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अश्लील हरकत की फरियाद लिए चौकी पर पहुंची महिला, चौकी इंचार्ज ने बैरंग लौटाया
Fri, 15 Jan 2021 11:15 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर(हरनही)।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर(हरनही)।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2021 11:15 AM IST
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पुलिस। (सांकेतिक तस्वीरे)
- फोटो : iStock
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गोरखपुर जिले के बांसगांव इलाके में छेड़खानी से परेशान होकर एक महिला को न्याय पाने में तीन दिन का वक्त लग गया। आरोपी पर कार्रवाई भी तब हुई जब मामला एसओ के संज्ञान में आया। तीन दिन से दौड़ रही महिला की तहरीर पर पुलिस ने बृहस्पतिवार शाम केस दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
आरोप यह भी है कि चौकी इंचार्ज हरनही ने आरोपी को मंगलवार को ही पकड़ लिया था, लेकिन एक हिस्ट्रीशीटर की पैरवी पर उसे छोड़ दिया गया। अब पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन उन पुलिस वालों पर क्या कार्रवाई होगी जिसने अश्लील हरकत से त्रस्त एक महिला को तीन दिन तक न्याय के लिए दौड़ाया, यह एक बड़ा सवाल है।
जानकारी के मुताबिक, महिला विधवा है और एक प्राथमिक विद्यालय में दाई का काम करके जीवन यापन करती है। काम पर जाने के दौरान रामाज्ञा उसे परेशान करता था, मगर वह इस पर ध्यान नहीं देती थी। सोमवार की रात आरोपी ने सारी हदें पार कर दी और अकेले बाहर पाकर उसके साथ अश्लील हरकत कर दी। मंगलवार की सुबह होते ही महिला फरियाद लेकर चौकी पर पहुंच गई।
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पुलिस ने फरियाद सुनी, आरोपी को भी पकड़ा, मगर कुछ देर बाद छोड़ दिया। फिर बुधवार को महिला शिकायत लेकर बांसगांव थाने गई तो पुलिस ने लौटा दिया। बृहस्पतिवार की शाम को मामला एसओ के संज्ञान में आया तो केस दर्ज कर आरोपी रामाज्ञा को गिरफ्तार किया गया।
महिला का आरोप है कि दिन भर बुधवार को थाने पर बैठाने के बाद उसे फिर बृहस्पतिवार को बुलाया गया। बृहस्पतिवार का फिर पूरा दिन थाने पर गुजारने वाली महिला को प्रार्थना पत्र लेकर लौटा दिया। बृहस्पतिवार की शाम को इसकी जानकारी थानेदार जेएन सिंह को हुई, उसके बाद इस मामले में कार्रवाई की गई।
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आरोप यह भी है कि चौकी इंचार्ज हरनही ने आरोपी को मंगलवार को ही पकड़ लिया था, लेकिन एक हिस्ट्रीशीटर की पैरवी पर उसे छोड़ दिया गया। अब पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन उन पुलिस वालों पर क्या कार्रवाई होगी जिसने अश्लील हरकत से त्रस्त एक महिला को तीन दिन तक न्याय के लिए दौड़ाया, यह एक बड़ा सवाल है।
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जानकारी के मुताबिक, महिला विधवा है और एक प्राथमिक विद्यालय में दाई का काम करके जीवन यापन करती है। काम पर जाने के दौरान रामाज्ञा उसे परेशान करता था, मगर वह इस पर ध्यान नहीं देती थी। सोमवार की रात आरोपी ने सारी हदें पार कर दी और अकेले बाहर पाकर उसके साथ अश्लील हरकत कर दी। मंगलवार की सुबह होते ही महिला फरियाद लेकर चौकी पर पहुंच गई।
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पुलिस ने फरियाद सुनी, आरोपी को भी पकड़ा, मगर कुछ देर बाद छोड़ दिया। फिर बुधवार को महिला शिकायत लेकर बांसगांव थाने गई तो पुलिस ने लौटा दिया। बृहस्पतिवार की शाम को मामला एसओ के संज्ञान में आया तो केस दर्ज कर आरोपी रामाज्ञा को गिरफ्तार किया गया।
