Nargis Dutt Death Anniversary: आरके फिल्म्स की जान थीं नरगिस, दिलचस्प है राज कपूर से पहली मुलाकात का किस्सा
Nargis Dutt Death Anniversary: अपने दौर की दिग्गज अदाकारा नरगिस अब इस दुनिया में नहीं रहीं। साल 1981 में आज के ही दिन उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा। जानते हैं उनके करियर और जीवन के किस्से....
विस्तार
अभिनेत्री नरगिस अब इस दुनिया में नहीं हैं। मगर, उनकी फिल्में और उनसे जुड़े किस्से आज भी खूब दिलचस्पी से देखे-सुने जाते हैं। नरगिस ने बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की। सिनेमा के शोमैन राज कपूर की प्रोडक्शन कंपनी आरके फिल्म्स की जान थीं नरगिस। इस बैनर की पहली फिल्म 'आग' में उन्होंने काम किया। इसके बाद कई और फिल्मों में वे हीरोइन बनकर दमकीं। आज नरगिस की पुण्यतिथि है। जानते हैं उनके बारे में....
बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट किया डेब्यू
01 जून 1929 को जन्मीं नरगिस दत्त ने अपने फिल्मी सफर में कई शानदार फिल्में दीं। नरगिस ने साल 1935 फिल्म 'तलाश-ए-हक' से बतौर बाल कलाकार डेब्यू किया। फिर 1949 में उन्होंने महबूब खान की फिल्म 'अंदाज' से बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू किया था। राज कपूर के साथ उनकी पहली फिल्म 'आग' थी, जो शोमैन के आरके फिल्म्स की भी पहली फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने राज कपूर के साथ 'बरसात', 'आवारा' और 'श्री 420' जैसी फिल्मों में भी काम किया। इस दौरान दोनों के बीच करीबियां भी बढ़ीं। एक वक्त ऐसा रहा कि नरगिस सिर्फ आरके फिल्म्स की हीरोइन ही बनकर रहीं।
ऐसे हुई राज कपूर और नरगिस की पहली मुलाकात
राज कपूर और नरगिस की पहली मुलाकात का किस्सा काफी दिलचस्प है। राज कपूर की नरगिस से पहली मुलाकात हुई तब वे बीस साल की थीं और तब तक वो आठ फिल्मों में काम कर चुकी थीं। राज कपूर की उम्र उस समय बाइस साल थी। कहा जाता है कि राज कपूर को अपनी पहली फिल्म के लिए एक स्टूडियो की तलाश थी। उन्हें पता लगा कि नरगिस की मां जद्दन बाई फेमस स्टूडियो में रोमियो एंड जूलिएट की शूटिंग कर रही हैं। वे जानना चाहते थे कि वहां किस तरह की सुविधाएं हैं? जब राज कपूर उनके घर पहुंचे तो नरगिस ने खुद दरवाजा खोला। वो रसोई से दौड़ती हुई आईं थीं, जहां वो पकौड़े तल रही थीं, बेख्याली में उनका हाथ उनके बालों से छुल गया और उसमें लगा बेसन उनके बालों में लग गया। नरगिस की इस अदा पर राज कपूर उन पर मर मिटे। बाद में उन्होंने इस सीन को फिल्म 'बॉबी' में श्रषि कपूर और डिंपल कपाड़िया पर फिल्माया।
नरगिस ने राज कपूर के लिए कहा- 'नीली आखों वाला लड़का'
टीजेएस जॉर्ज ने अपनी किताब 'द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ नरगिस' में लिखा है, 'अपनी सबसे करीबी दोस्त नीलम को वो घटना बताते हुए नरगिस ने कहा कि एक मोटा, नीली आंखों वाला लड़का हमारे घर आया था। उन्होंने नीलम को ये भी बताया कि 'आग' की शूटिंग के दौरान उस लड़के ने मुझ पर लाइन मारनी शुरू कर दी'। जब नरगिस राज कपूर की पहली फिल्म 'आग' में काम करने के लिए राजी हुई तो उनकी मां ने जोर दिया कि पोस्टर में उनका नाम कामिनी कौशल और निगार सुल्ताना से ऊपर रखा जाए।
आरके स्टूडियो के लिए बेच दिए सोने के कड़े
नरगिस ने आरके स्टूडियो के लिए दिल लगाकर काम किया। कहा जाता है कि जब आर के स्टूडियो के पास पैसों की कमी हुई तो नरगिस ने अपने सोने के कड़े तक बेच डाले। राज कपूर के छोटे भाई शशि कपूर के मुताबिक, 'नरगिस आरके फिल्म्स की जान थीं। उनका कोई सीन न होने पर भी वो सेट्स पर मौजूद रहती थीं'। राज कपूर ने भी नरगिस का सम्मान रखा। कम लोगों को ही पता होगा कि आरके फिल्म्स का लोगो राज कपूर और नरगिस के एक बेहद रोमांटिक सीन से बाद में फिल्म 'बरसात' से लिया गया।
मोहब्बत नहीं हुई मुकम्मल, जुदा हुईं राहें
राज कपूर और नरगिस ने करीब नौ साल साथ किया। इन नौ वर्षों में राज कपूर और नरगिस का प्यार इतना बढ़ गया था कि दोनों शादी करना चाहते थे। लेकिन दोनों के रिश्ते की एक कड़वी सच्चाई ये थी कि राज कपूर पहले से शादीशुदा थे एक वक्त बात जब नरगिस को एहसास हुआ कि उनका और राज कपूर का कोई भविष्य नहीं है तो उन्होंने दूरियां बनानी शुरू कीं। राज कपूर से रिश्ता तोड़ने के बाद नरगिस की जिंदगी में सुनील दत्त की एंट्री हुई।
सुनील दत्त से रचाई शादी
नरगिस ने राज कपूर से अलग होने के बाद फिल्म 'मदर इंडिया' साइन की थी। इस फिल्म के सेट पर ही नरगिस और सुनील दत्त के बीच अच्छी दोस्ती हुई थी और वह प्यार में बदल गई। फिल्म 'मदर इंडिया' के सेट पर आग लग गई थी। तब सुनील दत्त ने नरगिस को बचाया। इसके बाद दोनों के बीच और करीबी बढ़ीं। साल 1958 में नरगिस ने सुनील दत्त से शादी कर ली। नरगिस और सुनील दत्त के तीन बच्चे- संजय दत्त, प्रिया दत्त और नम्रता दत्त हैं। संजय दत्त फिल्मी दुनिया में सक्रिय हैं। इन दिनों वे फिल्म 'द भूतनी' में नजर आ रहे हैं।
राज्यसभा जाने वाली पहली अभिनेत्री बनीं
नरगिस को बॉलीवुड करियर में बहुत मान-सम्मान मिला। उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। 1980 में इंदिरा गांधी की सरकार ने उन्हें राज्यसभा सदस्य भी बनाया। नरगिस राज्यसभा के लिए निर्वाचित पहली महिला फिल्म स्टार थीं। मुंबई के बांद्रा में उनके नाम पर सड़क है। हर साल हो रहे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म को नरगिस दत्त पुरस्कार दिया जाता है। 3 मई 1981 को कैंसर के चलते नरगिस दुनिया को अलविदा कह गईं।
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