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Gorakhpur News: छाती में दर्द, हृदय रोग और फेफड़ों की वजह से भी

Sat, 25 Nov 2023 02:41 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 25 Nov 2023 02:41 PM IST
सार

डॉ. आमिर ने बताया कि यह शोध कार्य उसने अपने पिता और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. नदीम अर्शद के साथ मिलकर किया है। इसे सिंगापुर व अमेरिका में हुए कांफ्रेंस में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

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Also due to chest pain heart disease and lungs
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

छाती में होने वाले दर्द के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। शहर के एक छाती रोग विशेषज्ञ के पास दो ऐसे केस आए हैं, जिसमें एक जैसे दर्द अलग-अलग रोग के कारण हैं। डॉक्टर ने जांच के बाद गहनता से रिपोर्ट का अध्ययन किया तो पता चला कि एक केस हृदय रोग का है तो दूसरा टीबी का। यह अध्ययन रिपोर्ट सिंगापुर व अमेरिका के एक जर्नल में भी प्रकाशित हुई है।
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छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. आमिर अर्शद की ओपीडी में 16 साल के किशोर को लेकर परिजन आए और बताया कि कई दिनों से छाती में दर्द है, और सांस लेने में भी दिक्कत है। जांच हुई तो पता चला कि फेफड़े में खून का थक्का जमा है। आमतौर पर ऐसा चोट लगने से होता है, लेकिन परिजनों व किसी प्रकार की चोट लगने की बात से इन्कार किया। इसके बाद कुछ और जांच हुई तो यह बात सामने आई कि किशोर के हृदय की धमनी तीन सेमी चौड़ी हो गई है।
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इसी वजह से खून फेफड़े तक पहुंच गया था। किशोर को हृदय रोग की बीमारी थी। लखनऊ के एक बड़े अस्पताल में कॉर्डियक सर्जरी हुई, तब किशोर की हालत में सुधार आया। ऐसा केस कभी कभार ही आता है।
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इसी अस्पताल में 15 साल का एक किशोर भी छाती में दर्द के चलते लाया गया। जांच में यह पता लगा कि इस किशोर का एक फेफड़ा काम ही नहीं कर रहा है। उसे बुखार तो था, लेकिन खांसी के साथ बलगम आने की समस्या नहीं थी। दूरबीन से जांच की गई तो पता लगा कि किशोर को टीबी है, जबकि उसके परिवार में किसी को ऐसी बीमारी नहीं थी। कई और जांच के बाद टीबी की पुष्टि हुई, जिसकी दवा शुरू की गई। इलाज के बाद फेफड़े ने सामान्य गति से काम शुरू कर दिया। अब यह किशोर पहले से स्वस्थ है।

डॉ. आमिर ने बताया कि यह शोध कार्य उसने अपने पिता और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. नदीम अर्शद के साथ मिलकर किया है। इसे सिंगापुर व अमेरिका में हुए कांफ्रेंस में भी प्रस्तुत किया जा चुका है।

 
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