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Gorakhpur News: दोहरे हत्याकांड में 12 दोषियों को उम्रकैद
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गोरखपुर। पीपीगंज के फुलवरिया गांव में 20 साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड और आगजनी के मामले में अदालत ने 12 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जनपद न्यायाधीश राजकुमार सिंह की अदालत ने मुख्य मुकदमे में सात दोषियों पर 59-59 हजार रुपये और क्रॉस केस में पांच दोषियों पर 65-65 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 दिसंबर 2005 की सुबह करीब आठ बजे फुलवरिया निवासी राजेश्वर सिंह अपने भाई उमेश सिंह और अन्य लोगों के साथ पीसीओ से फोन कर लौट रहे थे। इसी दौरान राम प्रताप पांडेय के घर के पश्चिम सड़क पर पहुंचते ही पुरानी रंजिश को लेकर आरोपियों ने छत से फायरिंग और बमबाजी शुरू कर दी। हमले में उमेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
जान बचाने के लिए राजेश्वर सिंह और अन्य लोग लक्ष्मण सिंह के घर की ओर भागे। सोनू घर में घुस गया। आरोपियों ने लक्ष्मण सिंह से सोनू को बाहर निकालने को कहा। इसी बात पर विवाद बढ़ा और हमलावरों ने बम, कट्टे और बंदूक से हमला कर लक्ष्मण सिंह की भी हत्या कर दी। इस मामले में अदालत ने राजेश यादव, रामलौट, सिंटू, रामजी उर्फ रामजीत, शेषनाथ, मुक्तेश्वर और बृजेश तिवारी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 59 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषियों को एक साल नौ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने पैरवी की।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार, 19 दिसंबर 2005 की सुबह करीब आठ बजे फुलवरिया निवासी राजेश्वर सिंह अपने भाई उमेश सिंह और अन्य लोगों के साथ पीसीओ से फोन कर लौट रहे थे। इसी दौरान राम प्रताप पांडेय के घर के पश्चिम सड़क पर पहुंचते ही पुरानी रंजिश को लेकर आरोपियों ने छत से फायरिंग और बमबाजी शुरू कर दी। हमले में उमेश सिंह की मौके पर ही मौत हो गई।
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जान बचाने के लिए राजेश्वर सिंह और अन्य लोग लक्ष्मण सिंह के घर की ओर भागे। सोनू घर में घुस गया। आरोपियों ने लक्ष्मण सिंह से सोनू को बाहर निकालने को कहा। इसी बात पर विवाद बढ़ा और हमलावरों ने बम, कट्टे और बंदूक से हमला कर लक्ष्मण सिंह की भी हत्या कर दी। इस मामले में अदालत ने राजेश यादव, रामलौट, सिंटू, रामजी उर्फ रामजीत, शेषनाथ, मुक्तेश्वर और बृजेश तिवारी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। प्रत्येक पर 59 हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोषियों को एक साल नौ माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने पैरवी की।
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