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Exclusive: इंसान के बाल से भी 70 गुना ज्यादा महीन होता है पीएम-1, अब गोरखपुर में भी हो सकेगी इसकी मात्रा की जांच

Thu, 03 Dec 2020 10:48 AM IST
vivek shukla राजीव रंजन, गोरखपुर।
राजीव रंजन, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 03 Dec 2020 10:48 AM IST
सार

  • जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी के सहयोग से लगाया संयंत्र
  • गोरखपुर में अब तक पीएम 2.5 और पीएम-10 के मापने की है सुविधा

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Air polluting factor PM-1 will now be tested from Safar plant in Gorakhpur
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यालय में स्थापित संयंत्र काम करने लगा है। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हवा को प्रदूषित करने वाले सबसे छोटे कारक पीएम-1 की मात्रा की जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगी। यह संभव हुआ है सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) की स्थापना से। सफर योजना के तहत इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) पुणे ने पौने दो करोड़ की लागत से कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यालय में इस संयंत्र को स्थापित किया है। आने वाले समय में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी इसके आंकड़ों का इस्तेमाल करेगा।
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 बता दें कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गोरखपुर शहर को भी प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल कर लिया है। ऐसे में यहां प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए सभी विभाग मिलकर कवायद कर रहे हैं। वहीं, कलेक्ट्रेट परिसर में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में स्थापित सफर संयंत्र शहर के प्रदूषण स्तर की मॉनिटरिंग में काफी सहायक साबित हो सकता है।
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आईआईटीएम पुणे के सहयोग से करीब पौने दो करोड़ की लागत से स्थापित प्रदूषण मापने के अत्याधुनिक संयंत्र ने काम करना शुरू कर दिया है। इस संयंत्र की बड़ी खासियत यह है कि इसमें हवा को प्रदूषित करने वाले सबसे छोटे कण पीएम-1 की मात्रा की भी गणना की जा सकती है।
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सफर संयंत्र में इन पैरामीटर की हो सकेगी गणना

पीएम-2.5 की तुलना में पीएम-1 की ज्यादातर मात्रा बायोमास से उत्पन्न होती है। पीएम-1 मुख्य रूप से ईंधन के दहन या वायु कणों के निर्माण की प्रक्रिया में बनता है, जबकि मोटे कण मुख्य रूप से यांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से बनाते हैं, जैसे हवा में शामिल धूल या ढीली मिट्टी। गोरखपुर में वायु में प्रदूषण की मात्रा की गणना सामान्य तौर पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की जाती है। इसमें पीएम-10 के अलावा सल्फर डाई आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड और नाइट्रोजन आक्साइड की मात्रा की ही जांच हो पाती है।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने बताया कि सफर संयंत्र के माध्यम से हवा में पीएम-1 की मात्रा के अलावा पीएम-2.5, पीएम-10, सल्फर आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, नाइट्रोजन डाइ आक्साइड और ओजोन की जांच की जाती है।

इंसान के बाल से भी 70 गुना ज्यादा महीन होता है पीएम-1

वायु प्रदूषण के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 और पीएम-10 को माना जाता है, लेकिन अब तक एक महत्वपूर्ण और बेहद खतरनाक कण को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिसे पीएम-1 कहा जाता है। पीएम 2.5 इंसान के बाल की मोटाई की तुलना में लगभग 30 गुना महीन है जबकि पीएम 1 इंसान के बाल की तुलना में 70 गुना अधिक महीन है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि कण जितना महीन होगा, नुकसान उतना ही अधिक होगा। पीएम 2.5 आपके फेफड़ों तक पहुंच सकता है जबकि पीएम 1 आपके रक्त तक में प्रवेश कर सकता है। पीएम 1 के प्राथमिक स्रोत वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन हैं। छोटे कण, विशेष रूप से पीएम 1 और बहुत ही बारीक (अल्ट्राफाइन) कण, जो सांस नली तक आसानी से पहुंच सकते हैं, फेफड़ों के पैरेन्काइमा (बाहरी सतह पर पाया जाने वाला एक पदार्थ) में जमा होने की अधिक संभावना रखते हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पंकज यादव ने बताया कि क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास फिलहाल पीएम-1 की मात्रा जांचने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में लगाए गए संयंत्र सफर से यह आंकड़ा मिल पाना संभव हो सकेगा।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अश्विनी मिश्रा ने बताया कि पार्टिकल जितना छोटा होगा उसे शुद्ध करने में हमारा शरीर उतना अधिक अक्षम होता जाता है। शरीर की जो प्रतिरोधक क्षमता है वह नाक के बाल से शुरू होती है। सांस नली में विभिन्न प्रकार के प्रतिरोधक तत्व होते हैं, जो सांस के माध्यम से जाने वाले प्रदूषण को रोकते हैं। इस लिए स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी है कि हम सांस के माध्यम से जो भी अंदर ले रहे हैं, वह पूरी तरह से शुद्ध हो। जितना छोटा तत्व होगा, वह उतनी ही आसानी से फेफड़ों तक पहुंच जाएगा और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाएगा। पीएम-1 इसी तरह के पार्टिकुलेट मैटर होते हैं।
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