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Gorakhpur News: बीआरडी के डॉक्टरों ने खोजा रेटिनोपैथी से बचाव और इलाज का तरीका, जानिए कैसे
Tue, 21 Feb 2023 01:55 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 21 Feb 2023 01:55 PM IST
सार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि शुगर के 80 फीसदी मरीजों को रेटिनोपैथी बीमारी हो जाती है। इसमें आंख के पर्दे में सूजन और खून निकलने लगता है। इसकी वजह से आंखों की रोशनी कम हो जाती है।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
बीआरडी मेडिकल कालेज के नेत्र विभाग के डाॅक्टरों ने रेटिनोपैथी (आंख के पर्दे का खराब होना) बीमारी के बचाव और इलाज का तरीका खोज लिया है। इससे शुगर के ग्रसित मरीजों की आंखों की रोशनी कम नहीं होने पाएगी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग ने इस पर शोध किया है।
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शोध में यह जानकारी मिली है कि रेटिनोपैथी बीमारी के पूर्व रेटिना के पीछे कोरायड लेयर में सूजन शुरू हो जाती है। यदि इसे शुरुआत में ही नियंत्रित कर लिया जाए तो रेटिनोपैथी नहीं होगी। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ क्लीनिकल एंड एक्सपेरिमेंटल ऑप्थलमोलॉजी नई दिल्ली में प्रकाशित करने के लिए भेज दिया है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि शुगर के 80 फीसदी मरीजों को रेटिनोपैथी बीमारी हो जाती है। इसमें आंख के पर्दे में सूजन और खून निकलने लगता है। इसकी वजह से आंखों की रोशनी कम हो जाती है।
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इस बीमारी में रोशनी जितनी चली जाती है, उतनी वापस नहीं होती है। लेकिन, शोध में यह जानकारी मिली है कि रेटिनोपैथी के पूर्व कोरायडोपैथी होती है। इसमें आंख के पर्दे के पीछे कोरायड लेयर में सूजन और खून बहने लगता है। यदि समय रहते इसकी जांच और इलाज हो जाए तो इसका प्रभाव रेटिना पर नहीं पड़ता है।
शोध में 64 मरीजों को शामिल किया गया है। इनमें 113 में रेटिनोपैथी और कोरायडोपैथी दोनों मिली। कोरायडोपैथी का इलाज कर रेटिनोपैथी से बचा लिया गया। बताया कि इसके पूर्व इस तरह का शोध कोरिया और चीन में किया गया था।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के शोधकर्ता डॉ. राजश्री पांडेय ने कहा कि शोध में यह जानकारी मिली है कि शुगर के मरीज अगर नियमित कोरायडोपैथी की जांच कराते रहें तो वह रेटिनोपैथी से बच सकते हैं। क्योंकि, रेटिनोपैथी से पूर्व कोरायडोपैथी होती है। कोरायडपैथी में आंखों के लेयर में शुरुआती दिक्कत होती है। तत्काल इलाज होने पर रेटिना प्रभावित नहीं होता है।