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'आशिकी 2' में गानों के अलावा कुछ नहीं
अनुराधा गोयल
Updated Fri, 26 Apr 2013 11:47 PM IST
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हैलो फ्रेंड्स! मोहित सुरी की फिल्म 'आशिकी 2' आज रिलीज हुई। फिल्म के रिलीज होने से पहले ही इसके गाने हिट हो चुके हैं। इससे पहले भी यह फिल्म 'आशिकी' का सीक्वल होने के कारण खूब चर्चा में रही।
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फिल्म को देखने का क्रेज मुझे भी था। खास तौर पर यह समझना चाहती थी कि यह फिल्म 21वीं सदी के प्यार पर सटीक बैठती है या नहीं।
तो आइए जानें 'आशिकी 2' के प्रेम और त्याग की कहानी आपको पसंद आएगी ना नहीं।
वही पुरानी कहानी, प्रेम और कुर्बानी
फिल्म का हीरो राहुल जैकर यानी आर जे (आदित्य रॉय कपूर) एक मशहूर सिंगर है लेकिन धीरे-धीरे उसकी कामयाबी उससे छिनती जा रही है।
नतीजन वो हताश और निराशा में पूरी तरह से डूब चुका है। इसी दौरान आरजे की जिंदगी में बार में गाना गाने वाली आरोही केशव शिंदे (श्रद्धा कपूर) आती है।
इससे आरजे की लाइफ बदल जाती है और आरजे आरोही को अपने अथक प्रयासों से सुपरस्टार बना देता है।
इन्हीं सब के बीच शुरू होता है आरजे की असफलता और प्यार का संघर्ष।
क्या आरजे दोबारा सफल हो पाया? क्या आरोही और आरजे एक हो पाए? फिल्म के अंत में क्या हुआ, इन सबके लिए आप फिल्म देखेंगे तो बेहतर होगा।
सबका अभिनय निराशाजनक
श्रद्धा कपूर की ये दूसरी फिल्म है। इससे पहले 'तीन पत्ती' में भी श्रद्धा दिखाई दी थी।
श्रद्धा के अभिनय की बात करें तो उनके चेहरे की मासूमियत, उनकी आंखे उनके अभिनय से ज्यादा बोल रही थी लेकिन श्रद्धा इमोशनल सीन्स को छोड़ दिया जाए तो अभिनय के मामले में खरी नहीं उतरी।
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वहीं आदित्य रॉय कपूर अपने रोल में जमे नहीं। ना तो वो ठीक से गुस्सा कर पाएं ना ही बहुत अच्छा अभिनय। आदित्य कहीं से भी निराश सुपरस्टार या सेलिब्रिटी नहीं लगे।
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बेहतर संगीत
फिल्म में सबसे बड़ी खासियत इसका संगीत ही है। फिल्म के कुछ गाने जैसे 'तुम ही हो', 'चाहूं मैं या ना' और 'सुन रहा है' युवाओं की जुबान पर चढ़े हुए हैं।
गौरतलब है कि 'आशिकी' के आने से पहले ही उसके गानों ने भी फिल्म को हिट बना दिया था। ऐसा लगता है कि 'आशिकी 2' के साथ भी कुछ ऐसा ही होगा।
फिल्म के गाने ही ऐसे हैं जो दर्शकों को फिल्म की ओर आकर्षित करेंगे।
औसत रहा निर्देशन
मोहित सुरी आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर से अभिनय नहीं करवा पाएं। वे चाहते तो फिल्म के इमोशनल सीन्स को थोड़ा और इमोशनल बना सकते थे।
कई जगहों पर दर्शक पहले ही समझ जाता है कि अब आगे क्या होने वाला है। जो कि किसी भी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है।
फिल्म में ज्यादातर रोना-धोना और प्रेम में उदासी है जिसे दर्शकों को हजम करने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है।
यूं तो फिल्म के कई डायलॉग ऐसे हैं जो फिल्म को धीमा करते हैं लेकिन फिल्म के कुछ डायलॉग वाकई दमदार हैं। जिन पर दर्शक भी सीटी बजाने से अपने आपको नहीं रोक पाएगा।
क्यों देखें
अगर आपको बेसिर पैर की प्रेम कहानियों में विश्वास है और आप रोमांटिक कहानियां देखकर अपना टाइम पास करना चाहते हैं तो फिल्म आपके लिए है।
क्यों ना देखें
फिल्म के गानों के अलावा फिल्म में और कुछ भी बहुत खास नहीं है।