गोरखपुर महिला अस्पताल का दौरा: अपर मुख्य सचिव ने पतली दाल देखकर पूछा, 'ये सूप है या दाल'
सवा घंटे में हर एक मामले की ली जानकारी, जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड में भी गए।
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गोरखपुर महिला अस्पताल का सोमवार को निरीक्षण करने पहुंचे अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार ने मरीजों के लिए बंटने वाली दाल देखकर पूछा कि यह सूप है या दाल? इस पर उन्हें बताया गया कि है तो दाल ही, लेकिन पतली होने की वजह से सूप जैसी दिख रही है। इसके बाद वह आगे चले गए।
दरअसल, महिला अस्पताल की लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर अपर मुख्य सचिव सीडीओ इंद्रजीत सिंह और सदर एसडीएम कुलदीप मीणा के साथ निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने प्रसव, आयुष्मान योजना और दवाओं की आपूर्ति के संबंध मेें जानकारी ली। लेबर रूम और ओटी में मरीजों के तीमारदारों से हो रही वसूली की बात पर उन्होंने ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार महिला अस्पताल में पहुंचने के बाद सबसे पहले एसआईसी डॉ नीना त्रिपाठी के कक्ष में बैठक की। एसआईसी से कोरोना महामारी के बाद हुए प्रसव के मामलों की जानकारी ली। एसआईसी ने उन्हें बताया कि प्रसव के मामले बढ़े हैं।
सामान्य प्रसव पर ज्यादा जोर है। इस बीच अपर मुख्य सचिव ने कमियों के बारे में पूछा तो एसआईसी ने बताया कि महिला अस्पताल में दो पीडियाट्रिशियन और एक एनेस्थीसिया के डॉक्टरों की जरूरत है। दवाओं की कमी भी बताई। अपर मुख्य सचिव ने तत्काल लखनऊ वार्ता कर दवा की समुचित व्यवस्था कराने के निर्देश दिए। इसके बाद अपर मुख्य सचिव ने रोगी कल्याण समिति के बजट के बारे में जानकारी ली। लेबर रूम व पीएनसी वार्ड, केएमसी वार्ड, प्राइवेट वार्ड और एसएनसीयू वार्ड का निरीक्षण किया।
सवालों पर बोले, चिह्नित कर करें कार्रवाई
अपर मुख्य सचिव को बताया गया कि पिछले दिनों पानी की टंकी में पक्षियों की हड्डी मिली थी। इसके अलावा लेबर रूम और ओटी में गर्भवतियों के तीमारदारों से रुपये वसूले जाते हैं। इन सवालों पर उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी मुझे नहीं है, लेकिन अगर ऐसा है तो ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच एसआईसी ने मीडिया को बताया कि दोनों मामले का निराकरण कर दिया गया है। इसकी जानकारी डीएम को दे दी गई है।
भोजन की ट्रॉली देख ली खाने की जानकारी
अपर मुख्य सचिव पीएनसी वार्ड में एक प्रसूता से व्यवस्थाओं की जानकारी ले रहे थे। इस बीच उन्हें बताया गया कि पीएनसी वार्ड के बगल में अगर वार्ड बन जाए तो माताओं के लिए व्यवस्था बेहतर हो जाती। इस पर उन्होंने एसआईसी को निर्देश दिया कि इसकी व्यवस्था करें।
कोई सुनता नहीं मेरी
अपर मुख्य सचिव ने वार्ता के क्रम में एसआईसी से व्यवस्थाओं के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में कोई मेरी नहीं सुनता है। इस वजह से काम कराने में परेशानी हो रही है। काम न करके लोग साजिश करते हैं।
एक्स-रे कक्ष में पहुंचकर बोले, इतना अंधेरा क्यों है
अपर मुख्य सचिव जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इंसेफेलाइटिस वार्ड का निरीक्षण किया। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ एसी श्रीवास्तव ने बताया कि वार्ड में एईएस के तीन बच्चे भर्ती हैं, जबकि अन्य बच्चे सामान्य रूप से बीमार हैं। इस पर उन्होंने तीमारदारों से पूछताछ की। इसके बाद वह डिजिटल एक्सरे रूम की तरफ चले गए। जहां उन्होंने देखा कि भीड़ अधिक है और कमरे के आसपास अंधेरा है। उन्होंने अंधेरे का कारण पूछा तो एसआईसी ने बताया कि कुछ देर पहले ट्यूबलाइट फ्यूज हो गई है। इसके बाद एमआरआई बिल्डिंग में पहुंचकर उन्होंने कोविड टीकाकरण की जानकारी ली।