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नई शिक्षा नीति पैराडाइस शिफ्ट का बेहतरीन उदाहरण : प्रो. वशिष्ठ
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- संगोष्ठी में लखनऊ विवि के शिक्षा शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. यूसी वशिष्ठ ने रखे विचार
- गोरखपुर विवि के शिक्षा शास्त्र विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. यूसी वशिष्ठ ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 पैराडाइस शिफ्ट का बेहतरीन उदाहरण है। शिक्षा नीति 2020 को पढ़ने की आवश्यकता है।
वे रविवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। प्रो. वशिष्ठ ने ''''एक्सप्लोरिंग न्यू पैराडाइम ऑफ रिसर्च'''' विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति ने शोध के क्षेत्र में नए-नए अनुसंधान विधियां जोड़ी हैं। विशिष्ट वक्ता संभलपुर विश्वविद्यालय के प्रो. जुबराज खमारी ने ''''पैराडाइम ऑफ रिसर्च'''' पर कहा कि न्यू पैराडाइम का नवाचार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीकी पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रथम तकनीकी सत्र के चेयरपर्सन प्रौढ़ शिक्षा विभाग से सेवानिवृत प्रो. धर्मव्रत तिवारी ने विभिन्न महाविद्यालयों के करीब 30 शिक्षकों द्वारा समसामयिक विषयों पर प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों का सार प्रस्तुत किया। द्वितीय सत्र में चेयरपर्सन प्रो. सुनीता दूबे ने शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत सभी शोध पत्रों का सार संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा शास्त्र विभाग की अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. सरिता पांडेय ने की।
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- गोरखपुर विवि के शिक्षा शास्त्र विभाग में राष्ट्रीय संगोष्ठी का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. यूसी वशिष्ठ ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 पैराडाइस शिफ्ट का बेहतरीन उदाहरण है। शिक्षा नीति 2020 को पढ़ने की आवश्यकता है।
वे रविवार को गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षा शास्त्र विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन समापन कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। प्रो. वशिष्ठ ने ''''एक्सप्लोरिंग न्यू पैराडाइम ऑफ रिसर्च'''' विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति ने शोध के क्षेत्र में नए-नए अनुसंधान विधियां जोड़ी हैं। विशिष्ट वक्ता संभलपुर विश्वविद्यालय के प्रो. जुबराज खमारी ने ''''पैराडाइम ऑफ रिसर्च'''' पर कहा कि न्यू पैराडाइम का नवाचार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीकी पर विस्तार से प्रकाश डाला।
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प्रथम तकनीकी सत्र के चेयरपर्सन प्रौढ़ शिक्षा विभाग से सेवानिवृत प्रो. धर्मव्रत तिवारी ने विभिन्न महाविद्यालयों के करीब 30 शिक्षकों द्वारा समसामयिक विषयों पर प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों का सार प्रस्तुत किया। द्वितीय सत्र में चेयरपर्सन प्रो. सुनीता दूबे ने शोधार्थियों द्वारा प्रस्तुत सभी शोध पत्रों का सार संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा शास्त्र विभाग की अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता प्रो. सरिता पांडेय ने की।