दिमागी बुखार से निपटने के लिए स्कूलों में चलेंगी अतिरिक्त क्लास, जागरूक होंगे विद्यार्थी
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पूर्वांचल के लिए महामारी कहे जाने वाले दिमागी बुखार से निपटने के लिए अब स्कूली बच्चों को सहारा लिया जाएगा। उन्हें जागरूक किया जाएगा कि बीमारी से बचा कैसे जाए। इसके लिए प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विशेष क्लास चलेंगी। इसमें शिक्षकों द्वारा बच्चों को यह जानकारी दी जाएगी कि दिमागी बुखार और संक्रामक बीमारी कैसे होती है और इससे बचाव कैसे कर सकेंगे। शासन स्तर से इस संबंध में पत्र भी जारी हो चुका है।
शासन का मानना है कि अगर बच्चे जागरूक होंगे तो बीमारी पर काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है। भारत-नेपाल से सीमा से सटे जनपदों के तराई क्षेत्रों में गणना की जाती है। यहां हर वर्ष अप्रैल से नवबंर तक जेई, एईएस ( दिमागी बुखार) का प्रकोप फैलाता है।
इस बीमारी की गिरफ्त में 12 वर्ष तक के बच्चे अधिक आते हैं। बीमारी से निपटने के लिए शासन स्तर से अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था किए जाने के साथ-साथ लोगों को जागरूक कराने का काम करती है। परिषदीय विद्यालयों में अतिरिक्त क्लास और प्रार्थना सभा के समय बच्चों को दिमागी बुखार और संचारी रोग नियंत्रण के बारे में जागरूक किया जाएगा। इस संबंध में बीएसए डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि पत्र आया है। शासन के हर आदेश का पालन कराया जाएगा।
अतिरिक्त क्लास चलाकर करेंगे जागरूक
शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक स्कूलों में सबसे पहले प्रार्थना होगी। इसके बाद 40-50 मिनट की क्लास चलाई जाएगी। इसमें बच्चों को जानकारी दी जाएगी कि स्वच्छ पानी का सेवन करें। मच्छरदानी लगाकर सोएं, आसपास गंदगी न होने दें, नाली में पानी जमा न होने दें।
किसी बर्तन में पानी जमा न होने दें। खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं। बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह लें। अगर बुखार के बाद झटका आता है तो तत्काल चिकित्सक के पास पहुंचें। बुखार तेज होने पर सिर पानी से भिंगोकर पट्टी करें। बीमारी से बचाव से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
स्कूलों में जागरूक करने का उद्देश्य
दिमागी बुखार के शिकार सबसे अधिक 12 वर्ष की उम्र तक के बच्चे होते हैं। पांच से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों की संख्या परिषदीय स्कूलों में अधिक रहती है। अगर उन्हें बीमारी से बचाव के बारे में जानकारी दी जाएगी तो बीमारी से निपटने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
दायरे में आएंगे 2726 परिषदीय विद्यालय
आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 2726 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें लगभग तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। साथ ही लगभग पांच हजार शिक्षक शिक्षण कार्य करते हैं। ऐसे में अगर सभी लोग अभियान से जुड़ेंगे तो बीमारी को रोकना मुमकिन होगा।