Agniveer Recruitment: सपना है सेना की वर्दी पहनना, चाहे एक दिन या चार साल...
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में चल रही अग्निवीर भर्ती में 12 जिलों के अभ्यर्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। इनमें मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही और गाजीपुर के अभ्यर्थियों की संख्या काफी ज्यादा है। मंगलवार की सुबह पहले बैच के अभ्यर्थियों को अंदर बुलाया गया।
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‘वर्षों से फौज में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं। सेना की वर्दी को एक बार पहनना हमारा सपना है। चाहे वह एक दिन के लिए या फिर चार साल के लिए मिले। जिस सपने को बचपन से देख रहे हैं उसे पूरा करना है।’ यह कहना है मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में चल रही अग्निवीर भर्ती रैली में आए अभ्यर्थियों का। उनका कहना है कि ‘पैसा कमाने के बहुत रास्ते हैं लेकिन देश सेवा का कोई विकल्प नहीं।’
केंद्र सरकार ने जब 2022 में अग्निवीर की भर्ती के बारे में घोषणा की थी तब इसका जमकर विरोध हुआ था। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे वर्षों से सेना में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहे हैं, लेकिन चार साल बाद वे फिर से बेरोजगार हो जाएंगे। वहीं अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन युवाओं का सपना केवल देश सेवा करना है उन्हें इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। मंगलवार को युवाओं का यही जोश एमएमएमयूटी परिसर में आयोजित भर्ती रैली में दिखा। पहले दिन बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने अग्निवीर बनने के लिए परीक्षा दी और अब शारीरिक परीक्षा दे रहे हैं।
12 जिलों से आए अभ्यर्थी
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में चल रही अग्निवीर भर्ती में 12 जिलों के अभ्यर्थी प्रतिभाग कर रहे हैं। इनमें मिर्जापुर, जौनपुर, भदोही और गाजीपुर के अभ्यर्थियों की संख्या काफी ज्यादा है। मंगलवार की सुबह पहले बैच के अभ्यर्थियों को अंदर बुलाया गया। सबसे पहले उनकी दौड़ आयोजित हुई, जिसे क्वालिफाई करने वाले अभ्यर्थियों की शारीरिक जांच की गई और क्वालिफाई न करने वालों को वापस भेज दिया गया।
बचपन से ही सपना था कि सेना में जाएं और देश की सेवा करें। हमें सेना की वर्दी को एक बार पहनना है। चार साल के बाद आगे मौका मिला तो ठीक नहीं तो कुछ और काम कर लेंगे।-हर्षित सिंह, भदोही
पिछले आठ साल से तैयारी कर रहे हैं। कक्षा पांचवीं में वीर अब्दुल हमीद की कहानी सुने थे तभी से फौज में जाने का जुनून चढ़ गया। भले एक दिन के लिए जाएं और गोली लग जाए लेकिन जाएंगे जरूर।-दीपक कुमार, मिर्जापुर
बचपन से ही फौज में जाने का सपना था। प्रयागराज में इसकी तैयारी कर रहे थे, वर्दी से लगाव हमें यहां ले आया। जरूरी नहीं कि चार साल बाद लौट जाएंगे। आगे भी मौका मिल सकता है।-सौरभ सिंह, गाजीपुर
मेरे चाचा फौज में हैं। उन्हें देखकर ही सेना में आने का ख्याल आया। पिछले तीन वर्षों से तैयारी कर रहे हैं। मौका मिला तो जंग लड़ने के लिए भी तैयार हैं।-बृजेश पाल, जौनपुर