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गोरखपुर: मंत्रालय बदला लेकिन नहीं मिला मानदेय, आर्थिक संकट से जूझ रहे जिले के 450 मदरसा आधुनिक शिक्षक
Thu, 10 Jun 2021 11:54 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 10 Jun 2021 11:54 AM IST
सार
भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1999 में मदरसों के आधुनिकीकरण की योजना लागू की गई थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
गोरखपुर में चार साल से मानदेय मिलने का इंतजार कर रहे आधुनिक मदरसा शिक्षकों की परेशानी जल्द खत्म होते नहीं दिख रही है। सरकार ने इन शिक्षकों को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय) से हटाकर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से संबद्ध कर दिया है। अप्रैल 2021 में हुए इस हस्तांतरण के बाद दोनो मंत्रालयों के बीच पिछली देनदारियों की जिम्मेदारी अभी तय नहीं हो सकी है।
भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1999 में मदरसों के आधुनिकीकरण की योजना लागू की गई थी। इसके तहत मदरसों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय पढ़ाने के लिए आधुनिक शिक्षक तैनात किए गए। इन शिक्षकों का मानदेय तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी किया जाता था। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ ऑफ इंडिया आईमास के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद बताते हैं कि मदरसा टीचरों का मानदेय केंद्र और राज्य सरकार दोनों से जारी किया जाता है।
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भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वर्ष 1999 में मदरसों के आधुनिकीकरण की योजना लागू की गई थी। इसके तहत मदरसों में गणित, विज्ञान और अंग्रेजी विषय पढ़ाने के लिए आधुनिक शिक्षक तैनात किए गए। इन शिक्षकों का मानदेय तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी किया जाता था। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ ऑफ इंडिया आईमास के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद बताते हैं कि मदरसा टीचरों का मानदेय केंद्र और राज्य सरकार दोनों से जारी किया जाता है।
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वर्तमान मानदेय के ढांचे में बीएड या परास्नाक शिक्षक को मानदेय में केंद्रांश के रूप में 12000 रुपये और राज्यांश के रूप में 3000 रुपये मिलता है। इसी तरह स्नातक शिक्षक को केंद्रांश के रूप में दस हजार रुपये और राज्यांश के रूप में दो हजार रुपये मिलते हैं। इन शिक्षकों को अप्रैल 2017 से केंद्रांश का मानदेय नहीं मिला है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार मदरसा शिक्षा का बजट कम कर रही है। 2020 में इस मद में 220 करोड़ आवंटित किए गए थे। वित्त वर्ष 2021-22 के लिए मात्र 180 करोड़ रुपया आवंटित किया गया है।
यह धनराशि सभी राज्यों के मदरसा शिक्षकों के लिए जारी की गई है, जबकि केवल उत्तर प्रदेश को प्रति वर्ष 266 करोड़ रुपये की दरकार है। सूत्र बताते हैं कि अब शिक्षकों की संबद्धता शिक्षा मंत्रालय से खत्म कर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से कर दी गई है। बीते चार वर्ष का बकाया मानदेय कौन सा मंत्रालय देगा यह नहीं तय हो पा रहा है। ऐसे में इन शिक्षकों को मानदेय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष कुमार पांडेय ने बताया कि हाल ही में मदरसा शिक्षकों को राज्यांश से जारी मानदेय का भुगतान किया गया है। केंद्रांश की धनराशि आने पर वह भी उनके खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी।
यह धनराशि सभी राज्यों के मदरसा शिक्षकों के लिए जारी की गई है, जबकि केवल उत्तर प्रदेश को प्रति वर्ष 266 करोड़ रुपये की दरकार है। सूत्र बताते हैं कि अब शिक्षकों की संबद्धता शिक्षा मंत्रालय से खत्म कर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से कर दी गई है। बीते चार वर्ष का बकाया मानदेय कौन सा मंत्रालय देगा यह नहीं तय हो पा रहा है। ऐसे में इन शिक्षकों को मानदेय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष कुमार पांडेय ने बताया कि हाल ही में मदरसा शिक्षकों को राज्यांश से जारी मानदेय का भुगतान किया गया है। केंद्रांश की धनराशि आने पर वह भी उनके खातों में हस्तांतरित कर दी जाएगी।