हाल गोरखपुर तहसील का: जाति हो या आय-निवास, पैसे देंगे तो पूरी होगी आस
वर्तमान व्यवस्था में प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद राजस्वकर्मियों की रिपोर्ट लगती है, लेकिन यह रिपोर्ट लगवाने में लोगों को पसीने छूट जाते हैं। चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के भीतर बनने वाले कागज के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाते रहिए।
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विस्तार
जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र (अधिवास) की जरूरत हमसे से सभी को पड़ती है। वर्तमान व्यवस्था में प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन के बाद राजस्वकर्मियों की रिपोर्ट लगती है, लेकिन यह रिपोर्ट लगवाने में लोगों को पसीने छूट जाते हैं। चढ़ावा नहीं दिया तो सात दिन के भीतर बनने वाले कागज के लिए कई दिनों तक चक्कर लगाते रहिए। तहसील से जुड़े लोगों का कहना है कि लेखपालों की ढिलाई से प्रमाण पत्र बनने में विलंब होता है। कई बार कोई न कोई कमी दिखाकर आवेदन लौटा दिया जाता है। जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र के जिले में कुल 19 हजार से अधिक मामले लंबित हैं।
केस एक
एक महीने बाद मिला आय प्रमाण पत्र, फीस के अलावा पांच सौ खर्च हुए
सदर तहसील क्षेत्र के पथरा निवासी सुमन सिंह को आय प्रमाण पत्र हासिल करने में करीब एक माह का समय लग गया। ऐसा आवेदन के बाद लेखपाल के रिपोर्ट लगाने में विलंब के चलते हुआ। सुमन के मुताबिक, उन्होंने जब आवेदन किया तो उनके मोबाइल नंबर पर किसी का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंशी बताया। सुमन कहना है कि फीस के अतिरिक्त उनके पांच सौ रुपये खर्च हो गए।
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केस दो
निरस्त हो जा रहा आवेदन, परेशान हैं सीमा
जंगल कौड़िया क्षेत्र की रहने वाली सीमा ने आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। उनका आवेदन तीन बार दो बार निरस्त हो चुका है। सीमा का कहना है कि रिपोर्ट लगाने के बदले में वह किसी को पैसे नहीं दे रही हैं। इसलिए उनके साथ ऐसा हो रहा है। इस तरह की मनमानी पर अंकुश लगाने की जरूरत है। शासन की ओर से गलत काम करने वालों को चिह्नित करना चाहिए।
मांग पूरी नहीं होने पर रिपोर्ट लगाने में करते हैं हीलाहवाली
ऐसे तमाम लोग हैं, जिनको जाति, निवास और आय प्रमाण पत्र के लिए परेशान होना पड़ रहा है। कई लोगों का आवेदन बिना किसी सूचना या कारण बताए निरस्त कर दिया जाता है। वे समझ ही नहीं पाते हैं कि कौन सा प्रपत्र कम था जिसकी वजह से ऐसा हुआ। असल में यहां खेल दूसरा चलता है। मांग पूरी नहीं होने पर राजस्व कर्मी रिपोर्ट लगाने में हीलाहवाली करते हैं। प्रमाण पत्र जारी करने की समयसीमा खत्म होने वाली होती है तो आवेदन को निरस्त करके खुद का बचाव कर लेते हैं।
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प्रमाण पत्र न बनाने के हैं कई बहाने
जाति, आय और निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करने के बाद आवेदक के प्रमाण पत्रों की जांच की जाती है। राजस्वकर्मी संबंधित आवेदक के पास पहुंचकर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसमें राज्य, जिला, किराएदारी सहित अन्य कारणों का हवाला देकर लेखपाल की रिपोर्ट नहीं लगाई जाती। फिर वसूली के बाद ही काम किया जाता है।
आवेदक ने पैसे नहीं खर्च किए, तो उसे तहसील का चक्कर काटना पड़ेगा। किसी अधिकारी से शिकायत के बाद भी मामला जांच में अटका रह जाएगा। तहसील अधिवक्ताओं के मुताबिक जिनका जुगाड़ नहीं होता है, उनके आवेदन निरस्त हो जाते हैं। सदर तहसील में हर माह करीब 10 से 15 फीसदी जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र अस्वीकृत हो जाते हैं।
तय नहीं कोई कीमत, रकम आवेदक की जरूरत पर निर्भर
प्रमाणपत्र के लिए कितनी कीमत चुकानी होगी, यह आपकी जरूरत पर निर्भर है। आवेदन के समय एक प्रमाण पत्र के लिए 30 रुपये फीस ली जाती है। असली खेल आवेदन की प्रक्रिया के बाद शुरू होता है। पांच सौ रुपये से जांच की शुरुआत होती है। बाद में आवेदक की आवश्यकता और उसकी परिस्थिति के मुताबिक रकम ली जाती है।
| तहसील | आवेदन | लंबित मामले |
| सदर | 273574 | 5892 |
| खजनी | 110264 | 1835 |
| गोला | 105804 | 1593 |
| बांसगांव | 85747 | 712 |
| चौरीचौरा | 86231 | 1220 |
| सहजनवां | 76101 | 423 |
| कैंपियरगंज | 71287 | 1122 |
नोट: जाति और आय प्रमाणपत्र के कुल आवेदन और लंबित मामले हैं
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यह फंसाते हैं पेंच
- किराए के कमरे में रहने वाले लोगों के प्रमाण पत्र जैसे आधार इत्यादि को संशोधन के लिए कहते हैं।
- नाम और पते में आंशिक बदलाव या गड़बड़ी को आधार बनाकर आवेदन को निरस्त कर देते हैं ।
- आवेदन के लिए प्रधान और सभासद के प्रमाण पत्र में कोई न कोई कमी बताई जाती है।
- लेखपाल की जगह उनके मुंशी आवेदकों से बात करके मामला तय करते हैं। आसपास के लोगों से बात करके रिपोर्ट लगा देते हैं।
- प्रधान, सभासद और अन्य किसी से बात करके रिपोर्ट लगाने के दौरान गड़बड़ी आती है।
- अनुचित मांग न पूरी होने पर आवेदन को निरस्त कर दिया जाता है। इससे दिक्कत आती है। लोगों को दोबारा आवेदन करना पड़ता है।
- कई बार लेखपाल अपने आप के बाहर होने या अन्य किसी काम में व्यस्त होने हवाला देकर भी मामला टाल देते हैं।
एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता ने कहा कि प्रमाण पत्रों के लिए सभी आवेदनों की समीक्षा की जाती है। लंबित आवेदनों पर संबंधित लेखपालों पर सख्ती भी होती है। कभी-कभी सर्वर की खराबी से आवेदन लंबित हो जाते हैं। प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर यदि कोई सुविधा शुल्क की मांग करे, तो इसकी शिकायत संबंधित एसडीएम, तहसीलदार, मेरे या डीएम कार्यालय में की जा सकती है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी।