{"_id":"6a120f65d65cd644ab0a8fa0","slug":"as-the-festival-approaches-the-market-becomes-lively-with-demand-for-many-varieties-of-vermicelli-gorakhpur-news-c-7-gkp1006-1330465-2026-05-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: बकरीद में दस्तरखान की लज्जत बढ़ाएगी सेवइयों की मिठास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: बकरीद में दस्तरखान की लज्जत बढ़ाएगी सेवइयों की मिठास
विज्ञापन
गोरखपुर। बकरीद का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ गई है। कपड़ों, इत्र और सजावटी सामानों के साथ-साथ सेवइयों की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है। इस बार भी बकरीद के दस्तरखान पर मीठी सेवइयां खास जगह बनाएंगी। शहर के रेती चौक, उर्दू बाजार, अलीनगर, खूनीपुर और शाहमारूफ इलाके की दुकानों पर अलग-अलग किस्म की सेवइयां सज गई हैं।
नखास चौक पर दुकान लगाने वाले अजहरुद्दीन राइन बताया कि बकरीद में मेहमानों के स्वागत के लिए शीरखुर्मा और दूध सेवई बनाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। यही वजह है कि त्योहार से करीब दो सप्ताह पहले ही सेवइयों की बिक्री बढ़ जाती है। बाजार में मशीन से बनी पतली सेवई, हाथ से तैयार की गई देसी सेवई, रोस्टेड सेवई और फालूदा सेवई की मांग सबसे अधिक है।
उर्दू बाजार के कारोबारी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि इस बार सूखे मेवों और दूध के दाम बढ़ने का असर सेवइयों की कीमतों पर भी पड़ा है। बावजूद इसके लोग खरीदारी में कोई कमी नहीं कर रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली देसी सेवई 140 से 200 रुपये किलो तक बिक रही है, जबकि सामान्य सेवई 80 से 120 रुपये किलो के बीच उपलब्ध है।
विज्ञापन
मेहमाननवाजी की तैयारियों में जुटीं महिलाएं
घरों में भी बकरीद की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महिलाएं मेहमानों के लिए पारंपरिक शीरखुर्मा बनाने की तैयारियों में जुटी हैं। त्योहार पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों को मीठी सेवई खिलाने की परंपरा आज भी कायम है। शहर के कई प्रतिष्ठानों ने विशेष पैकिंग में ड्राई फ्रूट सेवई और रेडीमेड शीरखुर्मा मिक्स भी बाजार में उतारे हैं। युवा वर्ग में इन उत्पादों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में खरीदारी और तेज होने की उम्मीद है। बकरीद को लेकर बाजारों में बढ़ती चहल-पहल से कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं।
विज्ञापन
नखास चौक पर दुकान लगाने वाले अजहरुद्दीन राइन बताया कि बकरीद में मेहमानों के स्वागत के लिए शीरखुर्मा और दूध सेवई बनाने की परंपरा वर्षों पुरानी है। यही वजह है कि त्योहार से करीब दो सप्ताह पहले ही सेवइयों की बिक्री बढ़ जाती है। बाजार में मशीन से बनी पतली सेवई, हाथ से तैयार की गई देसी सेवई, रोस्टेड सेवई और फालूदा सेवई की मांग सबसे अधिक है।
विज्ञापन
उर्दू बाजार के कारोबारी मोहम्मद आरिफ ने बताया कि इस बार सूखे मेवों और दूध के दाम बढ़ने का असर सेवइयों की कीमतों पर भी पड़ा है। बावजूद इसके लोग खरीदारी में कोई कमी नहीं कर रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली देसी सेवई 140 से 200 रुपये किलो तक बिक रही है, जबकि सामान्य सेवई 80 से 120 रुपये किलो के बीच उपलब्ध है।
विज्ञापन
मेहमाननवाजी की तैयारियों में जुटीं महिलाएं
घरों में भी बकरीद की तैयारियां शुरू हो गई हैं। महिलाएं मेहमानों के लिए पारंपरिक शीरखुर्मा बनाने की तैयारियों में जुटी हैं। त्योहार पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों को मीठी सेवई खिलाने की परंपरा आज भी कायम है। शहर के कई प्रतिष्ठानों ने विशेष पैकिंग में ड्राई फ्रूट सेवई और रेडीमेड शीरखुर्मा मिक्स भी बाजार में उतारे हैं। युवा वर्ग में इन उत्पादों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में खरीदारी और तेज होने की उम्मीद है। बकरीद को लेकर बाजारों में बढ़ती चहल-पहल से कारोबारियों के चेहरे भी खिले हुए हैं।