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बीआरडी मेडिकल कॉलेज: वायरल फीवर के मरीजों पर होगा शोध, प्रतिदिन हजारों की संख्या में आ रहे ऐसे मामले

Mon, 27 Sep 2021 09:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 27 Sep 2021 09:18 AM IST
सार

मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ महिम मित्तल ने बताया कि वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें ऐसे भी मरीज शामिल हैं जो छह से सात दिनों में ठीक हो जा रहे हैं।

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BRD Medical College will conduct research on viral fever patients in gorakhpur
बीआरडी मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मेडिसिन विभाग वायरल फीवर के मरीजों पर शोध करेगा। कॉलेज प्रशासन ऐसे मरीजों की सूची तैयार कर रहा है। कोविड के मामले कम होने के बाद से ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। इस बार वायरल फीवर ने मरीजों को काफी परेशान किया है।
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चिंता की बात यह है कि वायरल फीवर के 90 प्रतिशत मरीजों में कोविड के लक्षण मिले हैं। लेकिन उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। इस नई समस्या को समझने के लिए मेडिसिन विभाग शोध में जुट गया है। पता किया जाएगा कि आखिर वायरल फीवर का असर मरीजों पर इतने अधिक दिनों तक क्यों रह रहा है? ऐसे मरीजों पर कौन सी जांच करनी जरूरी है? यह कौन सा बैक्टीरिया जनित बुखार है। बीआरडी, जिला अस्पताल, एम्स की मेडिसिन की ओपीडी में प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा मरीज वायरल फीवर के मिल रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ महिम मित्तल ने बताया कि वायरल फीवर से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। इनमें ऐसे भी मरीज शामिल हैं जो छह से सात दिनों में ठीक हो जा रहे हैं। कुछ ऐसे मरीज हैं, जिनको ठीक होने में 10 से 12 दिन का समय लग रहा है। इन मरीजों में कोविड के लक्षण भी मिल रहे हैं लेकिन कोविड जांच में रिपोर्ट निगेटिव आ रही है।
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वायरल फीवर, बैक्टीरियल बीमारी के लक्षण एक जैसे
वायरल और बैक्टीरियल बीमारी के लक्षण एक जैसे होते है। ऐसे में पहचानना मुश्किल होता है कि कौन सा संक्रमण मरीज के शरीर में हैं। शोध से यह जानकारी मिल सकेगी कि मरीज में बैक्टीरियल संक्रमण है या फिर वायरल संक्रमण है। उसी आधार पर दवाएं दी जाएंगी।


प्लेटलेट्स से लेकर डी-डाईमर तक बढ़ा मिल रहा
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि वायरल फीवर के मरीजों में कोरोना संक्रमण के लक्षण भी दिख रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौरान भी मरीजों के प्लेटलेट्स तेजी से घट रहे थे। साथ ही डी-डाईमर तक बढ़ा मिल रहा था। यही हाल इस बार वायरल फीवर मरीजों का भी रहा है। यही वजह है कि वायरल फीवर के करीब 40 प्रतिशत मरीजों को भर्ती कर इलाज कराना पड़ा है। कोरोना संक्रमण से पहले जिन लोगों को वायरल फीवर होता था, उनमें केवल 10-15 प्रतिशत लोगों को भर्ती करना पड़ता था।
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