अंडरग्राउंड माफिया: सियासत में पैर जमाना चाहता था अजीत, जेल जाने के बाद पुलिस तलाश रही कुंडली
भूमाफिया के खिलाफ पांच अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में पहुंचीं बिंदू ने जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। इसके बाद ही पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तेज की थी। और फिर ओमप्रकाश पर पांच महीने में कैंट समेत शहर के अलग-अलग थानों में जालसाजी के 29 केस दर्ज किए जा चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर जिले का माफिया अजीत शाही मूल रूप से देवरिया का रहने वाला है। यहां वह अपनी सियासत चमकाने की फिराक में लगा था। एक बार ब्लाॅक प्रमुख बनने के बाद उसने विधान परिषद का चुनाव लड़ा, लेकिन सपा प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा था। धीरे-धीरे वह अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बन गया और उसके गुर्गे जिले में बैंक बकायादारों पर उसके नाम की धौंस दिखाने लगे। पुलिस अब गोरखपुर में अदालत में आत्मसमर्पण कर सलाखों के पीछे पहुंच माफिया की देवरिया में भी तलाश रही है। उसके खिलाफ खामापार थाने में एक मुकदमा दर्ज है।
ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव में दबंगई दिखाते हुए माफिया ने एक पूर्व विधायक के आवास के पास जमकर गोलियां चलाई थीं। मामले में मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन जिले की पुलिस उसे गिरफ्तार करने से बचती रही। भाटपाररानी थाना क्षेत्र के पकड़ी बाबू का रहने वाला अजीत शाही का बचपन से लगायत पढ़ाई और अपराध की दुनिया का समय गोरखपुर में गुजरा है। अपराध की दुनिया में नाम कमाने और अकूत धन एकत्र करने के बाद राजनीति में पैर जमाने के लिए उसने गृह जिले की ओर कदम बढ़ाया था।
वर्ष 2010 के चुनाव में अजीत अपने गांव से निर्विरोध क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुआ था। इसके बाद ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव मैदान में ताल ठोंक दी। किसी की हिम्मत उसके खिलाफ उतरने की नहीं हुई। लगा कि निर्विरोध चुना जाएगा, लेकिन अंतिम क्षण में एक व्यक्ति ने पर्चा दाखिल कर दिया। वैसे परिणाम अजीत के पक्ष में रहा। इसके बाद 2016 में देवरिया-कुशीनगर के स्थानीय प्राधिकारी पद के लिए हुए चुनाव में भी अजीत ने किस्मत आजमाई, लेकिन समाजवादी पार्टी के रामअवध यादव ने उसे पराजित कर दिया।
बसपा प्रत्याशी अजीत शाही को 1421 मतों के अंतर से हार का मुंह देखना पड़ा। बसपा कमजोर हुई तो अजीत ने भी राजनीति से मुंह मोड़ लिया। अदालत में आत्मसमर्पण करने के बाद अजीत एक बार फिर चर्चा में है। पुलिस उसके गुनाहों का लेखा-जोखा जुटाने में लग गई है। उसके खिलाफ खामपार थाने में एक मुकदमा दर्ज है। आरोप है कि ब्लाॅक प्रमुख के चुनाव के दौरान उसने भिंगारी बाजार स्थित एक पूर्व विधायक के आवास पर गुर्गों के साथ फायरिंग की थी।
बैंकों की रकम वसूली का ले रखा है ठेका
माफिया अजीत शाही ने पूर्वांचल सहित कई अन्य प्रदेशों में बैंक रिकवरी का काम ले रखा है। जिसके जरिए इन जिलों में नेटवर्क मजबूत कर लिया। सवाल यह उठता है कि आखिर बैंक के इस महत्वपूर्ण कार्य में माफिया की इंट्री कैसे हो गई। उसके नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों की बातों पर गौर किया जाए तो दो फर्में हैं, जिसका मालिक अजीत विक्रम शाही है। इस नाम को लेकर असमंजस है। इसी कार्य की बदौलत अजीत ने कई जनपदों में अपना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है।
