गोरखपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव: कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर भाजपा समर्थकों का कब्जा, मजबूर दिखे अफसर
गेट से हटने के लिए समर्थकों से मनुहार करते रहे एडीएम सिटी व सिटी मजिस्ट्रेट, नहीं माना कोई, कलेक्ट्रेट में नामांकन कक्ष की तरफ जाने वाले हर प्वाइंट पर पहरा देते रहे भाजपा समर्थक।
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गोरखपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के नामांकन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर पर भी प्रशासनिक अधिकारियों का नियंत्रण नहीं रहा। कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार यानी गेट नंबर एक पर नामांकन शुरू होने से लेकर खत्म होने तक भाजपा समर्थकों का कब्जा रहा। उन्होंने गेट पर अपना ताला जड़ दिया और अपनी ही मर्जी से उसे खोलते व बंद करते रहे।
हालत यह रही कि एडीएम सिटी राकेश कुमार श्रीवास्तव और सिटी मजिस्ट्रेट अभिनव रंजन श्रीवास्तव गेट पर से हटने के लिए समर्थकों के सामने घिघियाते रहे। नियम कायदों और कानून का हवाला दिया। घुड़की भी दी मगर समर्थकों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। पुलिस भी खड़ी तमाशा देखती रही और ये दोनों आला अफसर, समर्थकों के सामने असहाय नजर आए।
प्रशासन ने कलेक्ट्रेट के भीतर सिर्फ प्रत्याशी, प्रस्तावक व अनुमोदक को ही एंट्री देने का निर्देश दिया था। मगर कलेक्ट्रेट के भीतर सुबह से ही भाजपा के तमाम समर्थक मौजूद रहे जो नामांकन समाप्त होने तक जमे रहे। नामांकन कक्ष यानी डीएम कोर्ट तक जाने वाले हर एंट्री प्वाइंट और बैरीकेडिंग के पास समर्थक खड़े होकर निगरानी करते रहे।
सपा जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी का आरोप है कि हालात तब और बेकाबू हो गए जब दोपहर 1.30 बजे एडीएम सिटी, शास्त्री चौक से सपा के दूसरे प्रत्याशी जितेंद्र यादव और उनके प्रस्ताव व अनुमोदक के साथ ही जिलाध्यक्ष को लेकर कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट की तरफ बढ़े। इसकी सूचना मिलते ही भाजपा समर्थकों की भीड़ मुख्य गेट पर और बढ़ गई। जैसे ही सपा प्रत्याशी वहां पहुंचे।
समर्थकों ने उनके साथ गेट के भीतर प्रवेश करने वाले सपा नेता व पूर्व जिला पंचायत सदस्य पारस यादव की जमकर धुनाई कर दी। समर्थक नारेबाजी करने लगे तो सपा प्रत्याशी न तो कलेक्ट्रेट के भीतर प्रवेश करने की हिम्मत जुटा सके और न ही वहां मौजूद दोनों अधिकारियों के अलावा पुलिस का ही कोई अफसर उन्हें सकुशल नामांकन कक्ष तक पहुंचाने का भरोसा ही दिला सका।
पुलिस पर परेशान करने का आरोप
सपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने छानबीन के नाम परेशान किया है। पहले टीडीएम चौराहे पर रोककर प्रत्याशी के कागजात देखे, फिर अलहदादपुर व बेतियाहाता चौराहे पर छानबीन की गई। शास्त्री चौराहा पर करीब एक घंटे तक रोका गया। जब एडीएम सिटी आए तो पैदल जाने को मिला है।
तीस मिनट पहले ही वापस हो गए सपाई
नामांकन प्रक्रिया खत्म होने से तीस मिनट पहले ही सपा के दूसरे प्रत्याशी जितेंद्र यादव व सपा जिलाध्यक्ष वापस जाने लगे। इसपर पुलिस ने रोका और कहा कि नामांकन करने के बाद ही जाने को मिलेगा। इससे आपाधापी मच गई। बताया गया कि पुलिस ने प्रत्याशी को पकड़ा था लेकिन एक पूर्व विधायक ने हाथ खींचकर छुड़ा लिया। इसके बाद सपा नेताओं ने शास्त्री चौक पर जाकर धरना दिया।
जिलाध्यक्ष भाजपा युधिष्ठिर सिंह सैंथवार ने कहा कि मुख्य द्वार बंद करने के आरोप निराधार हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में पत्रकार, प्रशासनिक व पुलिस के अफसर मौजूद थे। सपा का अधिकृत प्रत्याशी नामांकन करने नहीं आया। इसकी वजह पार्टी को तलाशनी चाहिए। जब जितेंद्र यादव ने नामांकन पत्र ही नहीं खरीदा था तो नामांकन कराने का औचित्य ही नहीं बनता है। सिर्फ विवाद बढ़ाने के लिए सपा ने जितेंद्र के नामांकन की जिद की थी। इसका भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। शांति एवं निष्पक्ष तरीके से नामांकन प्रक्रिया पूरी कराई गई है। भाजपा प्रत्याशी साधना सिंह के साथ 55 से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य थे। इससे डरकर ही सपा प्रत्याशी ने नामांकन नहीं कराया। अब विवाद बढ़ाकर सहानुभूति लेने का प्रयास कर रहे हैं। जनता सब जानती है। सपा का इतिहास विवादों से भरा है।