गोरखपुर मंडल में 53 हजार कुशल कामगारों को घर के पास मिलेगी नौकरी, ऐसे की गई है मैंपिंग
- गोरखपुर मंडल में 12 जून तक बाहर से आए लोगों की स्किल मैंपिंग पूरी
- प्रथम चरण में इन्हें प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा
विस्तार
जल्द ही इन्हें कौशल विकास के रिकॉगनिशन प्रॉयर लर्निंग (आरपीएल) के माध्यम से हुनर के मुताबिक प्रशिक्षण देकर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इसकी कार्ययोजना कमिश्नर की नेतृत्व में बनाई जा रही है।
ये सभी कामगार अपने हुनर (तकनीकी दक्षता) के दम पर बरसों से दूसरे राज्यों में राज मिस्त्री, कपड़े की सिलाई, चमड़ा उद्योग, मशीन मरम्मत वर्कशॉप,प्लंबर, बढ़ई, रंगाई, इंटीरियर डेकोरेशन समेत अन्य काम कर अपना पेट पालने में जुटे हैं।
तकनीकी दक्षता का प्रमाणपत्र न होने की वजह से इनके काम को जो सम्मान और मजदूरी मिलना चाहिए वो नहीं मिल पाती है। प्रमाणपत्र मिलने से इन सभी कुशल प्रवासियों को जिले के अंदर संचालित होने वाली सरकारी योजनाओं में आसानी से नौकरी मिल सकेगी।
अकुशल कामगारों को बनाएंगे काबिल
इच्छुक अकुशल प्रवासी कामगारों को कौशल विकास से जुड़े 70 से अधिक विभिन्न कोर्स में 15 दिन से लेकर एक साल तक के कोर्स में प्रशिक्षण देकर रोजगार के काबिल बनाया जाएगा।
कमिश्नर ने जताई नाराजगी
स्किल मैंपिंग की धीमी रफ्तार पर कमिश्नर जयंत नार्लीकर ने नाराजगी जताई है। शनिवार को विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कुशीनगर जिले के स्किल मैपिंग की रफ्तार में तेजी लाने का निर्देश दिया है। वहीं गोरखपुर को भी और ध्यान देने की नसीहत दी है।
सभी कुशल कामगारों को मिलेगा प्रशिक्षण
कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा कि कुशल कामगारों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र जल्द से जल्द से जल्द दिया जाए, ताकि उन्हें प्राथमिकता के आधार पर काम दिलाया जा सके।
आंकड़ों में गोरखपुर मंडल की स्थिति
- जिला 12 जून तक आए कुशल कामगार अकुशल कामगार
- प्रवासी मजदूर (सत्यापित) (सत्यापित)
- गोरखपुर 130621 19354 8896
- देवरिया 77125 21300 55825
- महाराजगंज 105459 10776 70724
- कुशीनगर 55955 1593 216
- कुल 369160 53023 135661
आईटीआई जेडी राजेश राम ने कहा कि मंडल के सभी कुशल कामगारों को प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र प्रदान किए जाने का निर्देश मिला है। आदेश के मुताबिक तैयारी की जा रही है। वहीं इच्छुक अकुशल कामगारों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण देकर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा। ताकि उन्हें भी नौकरी के लिए दूसरे राज्यों की ओर मुंह न देखना पड़े।