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UP: बंग्लादेशी रोहिंग्या नागरिकों का जन्म प्रमाण पत्र बनाने का मामला, एटीएस ने कुशीनगर से दो लोगों को पकड़ा
Fri, 02 Aug 2024 09:05 PM IST
श्याम जी.
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 02 Aug 2024 09:05 PM IST
सार
बंग्लादेशी रोहिंग्या नागरिकों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के मामले में एटीएस जांच कर रही है। टीम शाम को कुशीनगर पहुंची। तरयासुजान से सीएसपी संचालक और विशुनपुरा सीएचसी पर तैनात डाटा ऑपरेटर को साथ लेकर चली गई।
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दो आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रायबरेली के सलोन में बंग्लादेशी रोहिंग्या नागरिकों का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने के मामले में जांच कर रही एटीएस देर शाम को कुशीनगर पहुंची। जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में जिले के स्वास्थ्य विभाग के आईडी पासवर्ड का भी प्रमाण पत्र बनाने में इस्तेमाल किया गया है। तरयासुजान से सीएसपी संचालक और विशुनपुरा सीएचसी पर तैनात डाटा ऑपरेटर को साथ लेकर चली गई।
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जन्म प्रमाण पत्र बनाने में इस्तेमाल होने वाला लैपटॉप, मोबाइल व अन्य उपकरण कब्जे में ले लिया है। संजीव से एटीएस ने उसके घर पर एक घंटे तक पूछताछ की। दोनों को लेकर लखनऊ पहुंची एटीएस पूछताछ कर रही है। सूत्रों की मानें तो संविदा पर तैनात डाटा ऑपरेटर ने स्वास्थ्य विभाग का आईडी और पासवर्ड सीएचसी संचालक को दे रखा था, जिससे फर्जीवाड़ा किया गया है।
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महराजगंज जिले के खुशहाल नगर निवासी सतीश सोनी संविदा पर विशुनपुरा सीएचसी पर डाटा ऑपरेटर के पद पर तैनात है। दो वर्ष पूर्व इसकी तैनाती तरयासुजान सीएचसी पर थी, जहां वह स्वास्थ्य विभाग की आईडी से जन्मप्रमाण पत्र बनाने के साथ इसे पोर्टल पर अपडेट करता था। सतीश ने तरयासुजान में रहते हुए यूजर आईडी और पासवर्ड को भावपुर के सीएससी संचालक संजीव सिंह को दे दिया था।
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दोनों साथ मिलकर बांग्लादेशी नागरिकों के कुछ फर्जी प्रमाण पत्र बना दिए। रायबरेली के जीशान की ओर से किए गए फर्जीवाड़े की जांच में एटीएस ने पूछताछ की तो कई प्रदेश के सहज जन सेवा केंद्र संचालकों से तार जुड़ा। इसी कड़ी में एटीएस को कुशीनगर में भी कुछ फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर देने का सुराग हाथ लगा। शाम को सादे वर्दी में पहुंचे एटीएस के अधिकारियों ने सबसे पहले संजीव सिंह को हिरासत में लेकर पूछताछ किया तो सतीश सोनी का नाम सामने आया। इसके बाद टीम विशुनपुरा सीएचसी पर पहुंची।
सीएचसी अधीक्षक से मिलने के बाद सतीश सोनी को हिरासत में ले लेकर गोरखपुर लेकर चली गई। इस कार्रवाई से स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अनभिज्ञ रहा हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा से मामला जुड़े होने के कारण एटीएस की टीम इनसे लखनऊ में गहन पूछताछ कर रही है।
दूसरे राज्य और देश के बाहर के लोगों के प्रमाण पत्र बनाने का शक
रायबरेली के सलोन में जन्म प्रमाण पत्रों के फर्जीवाड़े में सीएससी संचालक मो जीशान को गिरफ्तार किया गया है।वह वीडीओ की आईडी पासवर्ड से हजारों फर्जी प्रमाण पत्र बना डाले थे।प्रारंभिक जांच में जीशान के कनेक्शन यूपी से लेकर बिहार झारखंड,नेपाल व पाकिस्तान तक मिले तो राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एजेंसी एटीएस सक्रिय हुई।
जीशान का नेटवर्क कुशीनगर से जुड़ा मिला तो एटीएस ने जिले से दो लोगों को उठा लिया।आरोप है कि संजीव और सतीश ने साथ मिलकर दूसरे राज्य के लोगो के फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाया है वहीं शक तो यह भी है कि इन्होंने बांग्लादेशी नागरिकों को भी कुछ फर्जी प्रमाण पत्र वितरित किए हैं। दरअसल विभागीय सूत्रों की माने तो एक कंप्यूटर से एक दिन में अधिक से अधिक 100 प्रमाण पत्र ही बनाए जा सकते हैं जबकि जीशान बड़े शातिर किस्म का था। मो जीशान एक दिन में 500 से 2000 तक प्रमाण पत्र बनवाता था ऐसे में माना जा रहा है कि कुछ प्रमाण पत्र बनाने का लक्ष्य कुशीनगर के पकड़े गए दो युवकों को भी मिलता होगा।
हर ओर प्रश्न? किनके बने फर्जी प्रमाण पत्र? कहां बसे वे फर्जी परिवार
फर्जी प्रमाण पत्र बनाने के मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ता(एटीएस) फिलहाल तो दो आरोपियों को पूछताछ के लिए लखनऊ ले गई है और जल्द इस मामले में कुछ खुलासे संभव है लेकिन सीमावर्ती तरयासुजान में भावपुर में सीएससी की आड़ में किन लोगों के फर्जी प्रमाण पत्र सजीव सिंह और सतीश सोनी द्वारा बनाए गए हैं और सालो से चल रहे इस फर्जीवाड़ा में कितने फर्जी परिवार बसे और कहां बसे यह सवाल उठ रहा है।
बात तो यह भी निकलकर आ रही है कि बांग्लादेशी नागरिकों के भी फर्जी प्राण पत्र इनके द्वारा बनाया गया और अगर यह सच होता है तो सुरक्षा में चूक होने के साथ बड़ा फर्जीवाड़ा होगा।इस मामले के एटीएस जिले के कुछ और लोगो को उठा सकती है।