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जब घर वालों को पता चला कि रंजीत एक्टर हैं, तो कैसा था उनका रिएक्शन? फिल्मों में आने का दिलचस्प है किस्सा
Wed, 14 Jan 2026 12:59 AM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Wed, 14 Jan 2026 12:59 AM IST
सार
Ranjeet Interview: बॉलीवुड में रंजीत एक विलेन के तौर पर मशहूर हुए हैं। हाल ही में उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत में अपने करियर और फिल्मों में आने को लेकर बात की है।
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रंजीत
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक्टर रंजीत हिंदी फिल्म का एक जाना माना नाम हैं। उन्होंने बॉलीवुड की लगभग 200 फिल्मों में काम किया है। दुलारा, करण अर्जुन, बॉर्डर, बुलन्दी और वेलकम उनकी कुछ खास फिल्में हैं। हाल ही में उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की है। उन्होंने फिल्मों में आने और अपने करियर के बारे में कुछ खास बातें की हैं। उन्होंने बताया है कि जब उनके परिवार को पता चला कि वह फिल्मों में काम करते हैं तो उनका रिएक्शन कैसा था।
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घर में फिल्म देखने का रिवाज नहीं था
रंजीत ने बातचीत में बताया 'मैं आपको सच बताता हूं। हमारे खानदान में फिल्म देखना तो दूर एक मैगजीन भी नहीं पकड़ सकते थे। मेरी फैमिली बहुत ऑर्थोडॉक्स थी। पहले मैंने एयरफोर्स ज्वाइन किया था। उसके बाद वहां से निकाल दिया गया। जब मैं हिंदू कॉलेज में था तो मैंने फिल्म इंडस्ट्री के बारे में सुना था। फिल्म कभी नहीं देखी थी। धर्मेंद्र और दिलीप कुमार जैसे कलाकारों के पोस्टर देखे थे। मैंने कभी फिल्मों में जाने का नहीं सोचा था। एक बार मैं अपने दोस्त के घर गया था। वहां पर मुझे एक आदमी मिला था। उनका नाम रणवीर सिंह था। वह हॉलीवुड से जुड़े थे। उन्होंने मुझे सीधे ऑफर किया कि क्या आप फिल्मों में काम करेंगे?
रंजीत ने बातचीत में बताया 'मैं आपको सच बताता हूं। हमारे खानदान में फिल्म देखना तो दूर एक मैगजीन भी नहीं पकड़ सकते थे। मेरी फैमिली बहुत ऑर्थोडॉक्स थी। पहले मैंने एयरफोर्स ज्वाइन किया था। उसके बाद वहां से निकाल दिया गया। जब मैं हिंदू कॉलेज में था तो मैंने फिल्म इंडस्ट्री के बारे में सुना था। फिल्म कभी नहीं देखी थी। धर्मेंद्र और दिलीप कुमार जैसे कलाकारों के पोस्टर देखे थे। मैंने कभी फिल्मों में जाने का नहीं सोचा था। एक बार मैं अपने दोस्त के घर गया था। वहां पर मुझे एक आदमी मिला था। उनका नाम रणवीर सिंह था। वह हॉलीवुड से जुड़े थे। उन्होंने मुझे सीधे ऑफर किया कि क्या आप फिल्मों में काम करेंगे?
