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Gorakhpur News: एम्स में आभा एप से अब दो मिनट में बनेगा पर्चा, मरीजों को नहीं होगी परेशानी
Tue, 21 Feb 2023 01:08 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 21 Feb 2023 01:08 PM IST
सार
आभा से पर्चा बनवाने के लिए मरीजों को अपने मोबाइल फोन में आभा एप को डाउनलोड करना होगा। आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड करना होगा। अस्पताल के मुख्य द्वार पर आभा का क्यूआर कोड चस्पा रहेगा, उसे एप से स्कैन करते ही एक एकाउंट नंबर मिल जाएगा।
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गोरखपुर एम्स।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में अब ओपीडी का पर्चा आभा एप से दो मिनट में बन जाएगा। मरीज को इस एप को अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड करना होगा। आधार और मोबाइल नंबर से पंजीकरण करने के बाद मरीज को एम्स में इलाज के लिए पर्ची मिल जाएगी। यही नहीं, इसके बाद मरीज देश में किसी भी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाएगा तो उसकी बीमारी की हिस्ट्री डॉक्टर को इस एप से पता चल जाएगी।
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एम्स में सोमवार को सुरक्षाकर्मी, कर्मचारी, पैरामेडिकल स्टॉफ, नर्सिंग स्टॉफ के साथ शिक्षक और छात्रों को एप के संचालन और पंजीकरण की ट्रेनिंग दी गई। इसके लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी से विशेषज्ञ के तौर पर पारस और दीपांकर आए थे। उन्होंने एम्स कर्मियों को बताया कि यह सिस्टम मरीजों के लिए हेल्थ रिकॉर्ड का डिजीटल लॉकर होगा। इसके बाद मरीजों को अस्पतालों में पर्चे के लिए लाइन नहीं लगानी पड़ेगी।
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आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) में पंजीकृत मरीज का अधिकतम दो मिनट में पर्चा बन जाएगा। पहले एक पर्चा बनाने में तीन से पांच मिनट लगते थे। शुरुआत में एम्स में एक पटल खोला गया है। अन्य पटलों पर पहले की तरह पर्चा बनाया जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को दिक्कत न हो। ग्रामीण इलाके वाले मरीज पहले की तरह पर्चा पटल पर ओपीडी में दिखाने के लिए पर्चा बनवा सकते हैं।
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आभा एप से इस तरह बनवा सकेंगे पर्चा
आभा से पर्चा बनवाने के लिए मरीजों को अपने मोबाइल फोन में आभा एप को डाउनलोड करना होगा। आधार कार्ड और मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड करना होगा। अस्पताल के मुख्य द्वार पर आभा का क्यूआर कोड चस्पा रहेगा, उसे एप से स्कैन करते ही एक एकाउंट नंबर मिल जाएगा। मरीज को पर्चा पटल पर उस नंबर को बताना होगा।
पटल लिपिक कंप्यूटर में नंबर को डालेगा। इससे मरीज के आधार कार्ड की जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। मरीज से केवल बीमारी के बारे में पूछा जाएगा और डाक्टर कक्ष का नंबर भरकर तत्काल पर्चा प्रिंट कर दे दिया जाएगा। इसके बाद मरीज डॉक्टर के पास चला जाएगा।
आभा एप से पैथोलॉजी और आंतरिक विभाग भी जुड़ेंगे
एम्स की निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आभा एप से पर्चा बनाने की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में इस एप को पैथोलॉजी और आंतरिक विभाग से भी जोड़ा जाएगा। एप से मरीजों को भर्ती भी किया जाएगा और डिस्चार्ज किया जाएगा।
इसमें एक एकाउंट नंबर दिया जाएगा। एकाउंट नंबर बताते ही देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर मरीज की पूरी हिस्ट्री जान लेगा। इससे डॉक्टरों को इलाज में आसानी होगी।
एम्स निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने कहा कि एम्स में आभा एप से मरीजों को पर्चा बनवाने में आसानी होगी। मरीजों को ओपीडी काउंटर के पटल पर जाकर अपना नाम, पिता का नाम, उम्र और पता आदि बताने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जानकारी मरीज आभा एप पर दर्ज करेगा और पर्चा बन जाएगा। इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। इसके लिए एम्स कर्मचारियों और मरीजों को ट्रेनिंग दी जाएगी।
पटल लिपिक कंप्यूटर में नंबर को डालेगा। इससे मरीज के आधार कार्ड की जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी। मरीज से केवल बीमारी के बारे में पूछा जाएगा और डाक्टर कक्ष का नंबर भरकर तत्काल पर्चा प्रिंट कर दे दिया जाएगा। इसके बाद मरीज डॉक्टर के पास चला जाएगा।
आभा एप से पैथोलॉजी और आंतरिक विभाग भी जुड़ेंगे
एम्स की निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने बताया कि जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आभा एप से पर्चा बनाने की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। आने वाले दिनों में इस एप को पैथोलॉजी और आंतरिक विभाग से भी जोड़ा जाएगा। एप से मरीजों को भर्ती भी किया जाएगा और डिस्चार्ज किया जाएगा।
इसमें एक एकाउंट नंबर दिया जाएगा। एकाउंट नंबर बताते ही देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर मरीज की पूरी हिस्ट्री जान लेगा। इससे डॉक्टरों को इलाज में आसानी होगी।
एम्स निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने कहा कि एम्स में आभा एप से मरीजों को पर्चा बनवाने में आसानी होगी। मरीजों को ओपीडी काउंटर के पटल पर जाकर अपना नाम, पिता का नाम, उम्र और पता आदि बताने की जरूरत नहीं होगी। इसकी जानकारी मरीज आभा एप पर दर्ज करेगा और पर्चा बन जाएगा। इस सुविधा के शुरू होने से मरीजों को लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। इसके लिए एम्स कर्मचारियों और मरीजों को ट्रेनिंग दी जाएगी।