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Exclusive: यहां सच में मिलेंगे आम के आम गुठलियों के दाम, तैयार होगा बायोडीजल और कंपोस्ट खाद

Thu, 29 Dec 2022 11:27 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 29 Dec 2022 11:27 AM IST
सार

डॉ. प्रशांत ने बताया कि चार किलो गुठली को सुखाकर पीसने पर एक किलो पाउडर बनता है। इसे फिल्टर पेपर पर रखकर बीकर में रख देते हैं। उसके नीचे एक हीटर रहता है, जिसमें 400 ग्राम एन हेड्रेन को रखकर 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। गर्म होकर वह ऊपर कंडेसर के माध्यम से बूंद बूंद कर पाउडर में छनकर गिरता है।

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Biodiesel made from mango kernels and compost from waste
आम की गुठलियों से तैयार होता बायो डीजल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आम के आम गुठलियों के दाम वाली कहावत यूं ही नहीं कही जाती। इसे सिद्ध किया है मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. प्रशांत सैनी और उनके छात्र खुर्शीद अहमद ने। इन्होंने आम की गुठलियों से बायोडीजल तैयार किया है। इससे निकलने वाले कचरे से बायो कंपोस्ट खाद भी बनाई है।

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आम की गुठलियों से तैयार बायोडीजल पारंपरिक डीजल की भरपाई तो करेगा ही, डीजल से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को भी कम करेगा। इसके इस्तेमाल से डीजल की क्षमता तो बढ़ेगी ही उसकी कीमत भी करीब 20 प्रतिशत कम हो जाएगी। एक किलो आम की गुठली से 194 मिलीलीटर बायोडीजल बनाया है। एक किलो पाउडर से बायोडीजल बनाने में करीब 800 ग्राम कचरा निकलता है। इस कचरे को कंपोस्ट खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।  
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डॉ. प्रशांत के शोध को यूनाइटेड किंगडम के एक प्रतिष्ठित एनर्जी सोर्सेज : रिकवरी, यूटाइलेजशन एंड इन्वायरमेंटल इफेक्ट में 10 नवंबर 2022 को प्रकाशित किया गया है। शोध में डॉ. प्रशांत के साथ उनके शिष्य एमटेक के खुर्शीद अहमद ने भी अहम भूमिका निभाई है। तकरीबन एक वर्ष के संधान के बाद इन्हें अपने प्रयोग में सफलता मिली है। बायोडीजल को बनाने में उन्होंने थर्मोसिफोन इफेक्ट पर आधारित साक्जिलेट मशीन का इस्तेमाल किया है। यह मशीन बायोमास को बायोडीजल में बदलने के लिए इस्तेमाल की जाती है।  
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पहली प्रक्रिया में बनेगा क्रूड मैंगो ऑयल

डॉ. प्रशांत ने बताया कि चार किलो गुठली को सुखाकर पीसने पर एक किलो पाउडर बनता है। इसे फिल्टर पेपर पर रखकर बीकर में रख देते हैं। उसके नीचे एक हीटर रहता है, जिसमें 400 ग्राम एन हेड्रेन को रखकर 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। गर्म होकर वह ऊपर कंडेसर के माध्यम से बूंद बूंद कर पाउडर में छनकर गिरता है। फिर से डिस्टिलाइजेशन सेटअप में 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। इससे एन हेक्जेन अलग हो जाता है। जो तरल पदार्थ बचेगा वह क्रूड मैंगो ऑयल है।

दूसरी बार में बनेगा बायोडीजल
दूसरी प्रक्रिया में कुल तरल पदार्थ की मात्रा का .1 प्रतिशत एनएओएच या केओएच व कुल मात्रा का पांच प्रतिशत मेथेनॉल मिलाकर ट्रांसइस्टिरीफिकेशन के माध्यम से रोट्रेट करते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 200 एमएल बायोडीजल प्राप्त होता है।

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