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गोरखपुर: फोरलेन के निर्माण में 121 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण, शुरू हुई तैयारी

Thu, 16 Dec 2021 05:52 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 16 Dec 2021 05:52 PM IST
सार

जंगल कौड़िया से सोनौली तक फोरलेन का निर्माण होना है। इसकी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। कार्यदायी संस्था एनएचएआई की तरफ से इसका सर्वे किया गया।

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121 hectares of land will be acquired in construction of four lane
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर में जंगल कौड़िया-सोनौली फोरलेन के निर्माण के लिए अभी एक इंच भी जमीन मिली नहीं पर एनएचएआई की तरफ से टेंडर कर दिया गया है। इस फोरलेन के निर्माण में कास्तकारों की 121 हेक्टेयर जमीन को ली जानी है। किसकी कितनी जमीन इस मार्ग में ली जाएगी वाकायदा उसे अखबारों में प्रकाशित किया जाएगा।

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इसकी कोई प्रक्रिया अभी  शुरू नहीं हो पाई है। विभाग के जिम्मेदारों का मानना है कि अधिसूचना लागू होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। इस लिए टेंडर की औपचारिकता पूरी की गई।
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जंगल कौड़िया से सोनौली तक फोरलेन का निर्माण होना है। इसकी प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है। कार्यदायी संस्था एनएचएआई की तरफ से इसका सर्वे किया गया। सर्वे से यह पता चला कि फोरलेन के लिए कुल 121 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। फोरलेन का डीपीआर तैयार किया गया।
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उसमें दो स्थाजनों पीपीगंज और कोल्हुई में बाईपास का निर्माण कराया जाएगा। इस फोरलेन के निर्माण में 2200 करोड़ की लागत आएगी। यह सड़क पहले से 10 मीटर चौड़ी है। फोरलेन बनाने के लिए जमीन के साथ ही सड़क के किनारे लगे पेड़ों को भी काटना होगा। निर्माण कार्य शुरू करने के लिए 80 प्रतिशत जमीन को कार्यदायी संस्था को देना पड़ेगा। उसके बाद ही निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी।

 

100 एकड़ जमीन का देना होगा कब्जा

फोरलेन निर्माण के लिए 121 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होगा। उसमें से 100 हेक्टेयर जमीन पर विभाग को कब्जा मिलने के बाद ठेकेदार निर्माण कार्य शुरू कराएगा। इस जमीन पर गाड़े गए बिजली के पोलो को भी हटाना होगा। इसके अलावा इस जमीन पर लगे पेड़ों को भी काटना होगा।

वन विभाग से एनओसी लेनी होगी। सभी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जब सड़क निर्माणा कराने वाली फर्म को पूरी जमीन का 80 प्रतिशत कब्जा मिलने के बाद कार्य शुरू किया जाएगा।

एनएचएआई कराता है थ्रीडी

एनएचएआई जमीन का अधिग्रहण नहीं थ्रीडी कराता है। इसमें यह देखा जाता है कि किस कास्तकार की कितनी जमीन जा रही है। उसका सत्यापन किया जाता है। उसके बाद समाचार पत्रों में उसे प्रकाशित किया जाएगा। किस जमीन का कितना रेट है उसका जिक्र किया जाएगा। जमीन मालिक का नाम और उसका गाटा संख्या लिखा होगा। पूरी तरह से मिलान करने के बाद जमीन मालिक को मुआवजा दिया जाएगा। यह सब शुरू होने में अभी समय लगेगा।

एनएचएआई परियोजना प्रबंधक सीएम द्विवेदी ने कहा कि जंगल कौड़िकया- सोनौली फोरलेन के लिए अभी जमीन मिली नही है। टेंडर बगैर जमीन के भी किया जा सकता है। इसलिए किया गया है। चुनाव होने वाला है। आचार संहिता लगने वाली है। आचार संहिता लगने के बाद टेंडर नहीं हो पाता। टेंडर के बाद सड़क निर्माण की प्रक्रिया छह महीने बाद ही शुरू हो पाएगी। इस बीच अन्य औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी।

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