महिला का आरोप है कि दिन भर बुधवार को थाने पर बैठाने के बाद उसे फिर बृहस्पतिवार को बुलाया गया। बृहस्पतिवार का फिर पूरा दिन थाने पर गुजारने वाली महिला को प्रार्थना पत्र लेकर लौटा दिया। बृहस्पतिवार की शाम को इसकी जानकारी थानेदार जेएन सिंह को हुई, उसके बाद इस मामले में कार्रवाई की गई।
सात किलोमीटर पैदल चलकर थाने पहुंचती थी महिला
दाई होने के वजह से उसके पास इस समय इतने रुपये भी नहीं थे कि वह भाड़ा देकर थाने तक पहुंच सके। चौकी का मतलब ही यही होता है कि पीड़ित को थाने का चक्कर ना काटना पड़े और करीब में ही न्याय मिल जाए लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सात किलोमीटर पैदल चलकर महिला थाने पहुंची तब भी दो दिन उसे न्याय नहीं मिल पाया। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस हरकत में आई और केस दर्ज किया गया है।
दोषी पुलिस वालों पर भी तो होनी चाहिए कार्रवाई
शासन से लेकर अफसर तक पीड़ित को न्याय देने के लिए एक के बाद एक कोशिश करते हैं, लेकिन चौकी-थाने के दहलीज पर उनकी कोशिशें दम तोड़ देती है। यह मामला इसका ताजा उदाहरण है। थानेदार वीआईपी ड्यूटी में थे, तो क्या ऐसे में किसी को न्याय नहीं मिलेगा? थाने पर कोई केस दर्ज नहीं होगा? अगर पुलिस वाले कार्रवाई करना चाहते तो इंस्पेक्टर से फोन पर भी बात कर सकते थे, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया? चौकी इंचार्ज ने आरोपित को थाने से छोड़ दिया, क्या अपराध नहीं है? पुलिस इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। अब छोड़ने वाले थानेदार भी गिरफ्तारी की दलील देकर पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताने में पीछे नहीं हट रहे हैं।
थानेदार जेएन सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वीआईपी ड्यूटी होने की वजह से मुंशी समझ नहीं पाए और मुझसे मिलने को कह दिए। मगर संज्ञान में आते ही कार्रवाई की गई है।
हरनही चौकी इंचार्ज सुनील कुमार मौर्या ने कहा कि चौकी से छोड़ने की बात गलत है। आरोप निराधार है। जानकारी होने पर आरोपी पर केस दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है।
डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने कहा कि यदि महिला के साथ ऐसा किया गया है तो गंभीर बात है। चौकी इंचार्ज, पुलिस के भूमिका की जांच कराई जाएगी। वास्तव में अगर ऐसा हुआ होगा तो कार्रवाई की जाएगी।
दोषी पुलिस वालों पर भी तो होनी चाहिए कार्रवाई
शासन से लेकर अफसर तक पीड़ित को न्याय देने के लिए एक के बाद एक कोशिश करते हैं, लेकिन चौकी-थाने के दहलीज पर उनकी कोशिशें दम तोड़ देती है। यह मामला इसका ताजा उदाहरण है। थानेदार वीआईपी ड्यूटी में थे, तो क्या ऐसे में किसी को न्याय नहीं मिलेगा? थाने पर कोई केस दर्ज नहीं होगा? अगर पुलिस वाले कार्रवाई करना चाहते तो इंस्पेक्टर से फोन पर भी बात कर सकते थे, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया? चौकी इंचार्ज ने आरोपित को थाने से छोड़ दिया, क्या अपराध नहीं है? पुलिस इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। अब छोड़ने वाले थानेदार भी गिरफ्तारी की दलील देकर पूरे मामले में खुद को निर्दोष बताने में पीछे नहीं हट रहे हैं।
थानेदार जेएन सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वीआईपी ड्यूटी होने की वजह से मुंशी समझ नहीं पाए और मुझसे मिलने को कह दिए। मगर संज्ञान में आते ही कार्रवाई की गई है।
हरनही चौकी इंचार्ज सुनील कुमार मौर्या ने कहा कि चौकी से छोड़ने की बात गलत है। आरोप निराधार है। जानकारी होने पर आरोपी पर केस दर्ज कर गिरफ्तारी की गई है।
डीआईजी/एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने कहा कि यदि महिला के साथ ऐसा किया गया है तो गंभीर बात है। चौकी इंचार्ज, पुलिस के भूमिका की जांच कराई जाएगी। वास्तव में अगर ऐसा हुआ होगा तो कार्रवाई की जाएगी।