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जो आदमी फ्रॉड लग रहा था उसी ने काम दिया
रंजीत ने आगे कहा 'मैंने सुना था कि कुछ लोग मुंबई से आते हैं और एक छोटे एड में काम देते हैं। इसके बाद निकाल देते हैं। इसके अलावा लड़कियों की फोटो ले लेते हैं और उनको परेशान करते हैं। लड़कों से वह बोलते हैं कि पैसा जमा करो वरना नुकसान हो जाएगा। पहले मुझे वह आदमी फ्रॉड लगा। हालांकि वह मेरे दोस्त के यहां था, तो लगा कि ठीक होगा। उसने मुझसे कहा कि लंच पर मिलते हैं फिर बात करेंगे। फिर उन्होंने मुझे बुलाया। उन्होंने मुझसे कहा कि ड्राइवर के साथ हेल्पर का रोल करने वाला एक लड़का चाहिए। फिर मुझे लगा कि अगर इसने मुझसे पैसे मांगे तो मैं इसके ऊपर हाथ उठा दूंगा। उसने पहली बार मुझसे बोला कि पिक्चर देखा करो। तो मैंने छिपकर पहली पिक्चर गाइड देखी। इसके बाद कनॉट प्लेस में मैंने कई फिल्में देखीं। इसके बाद मैं मुंबई गया। इस तरह मैं फिल्मों में आया।
रंजीत ने आगे कहा 'मैंने सुना था कि कुछ लोग मुंबई से आते हैं और एक छोटे एड में काम देते हैं। इसके बाद निकाल देते हैं। इसके अलावा लड़कियों की फोटो ले लेते हैं और उनको परेशान करते हैं। लड़कों से वह बोलते हैं कि पैसा जमा करो वरना नुकसान हो जाएगा। पहले मुझे वह आदमी फ्रॉड लगा। हालांकि वह मेरे दोस्त के यहां था, तो लगा कि ठीक होगा। उसने मुझसे कहा कि लंच पर मिलते हैं फिर बात करेंगे। फिर उन्होंने मुझे बुलाया। उन्होंने मुझसे कहा कि ड्राइवर के साथ हेल्पर का रोल करने वाला एक लड़का चाहिए। फिर मुझे लगा कि अगर इसने मुझसे पैसे मांगे तो मैं इसके ऊपर हाथ उठा दूंगा। उसने पहली बार मुझसे बोला कि पिक्चर देखा करो। तो मैंने छिपकर पहली पिक्चर गाइड देखी। इसके बाद कनॉट प्लेस में मैंने कई फिल्में देखीं। इसके बाद मैं मुंबई गया। इस तरह मैं फिल्मों में आया।
घर वालों को पता चला कि बेटा एक्टर है
मैं दरअसल उस परिवार से आता हूं जहां पर फिल्म लाइन को अच्छा नहीं माना जाता है। मैंने 'शर्मीली' फिल्म में काम किया। दिल्ली में फिल्म का प्रीमियर था। तो मैं घर गया और लोगों से फिल्म देखने की गुजारिश की, कि एक बार मेरी फिल्म देखने आइए। मैंने 'शर्मीली' के 6-7 पास ले लिए। अपने घर वालों को मैंने वहां बैठा दिया। इसके बाद जब इंटरवल हुआ, तो वह लोग कास्ट से मिलाना चाहते थे। जब मैं वहां पहुंचा तो सीटें खाली थीं। मैंने लोगों से पूछा कि ये लोग कहां गए। तो पता चला कि वह लोग इंटरवल में ही चले गए थे। मैंने फिल्म में एक्ट्रेस का ब्लाउज वगैरह फाड़ा था। तो उन लोगों को अच्छा नहीं लगा। तो वह लोग चले गए। मैं पार्टी करने के बाद जब घर पहुंचा, तो उन लोगों ने कहा कि तुम घर में आए कैसे? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? तुमको शर्म नहीं आती है लड़कियों के कपड़े फाड़ते हो? बाद में सब ठीक हो गया।
मैं दरअसल उस परिवार से आता हूं जहां पर फिल्म लाइन को अच्छा नहीं माना जाता है। मैंने 'शर्मीली' फिल्म में काम किया। दिल्ली में फिल्म का प्रीमियर था। तो मैं घर गया और लोगों से फिल्म देखने की गुजारिश की, कि एक बार मेरी फिल्म देखने आइए। मैंने 'शर्मीली' के 6-7 पास ले लिए। अपने घर वालों को मैंने वहां बैठा दिया। इसके बाद जब इंटरवल हुआ, तो वह लोग कास्ट से मिलाना चाहते थे। जब मैं वहां पहुंचा तो सीटें खाली थीं। मैंने लोगों से पूछा कि ये लोग कहां गए। तो पता चला कि वह लोग इंटरवल में ही चले गए थे। मैंने फिल्म में एक्ट्रेस का ब्लाउज वगैरह फाड़ा था। तो उन लोगों को अच्छा नहीं लगा। तो वह लोग चले गए। मैं पार्टी करने के बाद जब घर पहुंचा, तो उन लोगों ने कहा कि तुम घर में आए कैसे? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? तुमको शर्म नहीं आती है लड़कियों के कपड़े फाड़ते हो? बाद में सब ठीक हो गया।