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अमर उजाला कैम्पस डायरी: गोरखपुर अच्छे फंस गए पर कमबख्त, ये चूहे हैं कि...
Wed, 01 Feb 2023 03:23 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 01 Feb 2023 03:23 PM IST
सार
अफसर ने कहा चूहों ने तो नाक में दम कर रखा है। बगल वाले कमरे में बैठे उनके एक मातहत ने अपने साथियों के बीच कहा, साहब तो अच्छों अच्छों को फंसा देते हैं. बड़े बड़े घाघ प्रबंधक भी हार मान गए। पर कमबख्त चूहे हैं कि उनके जाल में फंसते ही नहीं।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक अफसर आजकल चूहों से बहुत परेशान हैं। नैक मूल्यांकन की तैयारी में साफ सफाई कराया तो ढेर सारी फाइलों को चूहों ने कुतर डाला था। यह देखकर साहब का माथा ठनका और उन्होंने कई चूहेदानी मंगवा ली। अपने मातहतों से कहा, अब देखना चूहे कैसे पकड़ते हैं। बस क्या था, अपने कमरे में ही 3-4 चूहेदानी रखवा दी। रोज ऑफिस आते ही सबसे पहले चूहेदानी ही देखते हैं, पर निराशा हाथ लगती है। एक दिन एक आगंतुक ने सवाल पूछ दिया, इतना ज्यादा चूहेदानी क्यों रखवा दिए हैं।
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अफसर ने कहा चूहों ने तो नाक में दम कर रखा है। बगल वाले कमरे में बैठे उनके एक मातहत ने अपने साथियों के बीच कहा, साहब तो अच्छों अच्छों को फंसा देते हैं. बड़े बड़े घाघ प्रबंधक भी हार मान गए। पर कमबख्त चूहे हैं कि उनके जाल में फंसते ही नहीं। और तो और इनदिनों साहब के सामने ही फुदकते रहते हैं जिनसे उनका बीपी भी बढ़ जाता है। यह सुनकर सभी ठहाके लगाने लगे।
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केजी का टेंशन
स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक इन दिनों केजी का टेंशन है। लेकिन दोनों जगह केजी का मतलब अलग-अलग है। स्कूल के मामले में केजी का मतलब किंडर गार्टन है, जबकि यूनिवर्सिटी में केजी मतलब कमलेश गुप्ता।
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शाप से जाप तक
जिले के एक बड़े चिकित्सा शिक्षा संस्थान की मैडमजी ने ऐसा जादू चलाया की विरोधी भी अब यस मैडम-यस मैडम की रट लगाने लगे हैं। मैडम जी कभी नरम कभी गर्म तेवर दिखाकर अधीनस्थों को जी हुजूरी करने के लिए मजबूर कर देती हैं। सूत्रों का कहना है कि विरोधी अपने कुछ रिश्तेदारों को संस्थान में सेट करवाना चाहते हैं। मैडम जी ने इशारा कर दिया है कि जो सकारात्मक सहयोग करेंगे, उन्हीं की सुनवाई होगी। लिहाजा विरोधी अब शाप से जाप की मुद्रा में आ गए हैं।