Budget 2021: कोरोना की मार झेल रहे उद्योगों पर लगा मरहम, उद्यमी बोले- एमएसएमई उद्योगों के लिए कुछ और की भी दरकार
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आम बजट का उद्योग जगत ने स्वागत किया है। हालांकि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के लिए और राहत की उम्मीद थी। कोरोना संकट की सबसे अधिक मार इसी क्षेत्र पर पड़ी है। ऐसे में उद्यमियों को उम्मीद थी कि बजट के प्रावधानों से न सिर्फ एमएसएमई को बूस्टर डोज मिलेगी, बल्कि मध्य वर्ग को भी राहत मिलेगी। मगर आम बजट में दोनों के लिए कमी रह गई। उद्यमियों का कहना है कि बजट से उद्योगों को कुछ राहत मिलेगी। उद्योगों का पहिया तेज गति से घूमेगा।
छोटी कंपनियों को मिलेगी बड़ी राहत
लघु उद्योग भारती के जिलाध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि कंपनी एक्ट में छोटी कंपनियों की परिभाषा को बदलते हुए कैपिटल को 50 लाख से दो करोड़ एवं टर्नओवर को 20 करोड़ किया गया है, इससे छोटी कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें कागजी कार्रवाई कम करनी पड़ेगी। इनकम टैक्स में केस खुलने का समय छह साल से तीन साल किया गया है। साथ ही ट्रस्ट या सोसायटी जो स्कूल या अस्पताल चलाते हैं, उन्हें अब पांच करोड़ तक टैक्स नहीं देना होगा। यह स्वागत योग्य कदम है।
रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई के लिए बजट में उम्मीद से बहुत कम दिया गया है। 13 करोड़ लघु उद्योगों के विकास के लिए बजट में 15700 करोड़ का प्रावधान एक तरह से नगण्य है। कैपिटल खर्च के लिए 5.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 35 प्रतिशत ज्यादा है। इससे न सिर्फ रोजगार के अवसरों की संख्या बढ़ेगी बल्कि उद्योगों द्वारा निर्मित उत्पादों की खपत भी बढ़ेगी। टेक्सटाइल क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी का बढ़ाया जाना स्वागतयोग्य है।
रुकी अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
वेल्ड इंडिया के निदेशक आरएन सिंह ने कहा कि कोरोना काल से अर्थव्यवस्था की रुकी रफ्तार को फिर से बढ़ाने के लिए प्रयास किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 2.27 लाख करोड़ खर्च करने का प्रावधान है, जो पिछले वित्तीय वर्ष से ज्यादा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को विकसित करने के लिए 15700 करोड़ का प्रावधान है जो पिछली बार से दोगुना है। इससे एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों को मजबूती मिलेगी। इनकम टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन न करने से आम आदमी एवं मध्य वर्ग को निराशा हाथ लगी है।
कस्टम ड्यूटी कम होने से बाजार पकड़ेगा रफ्तार
विनायक उद्योग के निदेशक आशीष खेतान ने कहा कि आयरन, कॉपर स्क्रैप, सोना चांदी पर कस्टम ड्यूटी घटने से राहत मिलेगी। इससे जुड़े उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो गई थी। वहीं उत्पादों की खरीद नहीं हो रही थी। कस्टम ड्यूटी कम होने से उत्पादन लागत कम होगी और बाजार रफ्तार पकड़ेगा। इसका उद्यमियों को काफी समय से इंतजार था। बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उद्योगों को राहत देने वाला बजट
पारले के निदेशक महेश रूंगटा ने कहा कि उद्योग के लिए बजट काफी हद तक राहत देने वाला है। एमएसएमई सेक्टर के लिए पैकेज की घोषणा की गई है, लेकिन इसका फायदा उद्यमियों को किस ढंग से मिलने वाला है इसका इंतजार रहेगा। बजट में स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे के विकास पर फोकस है। रोजगार बढ़ने के अवसर हैं। मध्यम आय वाले परिवार पर कोई राहत न देना निराश करता है।
आयकर के सरलीकरण के लिए उठाए गए कदम
दीवान पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुमित कक्कड़ ने कहा कि आयकर के सरलीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बजट की सबसे बड़ी खासियत है। वहीं, 75 वर्ष से ज्यादा आयुवर्ग के लिए आईटीआर से छूट देना एक तरह से सामाजिक दायित्व निभाने जैसा है। कोरोना संकट की मार झेल रहे उद्योगों को थोड़ी और राहत देने की आवश्यकता थी। इसके लिए न सिर्फ उत्पादन लागत बढ़ाने बल्कि खपत बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाना चाहिए था।