Gorakhpur News: 35 डॉक्टरों ने अस्पतालों के पंजीकरण से लिया नाम वापस, अस्पतालों को नोटिस
सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दुबे ने पंजीकरण के खेल को उजागर किया है। जिले के 153 डॉक्टरों की सूची जारी की। यह डॉक्टर एक अधिक अस्पतालों में पूर्ण कालिक सेवा करने का शपथपत्र दिए हैं। इसके आधार पर करीब सवा चार सौ अस्पतालों को रजिस्ट्रेशन का किया गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अस्पताल पंजीकरण के नाम पर चल रहे खेल के खुलासे के बाद बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने स्वास्थ्य विभाग का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। नामों की सूची जारी होने के बाद 35 डॉक्टर अस्पतालों के पंजीकरण से अपना नाम वापस ले चुके हैं। साथ ही शपथपत्र भी सौंपा है। इसके बाद विभाग ने इन अस्पताल संचालकों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अस्पताल संचालकों को 15 दिन के अंदर सीएमओ कार्यालय में डॉक्टरों के शपथ पत्र के साथ प्रस्तुत होने को कहा गया है। इस दौरान अब जिस डॉक्टर के नाम पर अस्पताल का पंजीकरण होगा, उनके शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए विभाग ने एक स्क्रीनिंग कमेटी भी तैयार कर दी है, जो इन अस्पतालों के दस्तावेजों की जांच करते हुए रिकॉर्ड रखेगी। इस कार्रवाई के बाद अस्पताला संचालकों में हड़कंप मच गया है।
सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दुबे ने पंजीकरण के खेल को उजागर किया है। जिले के 153 डॉक्टरों की सूची जारी की। यह डॉक्टर एक अधिक अस्पतालों में पूर्ण कालिक सेवा करने का शपथपत्र दिए हैं। इसके आधार पर करीब सवा चार सौ अस्पतालों को रजिस्ट्रेशन का किया गया। इनमें से कुछ डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने तीन से लेकर छह अस्पतालों तक में अपने नाम दे रखे हैं। अब नाम सामने आने के बाद ये डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की सूची पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि सूची में कई डॉक्टरों के नाम ऐसे हैं, जिनके नाम पर अस्पताल और क्लीनिक है। क्लीनिक में वह मरीज देखते हैं और अस्पताल में मरीजों को भर्ती करते हैं।
मैनुअल पंजीकरण से हुई गड़बड़ी
सीएमओ ने बताया कि विभाग में अब तक अस्पतालों का पंजीकरण मैनुअल तरीके से होता है। इसके लिए कोई अलग पोर्टल नहीं विकसित किया गया था। लेकिन, अब एमबीबीएस के पंजीकरण नंबर को अस्पतालों के पंजीकरण के एक्सल शीट में जोड़ा जाएगा। इससे एक क्लिक में डॉक्टरों की पूरी जानकारी हो सकेगी। इससे गड़बड़झाला रूकेगा और झोलाछाप अवैध रूप से अस्पताल नहीं चला सकेंगे।
निजी अस्पतालों को मिलेगा 15 दिन का मौका
सीएमओ ने बताया कि जिन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होंगे। उन्हें 15 दिन का मौका दिया जाएगा। इस दौरान उन्हें अपने सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। पंजीकरण के लिए एमबीबीएस डॉक्टर अनिवार्य है। इसके लिए डॉक्टरों का शैक्षणिक प्रमाणपत्र लाना होगा। साथ ही शपथपत्र के साथ डॉक्टर की भी उपस्थिति रहेगी। बिना उनकी उपस्थिति के पंजीकरण नहीं किया जाएगा।
दूसरे डॉक्टरों के यहां परिक्रमा शुरू
35 डॉक्टरों के नाम वापस लेने के बाद अस्पताल संचालक अब दूसरे डॉक्टरों के यहां परिक्रमा करना शुरू कर दिए हैं। इसके लिए वह डॉक्टरों को अच्छी खासी रकम देने के लिए भी तैयार है। हालांकि, डॉक्टर मामले को देखते हुए अभी हामी नहीं भर रहे हैं। इसकी वजह से इनके अस्पताल संचालन में मुश्किलें खड़ी होने वाली है।