विकास की खुशी अधूरी: गोरखपुर की खूबसूरती दिखी नहीं, धूल के गुबार में जी रहे अपनाहट भरी जिंदगी
क्षेत्रीय पयर्टन अधिकारी रवींद्र कुमार मिश्र ने कहा कि नौसड़ से कालेसर तक साढ़े छह किमी तक सुंदरीकरण का काम होना है। यह सही है कि काम की गति बहुत धीमी है। 50 से 60 फीसदी ही काम हो पाया है। नौसड़ से सटे ही काम नहीं हुआ था। नोटिस दिया गया था तो वहां काम चल रहा है।
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लखनऊ से शहर में प्रवेश करने के एंट्री प्वाइंट नौसढ़ से लेकर कालेसर तक बंधे के सुंदरीकरण की योजना तीन वर्षों में आधी भी पूरी नहीं हो सकी है। शहर में आने वालों को खूबसूरती का अहसास तो नहीं हुआ, लेकिन करीब छह किमी तक बांध के सामने बने घरों में रहने वालों की जीवन दुश्वारियों भरा जरूर हो गया है।
कहीं सड़क पर मिट्टी पड़ी है तो कहीं बांध पर। जब गाड़ियां गुजरती हैं, तो धूल का गुबार उड़ने लगता है। जिसके चलते यहां के लोगों का अफनाहट महसूस होने लगती है। उनका कहना है कि बंधे की खूबसूरती पता नहीं कब दिखेगी, पर काम की रफ्तार इसी तरह रही तो लोग सांस के मरीज जरूर हो जाएंगे।
नौसड़ से ही 400 मीटर तक बंधे पर मिट्टी डालकर छोड़ दिया गया है। सड़क पर भी मिट्टी गिरी है। सड़क के ही किनारे दो से तीन फीट की चौड़ाई में फुटपाथ बनना है, वहां भी मिट्टी डाली गई है। जब गाड़ियां उधर से गुजर रही हैं तो धूल ही धूल उड़ रही है।
इसके बाद करीब तीन सौ मीटर तक मॉडल के तौर पर सुंदरीकरण काम पहले कराया गया था, जिसे देखकर खूबसूरती का अहसास जरूर महसूस होता है। लेकिन, इसके आगे बांध पर कोई काम नहीं हुआ है। बरहुवा से आगे बढ़ने पर स्थिति और ज्यादा खराब है। बांध पर उगी हुई बड़ी-बड़ी झाड़ियां और रखे गए गोबर व गोइठा खूबसूरती का मुंह चिढ़ा रहे हैं।
बस, कुछ दिन की सांसत और झेल लो भाई
बड़गहन गांव में सड़क के किनारे एक गुमटी के बाहर कुछ लोग बैठे थे। चर्चा भी बंधे के सुंदरीकरण को लेकर ही छिड़ी थी। गांव के ही लक्ष्मी शंकर कहते हैं, हर कोई अपने स्वार्थ की सोचता है। हमारे ही बिरादरी के एक लोगों ने बालू गिराकर छोड़ दिया और इधर मिट्टी है। क्या मजाल है कि दोपहर में जब हवा चलती है तो कोई चैन से बैठ पाए। उन्हें टोकते हुए गांव का रामकिशुन कहते हैं, चलो जैसे इतना समय काट लिए हो कुछ और समय सांसत झेल लो। कुछ दिन बाद यही बंधा देखोगे तो अच्छा लगेगा। रामकिशुन की बात का समर्थन करते हुए राजेश बोले, इससे बांध में रिसाव का खतरा नहीं रहेगा और गंदगी भी नहीं रहेगी।
क्षेत्रीय पयर्टन अधिकारी रवींद्र कुमार मिश्र ने कहा कि नौसड़ से कालेसर तक साढ़े छह किमी तक सुंदरीकरण का काम होना है। यह सही है कि काम की गति बहुत धीमी है। 50 से 60 फीसदी ही काम हो पाया है। नौसड़ से सटे ही काम नहीं हुआ था। नोटिस दिया गया था तो वहां काम चल रहा है। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को दो बार नोटिस दिया हूं। मार्च तक काम पूरा कराने को कहा गया है। अगर इस अवधि में काम पूरा नहीं होता है तो जुर्माना की संस्तुति करूंगा।
ये काम होने हैं
बांध पर आकर्षक पत्थर लगाने के साथ ही रंग-रोगन किया जाना है। छायादार और सजावटी पौधे लगाए जाने हैं। लोगों के बैठने के लिए बेंच भी लगनी है। लाइटिंग होगी। बांध पर मिट्टी डालकर घास लगाई जाएगी और सड़क की ओर फुटपाथ बनेगा।
बोले क्षेत्र के लोग
बांध के उस पार से डंपर से मिट्टी ढोई जा रही हैं। पूरे दिन धूल के गुबार उड़ते हैं। घर के बाहर अगर बैठ जाएं तो धूल से पट जाएंगे। एक वर्ष पूर्व ही काम खत्म होना था। हमारे गांव के सामने तो कोई काम ही नहीं हुआ है। पता नहीं यह सांसत कब तक झेलनी पड़ेगी। -लक्ष्मी शंकर पांडेय, बड़गहन
दुश्वारियां ज्यादा बढ़ गई है। सड़क पर ही मिट्टी गिराकर छोड़ दे रहे हैं। गाड़ियों के जाने से पूरे दिन धूल ही धूल उड़ती है। इससे अपनाहट होने लगती है। वादे के मुताबिक यह इलाका खूबसूरत कब होगा, इसका तो पता नहीं, लेकिन काम ऐसे ही धीमी गति से हुआ तो कुछ लोग बीमार जरूर हो जाएंगे। -शनि कुमार
अगर समय से सुदरीकरण का काम पूरा हो जाता तो सड़क के किनारे जिनका घर है, उन्हें सांसत नहीं झेलनी पड़ती। जो सांस के रोगी हैं, उन्हें बहुत दिक्कत हो रही है। बंधे पर जमी घास हटवा कर मिट्टी डाल दी है। जब तेज हवा चलती है, तो घर का बरामदे में धूल की परत जम जाती है। -रवींद्र कुमार, नौसड़
तीन महीने पहले कुछ अधिकारी आए थे, उनसे शिकायत की गई थी। उन्होंने मार्च 2023 तक पूरा करने का भरोसा दिलाया था। लेकिन, काम की सुस्त रफ्तार देखकर तो लगता है कि अभी सुंदरीकरण कार्य में कई महीने लग जाएंगे। तब तक हम लोगों को दिक्कतें झेलनी ही पड़ेगी। -हनुमान गोस्वामी, नौसढ़
सुंदरीकरण: साढ़े छह किमी।
लागत: 9:50 करोड़।
लक्ष्य: मार्च 2023 तक पूरा करना।
कार्य की प्रगति: 50 से 60 फीसदी बाकी।