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हाल-ए-बीआरडी: आग से तो बच गए, पर बदइंतजामी से कौन बचाए

Wed, 02 Aug 2023 12:11 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 02 Aug 2023 12:11 PM IST
सार

अपने मरीज की देखभाल के लिए फर्श पर बैठीं सुरजावती साफ-सफाई को लेकर नाखुश हैं। कहतीं हैं कि सुबह डॉक्टर साहब के राउंड पर आने से पहले एक बार पोंछा लगता है, उसके बाद पूरे दिन ऐसे ही रहता है।

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After fire incident pain of shift patients and attendants reflected in ward number 100
बीआरडी मेडिकल के वार्ड नंबर 100 में भर्ती मरीज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के वार्ड नंबर 14 में लगी आग की बात 5 दिन पुरानी हो गई, लेकिन मरीजों और तीमारदारों के जेहन में खौफ आज भी कायम है। इतना ही नहीं, तेज धमाकों व धुएं के बीच से बच निकल कर आए मरीजों के इलाज में आ रहीं दिक्कतें भी कम होने का नाम नहीं ले रहीं। मरीजों के मुताबिक बड़ी दिक्कत यह भी है कि यहां कोई सुनने वाला ही नहीं है।

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बीते बृहस्पतिवार की रात आग लगने की घटना के बाद वार्ड 14 में भर्ती मरीजों को तीन वार्डों में शिफ्ट किया गया। वार्ड नंबर दो, 11 और 100 शिफ्ट इन मरीजों को अब बदइंतजामी से डर लग रहा है। उनका कहना है कि दिन में तो ज्यादा दिक्कत नहीं होती है।
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डॉक्टर भी राउंड पर आते हैं। लेकिन रात में कोई ड्रिप बदलने वाला भी नहीं होता है। ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी सोए रहते हैं। जगाने पर भड़क भी उठते हैं। वार्ड नंबर 100 में भर्ती गोरखपुर की विद्यावती ने बताया कि आग की घटना के अगले दिन जब यहां बेड मिला तब व्यवस्था बड़ी अच्छी थी। लेकिन अब जब दिन में डॉक्टर साहब आते हैं, तभी अन्य कर्मचारी भी सक्रिय दिखते हैं।
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सबसे अधिक दिक्कत रात में होती है। अगर ड्रिप बदलवाना हो या इंजेक्शन लगवाना हो तो रात में 12 बजे से सुबह 6 बजे तक बहुत मनहार करनी पड़ती है। ड्यूटी पर सो रहे कर्मचारी बड़ी मुश्किल से उठते हैं।

अपने मरीज की देखभाल के लिए फर्श पर बैठीं सुरजावती साफ-सफाई को लेकर नाखुश हैं। कहतीं हैं कि सुबह डॉक्टर साहब के राउंड पर आने से पहले एक बार पोंछा लगता है, उसके बाद पूरे दिन ऐसे ही रहता है।

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लोग बोले
मेरे एक रिश्तेदार के घर की महिला वार्ड नंबर 100 में भर्ती है। मैं उसे देखने गया था। परिजनों ने बताया कि दवा आदि तो मिल जा रही है, लेकिन साफ-सफाई की व्यवस्था खराब है।-श्याम सुंदर यादव, गुलरिहा।

मेरे एक परिचित भर्ती हैं, उनकी कुशलता जानने आया था। बताया कि नए वार्ड में शिफ्ट होने के बाद अब दवा, जांच आदि के लिए बार-बार चक्कर लगाना पड़ रहा है। डॉक्टर से शिकायत की तो जल्दी ही व्यवस्था में सुधार की बात कही। -तनवीर, गोरखपुर।
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