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गोरखपुर: 20 सेकेंड तक सांस रोक हृदय में रेडिएशन के खतरे को कर रहे कम, मरीजों को दी जा रही ट्रेनिंग
Mon, 06 Feb 2023 03:18 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 06 Feb 2023 03:18 PM IST
सार
डॉ. एचबी सिंह ने बताया कि सामान्य तौर पर 20 सेकेंड तक सांस रोकने की प्रक्रिया थोड़ी सरल है। लेकिन, रेडियोथेरेपी के दौरान 10 सेकेंड भी सांस रोकना बहुत बड़ी बात है। ऐसी स्थिति में मरीजों को सांस रोकने की ट्रेनिंग देनी पड़ रही है, इसके लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है, जिससे की उन्हें हार्ट-अटैक के खतरे से बचाया जा सके।
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कैंसर।
- फोटो : istock
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विस्तार
कैंसर मरीज रेडियोथेरेपी के दौरान 20 सेकेंड तक सांस रोक कर हृदय में रेडिएशन के खतरे को कम कर रहे हैं। रेडियोथेरेपी के दौरान मरीजों को सांस रोकने की ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके जरिए कैंसर मरीजों को 50 फीसदी हार्ट अटैक का खतरा कम हो रहा है। जबकि, जो मरीज सांस नहीं रोक पाते हैं, उनमें 20 से 25 फीसदी कैंसर मरीजों को हार्ट अटैक हो रहा है। डॉक्टरों की भाषा में इस तकनीक को डीप इन्स्पेक्टर ब्रीड होल्ड (डीआईबीएच) कहते हैं।
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इस पर हनुमान प्रसाद पोद्दार कैंसर संस्थान के डॉक्टरों ने काम करना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत 10 मरीजों पर की गई। संस्थान के कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. एचबी सिंह ने बताया कि कैंसर मरीजों के इलाज में रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी दी जाती है। इस दौरान शरीर के कई अंगों पर इसका दुष्प्रभाव भी होता है। रेडियोथेरेपी के दौरान रेडिएशन मरीजों के ह्दय पर भी असर करता है।
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इसकी वजह से 20 से 25 फीसदी कैंसर मरीजों को हार्ट अटैक भी आ जाता है। इसी खतरे को कम करने के लिए डीआईबीएच तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। इस तकनीक में मरीज को 20 सेकेंड तक सांस रोकने की ट्रेनिंग दी जा रही है। क्योंकि, एक बार में 15 से 20 सेकेंड तक ही रेडियोथेरेपी की जाती है। यह कई चरणों में होती है। इसलिए सांस रोकने की ट्रेनिंग देना पड़ रहा है। सांस रोकने के दौरान ह्दय पर रेडिएशन का खतरा 95 फीसदी कम हो जाता है। इससे हार्ट-अटैक का खतरा भी 50 फीसदी कम हो जा रहा है।
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10 मरीजों पर परिणाम बेहतर मिला
डॉ. एचबी सिंह ने बताया कि अब तक 10 मरीजों पर इसकी शुरुआत की गई। इन मरीजों पर डीआईबीएच का तकनीक का परिणाम बेहतर मिला है। इन मरीजों का इलाज लंबे समय से चल रहा है। लेकिन, इन्हें ह्दय रोग से संबंधित दिक्कतें नहीं हुई है। जबकि, सामान्य रेडियोथेरेपी कराने वाले मरीजों को ह्दय रोग की समस्या देखने को मिली है। अब धीरे-धीरे कैंसर के मरीजों को इसकी ट्रेनिंग देने की शुरुआत की गई है, जिससे की इन मरीजों को ह्दय पर होने वाले रेडिएशन से बचाया जा सके। बताया कि इस तकनीक में मरीजों के सांस रोकते ही मशीन रेडियोथेरेपी करना शुरू कर देता है। जैसे ही 20 सेकेंड पूरा होता है, मशीन स्वत बंद हो जाता है।
रेडियोथेरेपी के दौरान सांस रोकना सबसे कठिन
डॉ. एचबी सिंह ने बताया कि सामान्य तौर पर 20 सेकेंड तक सांस रोकने की प्रक्रिया थोड़ी सरल है। लेकिन, रेडियोथेरेपी के दौरान 10 सेकेंड भी सांस रोकना बहुत बड़ी बात है। ऐसी स्थिति में मरीजों को सांस रोकने की ट्रेनिंग देनी पड़ रही है, इसके लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है, जिससे की उन्हें हार्ट-अटैक के खतरे से बचाया जा सके। रेडियोथेरेपी शरीर के जिस हिस्से में दी जाती है, वह हिस्सा जल जाता है और उस दौरान अथाह पीड़ा होती है।
रेडियोथेरेपी के दौरान सांस रोकना सबसे कठिन
डॉ. एचबी सिंह ने बताया कि सामान्य तौर पर 20 सेकेंड तक सांस रोकने की प्रक्रिया थोड़ी सरल है। लेकिन, रेडियोथेरेपी के दौरान 10 सेकेंड भी सांस रोकना बहुत बड़ी बात है। ऐसी स्थिति में मरीजों को सांस रोकने की ट्रेनिंग देनी पड़ रही है, इसके लिए उन्हें मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है, जिससे की उन्हें हार्ट-अटैक के खतरे से बचाया जा सके। रेडियोथेरेपी शरीर के जिस हिस्से में दी जाती है, वह हिस्सा जल जाता है और उस दौरान अथाह पीड़ा होती है।