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UP: निजी अस्पताल में अवकाश पर था डॉक्टर, दूसरे ने किया उपचार- हालत बिगड़ी और हो गई मौत; परिजनों ने किया हंगाम
Wed, 06 May 2026 02:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 06 May 2026 02:32 AM IST
सार
परिजन रविवार सुबह वीरेंद्र को चंद्रा लैप्रोस्कोपिक हॉस्पिटल में भर्ती कराए। आरोप है कि जिस डॉक्टर से इलाज की बात हुई थी, वह आठ मई तक अवकाश पर था। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने दूसरे डॉक्टर से इलाज शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि वे लगातार मरीज को किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग कर रहे थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन टालमटोल करता रहा।
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अस्पताल के बाहर जुटे परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
चिलुआताल क्षेत्र के फतेपुर गली के पास स्थित एक निजी अस्पताल में मंगलवार को मरीज वीरेंद्र यादव (26) की मौत के बाद परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। गुस्साए परिजन शव को अस्पताल के बाहर रखकर कार्रवाई की मांग करने लगे। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह समझाकर मामला शांत कराया।
जानकारी के मुताबिक, कुशीनगर जिले के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के पकड़ियार निवासी रामानंद यादव ने आरोप लगाया कि उनके छोटे भाई वीरेंद्र यादव को पेट में गंभीर समस्या थी। शुरुआत में उसे पडरौना के एक निजी दवा केंद्र पर दिखाया गया, जहां से उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज चौकी के सामने स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई।
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जानकारी के मुताबिक, कुशीनगर जिले के नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के पकड़ियार निवासी रामानंद यादव ने आरोप लगाया कि उनके छोटे भाई वीरेंद्र यादव को पेट में गंभीर समस्या थी। शुरुआत में उसे पडरौना के एक निजी दवा केंद्र पर दिखाया गया, जहां से उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज चौकी के सामने स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई।
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परिजन रविवार सुबह वीरेंद्र को चंद्रा लैप्रोस्कोपिक हॉस्पिटल में भर्ती कराए। आरोप है कि जिस डॉक्टर से इलाज की बात हुई थी, वह आठ मई तक अवकाश पर था। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने दूसरे डॉक्टर से इलाज शुरू कर दिया। परिजनों का कहना है कि वे लगातार मरीज को किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग कर रहे थे, लेकिन अस्पताल प्रशासन टालमटोल करता रहा।
आरोप है कि सोमवार देर रात करीब दो बजे मरीज की हालत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बावजूद अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया। परिजनों की सहमति के बिना ही दूसरे डॉक्टर से ऑपरेशन करा दिया गया, जिसके बाद मरीज की मौत हो गई। मंगलवार शाम करीब पांच बजे आक्रोशित परिजन अस्पताल के बाहर शव रखकर हंगामा करने लगे और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
आरोप है कि सोमवार देर रात करीब दो बजे मरीज की हालत अचानक बिगड़ने लगी। इसके बावजूद अस्पताल से डिस्चार्ज नहीं किया गया। परिजनों की सहमति के बिना ही दूसरे डॉक्टर से ऑपरेशन करा दिया गया, जिसके बाद मरीज की मौत हो गई। मंगलवार शाम करीब पांच बजे आक्रोशित परिजन अस्पताल के बाहर शव रखकर हंगामा करने लगे और चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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हंगामे की सूचना पर मेडिकल चौकी प्रभारी विकास मिश्रा मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। करीब एक घंटे बाद चिलुआतल पुलिस भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद परिजन शव को अपने साथ घर लेकर चले गए।
थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद पाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। तहरीर मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
थाना प्रभारी जगदीश प्रसाद पाल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। तहरीर मिलने पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।