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गोरखपुर: जब्त पॉलिथीन और प्लास्टिक से बनेंगी शहर की सड़कें, इस खास वजह से नगर निगम प्रशासन ने लिया फैसला
Sun, 11 Jul 2021 11:39 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 11 Jul 2021 11:39 AM IST
सार
अब तक जब्त पॉलिथीन को गीडा की फैक्ट्रियों को बेचा जाता था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर नगर निगम दस्ते द्वारा जब्त की जा रही प्रतिबंधित पॉलिथीन का इस्तेमाल अब सड़कों के निर्माण के लिए होगा। प्रदेश के कई नगर निगमों में इस तकनीक से बनाई गईं, सड़कों की मजबूती ज्यादा होने के कारण नगर निगम ने यह फैसला लिया है।
गोरखपुर शहर से रोजाना करीब 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें से तकरीबन 50 प्रतिशत पॉलिथीन और प्लास्टिक होता है। इसके अलावा नगर निगम की ओर से प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ चलाए जा रहे, अभियान के अंतर्गत अब तक कई टन पॉलिथीन जब्त की जा चुकी है। वहीं प्रतिबंधित पॉलिथीन जब्त किए जाने का सिलसिला जारी है। जब्त की गई पॉलिथीन को अब तक नगर निगम प्रशासन गीडा की प्लास्टिक फैक्ट्रियों को बेचता था, लेकिन अब नगर निगम प्रशासन ने इसका इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में करने का फैसला लिया है।
नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि प्रदेश के नगर निगमों में सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक और पॉलिथीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जल्द ही गोरखपुर में भी इसका इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में शुरू किया जाएगा। केवल तारकोल से बनने वाली सड़कों की अपेक्षा प्लास्टिक, तारकोल और गिट्टी के मिश्रण से बनी सड़क ज्यादा टिकाऊ होती है। यह जल्दी टूटती नहीं। साथ ही इसकी भार वहन क्षमता भी ज्यादा होती है।
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गोरखपुर शहर से रोजाना करीब 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसमें से तकरीबन 50 प्रतिशत पॉलिथीन और प्लास्टिक होता है। इसके अलावा नगर निगम की ओर से प्रतिबंधित पॉलिथीन के खिलाफ चलाए जा रहे, अभियान के अंतर्गत अब तक कई टन पॉलिथीन जब्त की जा चुकी है। वहीं प्रतिबंधित पॉलिथीन जब्त किए जाने का सिलसिला जारी है। जब्त की गई पॉलिथीन को अब तक नगर निगम प्रशासन गीडा की प्लास्टिक फैक्ट्रियों को बेचता था, लेकिन अब नगर निगम प्रशासन ने इसका इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में करने का फैसला लिया है।
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नगर आयुक्त अविनाश सिंह ने बताया कि प्रदेश के नगर निगमों में सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक और पॉलिथीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जल्द ही गोरखपुर में भी इसका इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में शुरू किया जाएगा। केवल तारकोल से बनने वाली सड़कों की अपेक्षा प्लास्टिक, तारकोल और गिट्टी के मिश्रण से बनी सड़क ज्यादा टिकाऊ होती है। यह जल्दी टूटती नहीं। साथ ही इसकी भार वहन क्षमता भी ज्यादा होती है।
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एक किमी में लगता है करीब आठ टन पॉलिथीन-प्लास्टिक
एक किलोमीटर सड़क बनाने में करीब आठ टन पॉलिथीन एवं प्लास्टिक की खपत होगी। नगर निगम के पास पर्याप्त प्लास्टिक है, ऐसे में सड़क निर्माण में कोई बाधा भी नहीं आएगी।
इस तरह मिश्रित की जाएगी प्लास्टिक
प्लास्टिक को मशीन में डालकर बुरादा तैयार किया जाएगा। गिट्टी को 160 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान तक गर्म किया जाएगा। इसमें प्लास्टिक के बुरादे को मिला दिया जाए। उसमें 160 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर तारकोल मिलाते हुए सड़क का निर्माण किया जाएगा।
नगर निगम ने लगाई प्लास्टिक क्रशर मशीन
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक-पॉलिथीन का इस्तेमाल किया जाएगा। प्लास्टिक और पॉलिथीन को टुकड़ों में काटने के लिए सुभाष चंद्र बोस नगर में क्रशर मशीन लगा दी गई है। तारकोल से बनने वाली सभी सड़कों में जब्त पॉलिथीन और प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाएगा।
इस तरह मिश्रित की जाएगी प्लास्टिक
प्लास्टिक को मशीन में डालकर बुरादा तैयार किया जाएगा। गिट्टी को 160 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान तक गर्म किया जाएगा। इसमें प्लास्टिक के बुरादे को मिला दिया जाए। उसमें 160 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर तारकोल मिलाते हुए सड़क का निर्माण किया जाएगा।
नगर निगम ने लगाई प्लास्टिक क्रशर मशीन
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने बताया कि सड़कों के निर्माण में प्लास्टिक-पॉलिथीन का इस्तेमाल किया जाएगा। प्लास्टिक और पॉलिथीन को टुकड़ों में काटने के लिए सुभाष चंद्र बोस नगर में क्रशर मशीन लगा दी गई है। तारकोल से बनने वाली सभी सड़कों में जब्त पॉलिथीन और प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाएगा।