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Gorakhpur News: आसमान में सजेगी अनोखी जोड़ी, चंद्रमा और शनि का होगा दुर्लभ मिलन
Mon, 03 Aug 2026 02:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 03 Aug 2026 02:27 AM IST
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- आज रात 10 बजे के बाद आसमान में दिखेगा दुर्लभ नजारा
गोरखपुर। खगोल प्रेमियों के लिए सोमवार की रात खास रहने वाली है। इस दौरान चंद्रमा और शनि ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। इस खगोलीय घटना को समीपतम दूरी कहा जाता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दोनों खगोलीय पिंड वास्तव में पास नहीं आएंगे बल्कि पृथ्वी से देखने पर वे एक-दूसरे के निकट प्रतीत होंगे। वास्तव में उनके बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि यह नजारा सोमवार की रात लगभग 10 बजे से दिखाई देना शुरू होगा और मंगलवार की भोर तक देखा जा सकेगा। इस दौरान चंद्रमा और शनि पूर्वी आकाश में दिखाई देंगे व धीरे-धीरे दक्षिणी क्षितिज की ओर बढ़ते नजर आएंगे। यह दुर्लभ दृश्य मीन तारामंडल क्षेत्र में दिखाई देगा।
दोनों खगोलीय पिंड बिना किसी विशेष उपकरण के भी खुली आंखों से आसानी से देखे जा सकेंगे। हालांकि जिन लोगों के पास दूरबीन, बाइनोकुलर या टेलीस्कोप उपलब्ध है, वे चंद्रमा के क्रेटर और शनि के प्रसिद्ध छल्लों का भी बेहतर अवलोकन कर सकेंगे। इस प्रकार की घटनाएं न केवल ब्रह्मांड की गतिशीलता को समझने का अवसर देती हैं बल्कि वैज्ञानिक सोच और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि भी बढ़ाती हैं।
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गोरखपुर। खगोल प्रेमियों के लिए सोमवार की रात खास रहने वाली है। इस दौरान चंद्रमा और शनि ग्रह एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देंगे। इस खगोलीय घटना को समीपतम दूरी कहा जाता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दोनों खगोलीय पिंड वास्तव में पास नहीं आएंगे बल्कि पृथ्वी से देखने पर वे एक-दूसरे के निकट प्रतीत होंगे। वास्तव में उनके बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी बनी रहेगी। उन्होंने बताया कि यह नजारा सोमवार की रात लगभग 10 बजे से दिखाई देना शुरू होगा और मंगलवार की भोर तक देखा जा सकेगा। इस दौरान चंद्रमा और शनि पूर्वी आकाश में दिखाई देंगे व धीरे-धीरे दक्षिणी क्षितिज की ओर बढ़ते नजर आएंगे। यह दुर्लभ दृश्य मीन तारामंडल क्षेत्र में दिखाई देगा।
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दोनों खगोलीय पिंड बिना किसी विशेष उपकरण के भी खुली आंखों से आसानी से देखे जा सकेंगे। हालांकि जिन लोगों के पास दूरबीन, बाइनोकुलर या टेलीस्कोप उपलब्ध है, वे चंद्रमा के क्रेटर और शनि के प्रसिद्ध छल्लों का भी बेहतर अवलोकन कर सकेंगे। इस प्रकार की घटनाएं न केवल ब्रह्मांड की गतिशीलता को समझने का अवसर देती हैं बल्कि वैज्ञानिक सोच और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि भी बढ़ाती हैं।
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