देवरिया जेल में भी रह चुका है माफिया
माफिया देवरिया जेल में भी करीब पंद्रह दिन बंद रह चुका है। गोरखपुर जेल से यहां ट्रांसफर होकर आया था। उस समय जेल में माफिया राज चलता था। मिलने वालों की संख्या भी काफी रहती थी। उसके लोग हर दिन जेल में मिलने आते थे, जिनके दम पर वह जेल से ही अपना काम संभालता था।
एएसपी राजेश कुमार ने कहा कि माफिया के बारे में जानकारी है कि वह जेल में बंद है। जिले की पुलिस की निगाह है। यहां पर उसके खिलाफ एक मुकदमा दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
सूचीबद्ध बदमाशों को सजा दिलाने में फेल रहती है पुलिस
गोरखपुर जिले के टॉप 10 बदमाशों को सजा दिलाने में पुलिस नाकाम ही साबित होती है। ज्यादातर केसों में माफिया या तो बरी हो चुके हैं या फिर उसमें कानूनी दांव पेंच की वजह से सजा नहीं हो पाया है। बीते दिनों इसे लेकर शासन ने चिह्नित लोगों पर मुकदमे में प्रभावी पैरवी करके उन्हें दोष सिद्ध कराने का लक्ष्य दिया गया, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका है। इस पर प्रमुख सचिव गृह नाराजगी भी जता चुके हैं।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2020 में गोरखपुर पुलिस ने जिले के टॉप 10 बदमाशों की सूची को अपडेट किया था। इसमें झंगहा के सुगहा निवासी व गोरखपुर जोन का मोस्ट वांटेड राघवेंद्र यादव, बेलघाट के बहादुरपुर बुजुर्ग निवासी शैलेन्द्र प्रताप सिंह, गुलरिहा के झुंगिया निवासी राकेश यादव, बांसगांव के धसका निवासी राधेश्याम यादव उर्फ राधे, कैंट क्षेत्र के बेतियाहाता निवासी अजीत शाही, रेलवे कालोनी निवासी सत्यव्रत राय, खजनी के बसडीला निवासी सुभाष शर्मा, गीडा के मल्हीपुर निवासी प्रदीप सिंह, शाहपुर के आदर्श नगर निवासी सुधीर सिंह और धर्मशाला बाजार निवासी विनोद उपाध्याय का नाम शामिल है। लेकिन, सूची तैयार होने के बाद एक भी माफिया को सजा दिलाने में पुलिस कामयाब नहीं हो सकी है, जबकि कोर्ट में पैरवी के लिए ऑपरेशन शिकंजा अभियान भी चलता है। इसे लेकर पिछले दिनों प्रमुख सचिव गृह ने डीएम व एसएसपी को पत्र लिख सजा दिलाने में रुचि लेने को भी कहा है।
सीएम ने तरेरीं आंखें तब दर्ज हुए थे 29 मुकदमे
भूमाफिया के खिलाफ पांच अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में पहुंचीं बिंदू ने जमीन हड़पने का आरोप लगाया था। इसके बाद ही पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई तेज की थी। और फिर ओमप्रकाश पर पांच महीने में कैंट समेत शहर के अलग-अलग थानों में जालसाजी के 29 केस दर्ज किए जा चुके हैं। 30 अगस्त को पूर्व नौ सैनिक मनीष कुमार मिश्रा ने केस दर्ज कराया था।
कुशीनगर के कसया क्षेत्र के वरवा सुकदेव निवासी दुर्गावती, रमेश मिश्रा, किरन राय, लक्ष्मीपुर बुजुर्ग निवासी अलका पांडेय, कुबेरस्थान के सिंहन, जोड़ी निवासी मंजू और कोहरवलिया निवासी मीरा ने केस दर्ज कराया था। अब फिर से छह लोगों की तहरीर पर केस दर्ज है। इसके बाद सात और लोग सामने आए थे, जिसमें देवरिया की संगीता व बिहार के लोग शामिल थे। 23 अगस्त को तत्कालीन कैंट इंस्पेक्टर सुधीर सिंह की तहरीर पर ओमप्रकाश के अलावा सनी देवल, धीरज साहनी, संजय पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई की थी।