि जमीन हमारी है। जमीन की चकबंदी भी चल रही है। उस दौरान फार्म पांच दिया गया था, अब अचानक जमीन को सरकारी बताना गलत है। -विजय कुमार, ग्रामीण
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जमींदारों से मिली थी जमीन
पूर्वज बताते हैं कि जमीन पहले जमींदारों की थी। जमींदारों ने गांव के लोगों को सौंप दिया। तभी से गांव के लोगों का कब्जा है और सब का नाम भी कागज पर चढ़ा है। अब लोग फार्म पांच के बाद फार्म 24 के इंतजार में हैं।-महेंद्र निषाद, ग्रामीण
कई लोग बेच भी चुके हैं जमीन
पुश्तैनी जमीन को कई लोग बेच चुके हैं, कुछ लोगों ने प्लाॅटिंग भी की है। बिशनपुर के आठ टोलों के लोगों का और रहमतनगर, परमेश्वरपुर, रामपुर - गोपालपुर के अधिकतर लोगों का जमीन इस ताल में है। -केशा, ग्रामीण
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जमीन हमारी ही है
चकबंदी के दौरान फॉर्म 5 बंट गया है और फॉर्म 24 का इंतजार है। कुछ जमीन सरकार पहले ही सरकारी घोषित कर चुकी है, जिस जमीन की चकबंदी चल रही है, वह ग्रामीणों की है। हम लोग जमीन किसी को नहीं देंगे।- नंदकिशोर सिंह, ग्रामीण।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने कहा कि डीएम के आदेश पर चकबंदी अधिकारी ने जांच की थी। जांच के आधार पर चकबंदी अधिकारी ने थाने में तहरीर दी है, जिस पर केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस जांच कर साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।