बदल रहा है गोरखपुर: जिला अस्पताल में ओपीडी व प्रशासनिक दफ्तर के लिए बनेगा तीन मंजिला भवन
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जिला अस्पताल में इलाज कराने गए मरीजों और तीमारदारों को जल्द ही बेहतर सुविधा मिलेगी। डॉक्टरों के कमरों में भीड़ नहीं होगी। मरीजाें और तीमारदारों के बैठने के लिए वेटिंग हॉल होगा। इसके लिए जिला अस्पताल परिसर में तीन मंजिला भवन बनेगा। इसमें प्रथम तल पर प्रशासनिक भवन और दूसरे व तीसरे तल पर ओपीडी होगी। नया भवन सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
इसकी डिजाइन ऐसी तैयार की गई है कि एंबुलेंस व फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बिल्डिंग के चारों तरफ आसानी से पहुंच सकें। लागत 24 करोड़ रुपये आएगी। प्रस्ताव शासन स्तर पर मंजूर हो चुका है।
जिला अस्पताल का भवन काफी पुराना है। इसमें जगह कम होने से आधे डॉक्टर सड़क की दूसरी तरफ स्थित नए भवन में बैठते हैं। पुराने भवन में एक कमरे में दो-दो डॉक्टर बैठते हैं। इस वजह से मरीजों को जांच व इलाज में भी दिक्कत आती है।
जिला अस्पताल के लिए नया भवन बनवाने का प्रस्ताव वर्ष 2019 में शासन को भेजा गया था। किसी न किसी वजह से मामला अटकता रहा। पिछले सप्ताह शासन स्तर पर फिर इसकी चर्चा हुई और नए सिरे से प्रस्ताव तैयार कर भेजने के लिए कहा गया। इसके बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने नया प्रस्ताव तैयार कराया है। इसमें वर्तमान अस्पताल के बगल में कर्मचारियों के जर्जर आवास को तोड़कर व अन्य खाली जगह को मिलाकर एक नया भवन बनवाना है।
तीन मंजिले भवन में प्रथम तल पर प्रशासनिक भवन होगा। दूसरे और तीसरे तल पर ओपीडी ब्लॉक बनेगा। इसमें डॉक्टरों के चैंबर, मरीजों के लिए प्रतीक्षालय आदि की व्यवस्था होगी।
नए भवन के बन जाने पर सड़क की दूसरी तरफ चलने वाले ओपीडी ब्लॉक को भी इसी में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा।
बगल में गलियारा, सामने होगी पार्किंग
सामने करीब 100 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसमें रोगी व उनके तीमारदारों के वाहन होंगे। इसके अलावा पीछे की तरफ डॉक्टरों के लिए अलग से पार्किंग बनाई जाएगी। ताकि उन्हें आने-जाने में कोई दिक्कत न हो। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए भी अलग पार्किंग होगी।
जिला अस्पताल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अंबुज श्रीवास्तव ने कहा कि शासन के निर्देश पर नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें प्रशासनिक ब्लॉक व सभी ओपीडी का संचालन करने का प्रस्ताव है। बिल्डिंग में सुरक्षा मानकों के साथ-साथ भविष्य में विस्तार की संभावनाओं का ख्याल रखा गया है। इसे कर्मचारियों के पुराने जर्जर भवन को तोड़कर बनाया जाना है।