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जागरुकता: बदली सोच तो बढ़ गया गोरखपुर जिले का लिंगानुपात, अवैध जांच केंद्रों पर नकेल का दिखने लगा असर

Fri, 26 Nov 2021 09:04 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 26 Nov 2021 09:04 AM IST
सार

नारी सशक्तीकरण और जागरुकता अभियान से लोगों की बेटियों के प्रति सोच बदली है। वहीं लिंग परीक्षण के खिलाफ हुई सख्ती का असर जिले में दिखने लगा है।

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awareness campaign and crackdown on illegal investigation centers started showing on sex ratio of Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महिला सशक्तीकरण, जागरुकता अभियान और अवैध जांच केंद्रों पर नकेल का असर गोरखपुर जिले के लिंगानुपात पर दिखने लगा है। पिछले साल की तुलना में इस साल इसमें 2.4 प्रतिशत की वृद्धि है। जिले में 1000 बेटों के सापेक्ष अब 917 बेटियां जन्म ले रहीं हैं। इस पर स्वास्थ्य विभाग ने खुशी जाहिर की है।
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जानकारी के मुताबिक लगातार नारी सशक्तीकरण और जागरुकता अभियान से लोगों की बेटियों के प्रति सोच बदली है। वहीं लिंग परीक्षण के खिलाफ हुई सख्ती का असर जिले में दिखने लगा है। इस साल लिंग परीक्षण करते हुए पकड़े जाने का केवल एक मामला सामने आया है। मुखबिर योजना के तहत इस मामले में कार्रवाई भी की गई थी। इसके बाद से जिले में कोई भी भ्रूण लिंग जांच का मामला सामने नहीं आया। इसका असर यह हुआ है कि प्रत्येक 1000 बेटों पर 917 बेटियों ने जिले में जन्म लिया है। जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 1000 के सापेक्ष 898 था।
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सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि अब लोगों की सोच में बदलाव हुआ है। बेटियों के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। लोगों को बेटियां भा रहीं हैं। यही कारण है कि लोग अब भ्रूण लिंग जैसी घृणित जांच नहीं करा रहें हैं। आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) महिला विंग की सचिव व स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. बबिता शुक्ला ने बताया कि अब पहले की तुलना में काफी बदलाव दिख रहा है। अब बेटी और बेटों पर कोई फर्क नहीं कर रहा है। पहले अगर किसी परिवार में पहली बेटी है और दूसरी बार भी बेटी हो जाती थी तो लोग परेशान होते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। लोगों की सोच बदल गई है। लोगों को इस बात का तनाव नहीं रहता है कि उनके पास दो-दो बेटियां हैं। इसका प्रभाव लिंगानुपात में दिनोंदिन सुधार के रूप में दिख रहा है।  
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