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गोरखपुर: सामुदायिक शौचालयों के रखरखाव के लिए पूर्व प्रधानों के खातों में भेज दी रकम, भुगतान निरस्त
Tue, 13 Jul 2021 10:05 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 13 Jul 2021 10:05 AM IST
सार
कई पंचायतों में सीधे देखरेख करने वाली महिला के खाते में भेजी गई धनराशिप। डीपीआरओ ने गलती करने वाले कर्मचारियों का वेतन भी रोकने का दिया निर्देश।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर जिले के ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव के लिए स्वयं सहायता समूहों के खातों के बजाय सीधे रख-रखाव करने वाली महिला या फिर पूर्व प्रधानों के खातों में धनराशि भेज दी गई। इस तरह की गलती जिले की कई ग्राम पंचायतों में हुई है। सर्वाधिक मामले खजनी विकास खंड से सामने आए हैं। फिलहाल डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने भुगतान निरस्त करने के साथ ही धनराशि भेजने वाले कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है।
जानकारी के मुताबिक जिले में 1244 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। उनके रख-रखाव एवं संचालन का जिम्मा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। शासन की ओर से समूहों के खाते में रख-रखाव के लिए जारी धनराशि भेजने का निर्देश दिया गया है।
समूह के खाते में धनराशि जाने के बाद से समूह द्वारा ही संचालन करने वाली महिला को मानदेय दिया जाता है। पर, सहजनवां, खजनी एवं कुछ अन्य ब्लाकों में पूर्व महिला प्रधान या महिला मेठ के खाते में धनराशि भेज दी गई। यह गलती उन गांवों में हुई है, जहां स्वयं सहायता समूह के खाते आसानी से उपलब्ध नहीं हो सके। जल्दी धनराशि भेजने के चक्कर में सीधे महिला के खाते में पैसा भेज दिया गया। जिनके खाते में पैसा गया है, वे वापस भी कर रही हैं। डीपीआरओ ने जिले के सभी ब्लाकों में ऐसी गलती का पता लगाने का निर्देश दिया है।
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जानकारी के मुताबिक जिले में 1244 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। उनके रख-रखाव एवं संचालन का जिम्मा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। शासन की ओर से समूहों के खाते में रख-रखाव के लिए जारी धनराशि भेजने का निर्देश दिया गया है।
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समूह के खाते में धनराशि जाने के बाद से समूह द्वारा ही संचालन करने वाली महिला को मानदेय दिया जाता है। पर, सहजनवां, खजनी एवं कुछ अन्य ब्लाकों में पूर्व महिला प्रधान या महिला मेठ के खाते में धनराशि भेज दी गई। यह गलती उन गांवों में हुई है, जहां स्वयं सहायता समूह के खाते आसानी से उपलब्ध नहीं हो सके। जल्दी धनराशि भेजने के चक्कर में सीधे महिला के खाते में पैसा भेज दिया गया। जिनके खाते में पैसा गया है, वे वापस भी कर रही हैं। डीपीआरओ ने जिले के सभी ब्लाकों में ऐसी गलती का पता लगाने का निर्देश दिया है।
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खजनी की 36 ग्राम पंचायतों में गड़बड़ी सामने आई
सर्वाधिक गड़बड़ी खजनी में सामने आई है। यहां ब्लॉक की 85 ग्राम पंचायतों में से सिर्फ सात पंचायतों में सही तरीके से महिला समूह के खाते में धनराशि भेजी गई जबकि 36 ग्राम पंचायतों में देखरेख करने वाली महिला या पूर्व प्रधान के खातों में 27-27 हजार रुपये भेज दिए गए। ब्लॉक के एडीओ पंचायत परमात्मा पांडेय का कहना है कि सबके पेमेंट रिजेक्ट किए जा रहे हैं। अब तक 27 ग्राम पंचायतों के डोंगल रिजेक्ट किए जा चुके हैं।
1100 से अधिक शौचालयों के लिए भेजी गई धनराशि
सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव करने वाली महिला को छह हजार रुपये प्रति माह जबकि साफ-सफाई के लिए विभिन्न उपकरण एवं सामग्री खरीद के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाना है। पहले चरण में तीन-तीन महीने का भुगतान यानी 27-27 हजार रुपये खाते में भेजा जा रहा है। अब तक 1244 में से 1143 सामुदायिक शौचालयों के लिए धनराशि हस्तांतरित की जा चुकी है। इनमें से कई ग्राम पंचायतों में रुपये गलत तरीके से भेज दिए गए जिसे अब पंचायतीराज विभाग दुरुस्त करने में जुटा है।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि सामुदायिक शौचालयों के संचालन एवं रख-रखाव के लिए स्वयं सहायता समूह के खातों में धनराशि भेजी जाती है। मगर कुछ ब्लॉकों में संचालन करने वाली महिला के खाते में सीधे धनराशि भेजने की बात सामने आ रही है। ऐसे सभी भुगतानों को निरस्त कर दिया गया है। संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोका जाएगा। जल्द ही सभी शौचालयों के लिए समूहों के खाते में धनराशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।
1100 से अधिक शौचालयों के लिए भेजी गई धनराशि
सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव करने वाली महिला को छह हजार रुपये प्रति माह जबकि साफ-सफाई के लिए विभिन्न उपकरण एवं सामग्री खरीद के लिए तीन हजार रुपये प्रतिमाह भुगतान किया जाना है। पहले चरण में तीन-तीन महीने का भुगतान यानी 27-27 हजार रुपये खाते में भेजा जा रहा है। अब तक 1244 में से 1143 सामुदायिक शौचालयों के लिए धनराशि हस्तांतरित की जा चुकी है। इनमें से कई ग्राम पंचायतों में रुपये गलत तरीके से भेज दिए गए जिसे अब पंचायतीराज विभाग दुरुस्त करने में जुटा है।
डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि सामुदायिक शौचालयों के संचालन एवं रख-रखाव के लिए स्वयं सहायता समूह के खातों में धनराशि भेजी जाती है। मगर कुछ ब्लॉकों में संचालन करने वाली महिला के खाते में सीधे धनराशि भेजने की बात सामने आ रही है। ऐसे सभी भुगतानों को निरस्त कर दिया गया है। संबंधित कर्मचारियों का वेतन रोका जाएगा। जल्द ही सभी शौचालयों के लिए समूहों के खाते में धनराशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।