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गोरखपुर: दरोगाओं को जूनियर किए जाने निपटारा कराएंगे एडीजी, इस कॉपी की ली जाएगी मदद

Mon, 21 Jun 2021 05:26 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 21 Jun 2021 05:26 PM IST
सार

टेक्निकल सर्विसेज ने मांगी दरोगाओं के कैरेक्टर रोल की कॉपी, गड़बड़ी किए जाने वाले बाबुओं को भी नहीं जाएगा बख्शा।

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ADG will Provide Justice to police officers to be made junior in Gorakhpur
गोरखपुर एडीजी अखिल कुमार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

दरोगाओं के पीएनो में खेल कर जूनियर किए जाने वाले पीड़ित दरोगाओं को न्याय दिलाने के लिए खुद गोरखपुर जोन के एडीजी अखिल कुमार आगे आ गए। उन्होंने कहा कि वह खुद इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, उम्मीद है जल्द ही पीड़ित दरोगाओं का पीएनो ठीक हो जाएगा और उन्हें न्याय मिल सकेगा। इतना ही नहीं, यह भी कहा कि दरोगाओं के पीएनो ठीक कराने के साथ ही इसकी गड़बड़ी किए जाने वाले बाबुओं को भी बख्शा नहीं जाएगा। जांच में दोषी पाए जाने वाले बाबुओं के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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एडीजी के हस्तक्षेप के बाद एसएसपी दिनेश कुमार प्रभु ने पहल कर दी है। एसएसपी के मुताबिक, दरोगाओं के पीएनो ठीक कराने के मामले में वे लगातार ट्रेनिंग सेंटर्स व डीजी टेक्निकल सर्विसेज के अधिकारियों से संपर्क में हैं। यह पूरा मामला शासन के भी संज्ञान में है।
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एसएसपी ने बताया कि इस पूरे मामले से पहले ही शासन को अवगत कराया जा चुका है। दरोगाओं की ट्रेनिंग डेट कंफर्म करने के लिए ट्रेनिंग सेंटर्स को भी पत्र भेजा गया है। रविवार को डीआईजी टेक्निकल सर्विसेज प्रतिभा अंबेडकर ने इस मामले में यहां के पीड़ित दरोगाओं के कैरेक्टर रोल के पहले पेज की कॉपी मांगी है। जिसके जरिए उनकी ट्रेनिंग डेट निकालकर उनके पीएनो को तत्काल ठीक कराया जा सके।
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एसएसपी ने कहा कि सोमवार को सभी दरोगाओं के कैरेक्टर रोल के पहले पेज की कॉपी डीजी टेक्निकल सर्विसेज मुख्यालय भेज दी जाएगी। उम्मीद है जल्द ही दरोगाओं के पीएनो ठीक होने की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

 

क्या है पूरा मामला

2015 बैच के दरोगाओं की नवंबर 2015 से ट्रेनिंग शुरू हुई थी। उन्होंने नवंबर 2015 को ट्रेनिंग के लिए आमद किया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वर्ष 2017 में उन्हें जिला आवंटित हुआ और अगस्त 2017 में 195 दारोगा गोरखपुर में ज्वाइन किए। लेकिन इन दारोगाओं का पीएनो नंबर 2017 का आवंटित कर दिया। यानी उन्हें 2017 बैच का दरोगा बना दिया। जबकि अन्य जिलों में आमद करने वाले दरोगाओं को 2015 बैच जारी हुआ।

इसी तरह 2017 बैच के दरोगाओं ने 2017 में ट्रेनिंग की। लेकिन जिन लोगों ने ट्रेनिंग पूरी कर अन्य जिलों में आमद किया, उन्हें 2017 बैच मिला और जिन लोगों ने गोरखपुर जिले में आमद किया, उन्हें 2018 बैच का पीएनो जारी कर दिया गया। ऐसे में सर्विस बुक में 2015 बैच के दरोगा दो साल तो 2017 बैच के दरोगा एक साल जूनियर हो गए।

दरोगाओं का आरोप है कि घूस न देने पर पुलिस दफ्तर के बाबुओं ने उनके साथ ऐसा किया। जबकि एसएसपी ने बताया था कि यह मामला लखनऊ से हुआ है इसमें गोरखपुर के बाबू का कोई रोल ही नहीं है।

एडीजी गोरखपुर जोन अखिल कुमार ने कहा कि गोरखपुर में 2015, 2016, 2017 व 2018 बैच के दरोगाओं के पीएनो में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आया है। यह गड़बड़ी कैसे हुई, इसपर विभागीय जांच कराई जा रही है। साथ ही पीएनो ठीक कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसके लिए एसएसपी गोरखपुर को निर्देशित किया गया है कि वह स्वंय इस मामले का जल्द से जल्द निस्तारण कराएं।

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