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देहदान का संकल्प: दूसरों के शरीर में जिंदा रहेंगे विमला के अंग, मौत के बाद पति ने मेडिकल कॉलेज को सौंपा शरीर

Fri, 23 Sep 2022 04:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 23 Sep 2022 04:41 PM IST
सार

 वर्ष 2017 में दधीचि देहदान संस्थान, कानपुर में देहरादून के सेंगर नामक व्यक्ति के देहदान से प्रेरित होकर दोनों ने खुद भी ऐसा करने का संकल्प लिया था। दंपती ने चार अक्तूबर 2017 को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग एवं नेत्र रोग विभाग में देहदान व कार्निया दान करने का रजिस्ट्रेशन करवाया था।

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Body donation after death husband handed over body to medical college
मृतक विमला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कुछ लोगों का संकल्प मृत्यु के साथ ही नश्वर शरीर के मिट्टी में मिल जाने की बात को झुठला देता है। ऐसा ही उदाहरण है, रामजानकी नगर के पारसनाथ चौरसिया की पत्नी विमला का। 86 वर्ष की उम्र में बृहस्पतिवार को उनका देहांत हो गया। पत्नी के संकल्प को पूरा करते हुए पति ने मेडिकल कॉलेज को उनका शरीर दान कर दिया। अब उनके शरीर के अंग दूसरों के शरीर में जिंदा रहेंगे।

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पारसनाथ और विमला को कोई संतान नहीं है। वर्ष 2017 में दधीचि देहदान संस्थान, कानपुर में देहरादून के सेंगर नामक व्यक्ति के देहदान से प्रेरित होकर दोनों ने खुद भी ऐसा करने का संकल्प लिया था। दंपती ने चार अक्तूबर 2017 को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एनाटामी विभाग एवं नेत्र रोग विभाग में देहदान व कार्निया दान करने का रजिस्ट्रेशन करवाया था।
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पारसनाथ चौरसिया का कहना है कि पत्नी से बिछड़ने का गम है, लेकिन देहदान करके अपने को बहुत धन्य मान रहे हैं। विमला चौरसिया की मृत्यु बृहस्पतिवार की भोर में तीन बजे हुई। एक घंटे बाद ही पारसनाथ ने फोन करके एनाटामी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर योगेंद्र सिंह को सूचना दी।
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देहदान के लिए तीन अन्य का भी करवाया रजिस्ट्रेशन

पारसनाथ तीन अन्य लोगों को भी देहदान के लिए प्रेरित करके रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं। वह मूल रूप से संतकबीर नगर जिले के धनघटा थाना क्षेत्र के गाईं बसंतपुर के निवासी हैं। वर्ष 1956 में जलनिगम, गोरखपुर में चतुर्थ श्रेणी के पद पर नौकरी मिली और 1958 में गोरखपुर में आकर परिवार के साथ रहने लगे। जलनिगम से ही 1997 में कैशियर के पद से सेवानिवृत्त हुए।

प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज डॉ. गणेश कुमार ने कहा कि विमला चौरिसा का मरणोपरांत देहदान हुआ है। पार्थिव शरीर को एंबुलेंस भेजकर मंगवाया गया। उनके निधन के बाद उनके पति ने कालेज में फोन कर जानकारी दी थी। अब उनके शरीर पर एमबीबीएस छात्र पढ़ाई करेंगे। उनका कार्निया नेत्र रोग विभाग को दान किया गया।
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