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गोरखपुर विश्वविद्यालय: दीक्षांत समारोह के बाद प्रो. कमलेश गुप्ता फिर निलंबित, तीसरी बार हुई कार्रवाई
Thu, 29 Jun 2023 02:44 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 29 Jun 2023 02:44 PM IST
सार
अनुशासनात्मक समिति ने पाया है कि प्रो. गुप्त अक्तूबर 2022 के निलंबन के बाद भी अपने आचरण में कोई सुधार नहीं कर रहे हैं न ही नए आरोप पत्र का संतोषजनक जवाब दे रहे हैं। यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
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प्रोफेसर कमलेश गुप्ता। (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के प्रो. कमलेश कुमार गुप्त को बुधवार को एक बार फिर निलंबित कर दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर 24 जून को कार्य परिषद की बैठक में ही उनका निलंबन निरस्त किया गया था।
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गोविवि के कुलपति प्रो. राजेश सिंह के खिलाफ लगातार मोर्चा खोले प्रो. कमलेश गुप्त को पिछले डेढ़ वर्ष में तीसरी बार निलंबन का सामना करना पड़ा है। विवि प्रशासन के मुताबिक नए आरोपों में अनुशासन समिति की अनुशंसा तथा कार्य परिषद की संस्तुति पर यह कार्रवाई की गई है।
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कुलपति प्रो. राजेश सिंह व कुलसचिव विशेश्वर प्रसाद के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्रो. कमलेश के अक्तूबर 2022 के निलंबन के मामले में कार्य परिषद द्वारा अनुशासनात्मक समिति गठित की गई थी। इस बीच हाईकोर्ट के आदेश को देखते हुए कार्य परिषद द्वारा 24 जून को उनका निलंबन स्थगित रखने का निर्णय लिया गया।
आरोप के मुताबिक अनुशासनात्मक समिति ने पाया है कि प्रो. गुप्त अक्तूबर 2022 के निलंबन के बाद भी अपने आचरण में कोई सुधार नहीं कर रहे हैं न ही नए आरोप पत्र का संतोषजनक जवाब दे रहे हैं। यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच की कार्यवाही पूर्ण होने तक प्रो. कमलेश को निलंबित रखा जाएगा। निलंबन अवधि में प्रो. गुप्त संस्कृत विभाग से संबद्ध रहेंगे।
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कुलपति पद के दुरुपयोग का परिणाम है निलंबन- प्रो. कमलेश
प्रो. कमलेश ने उन्हें मिले नोटिस को अपने फेसबुक आईडी पर पोस्ट करते हुए लिखा है, यह अन्याय की पराकाष्ठा है। आज फिर मुझे मेरे आवास पर रात 9 बजे निलंबन का आदेश प्राप्त कराया गया है। कार्य परिषद ने 24 जून की बैठक में हाईकोर्ट के 10 मई के आदेश के अनुपालन में मेरा निलंबन निरस्त किया था। पुन: झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के साथ दिया गया यह निलंबन आदेश न केवल उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है, बल्कि कार्य परिषद के आदेश की अवहेलना भी। यह निलंबन आदेश कुलपति पद के घोर दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।
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कुलपति पद के दुरुपयोग का परिणाम है निलंबन- प्रो. कमलेश
प्रो. कमलेश ने उन्हें मिले नोटिस को अपने फेसबुक आईडी पर पोस्ट करते हुए लिखा है, यह अन्याय की पराकाष्ठा है। आज फिर मुझे मेरे आवास पर रात 9 बजे निलंबन का आदेश प्राप्त कराया गया है। कार्य परिषद ने 24 जून की बैठक में हाईकोर्ट के 10 मई के आदेश के अनुपालन में मेरा निलंबन निरस्त किया था। पुन: झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के साथ दिया गया यह निलंबन आदेश न केवल उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है, बल्कि कार्य परिषद के आदेश की अवहेलना भी। यह निलंबन आदेश कुलपति पद के घोर दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।