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Girish Karnad: गिरीश कर्नाड का नाटककार बनने का नहीं था कोई इरादा, 'ययाति' लिखने के विचार ने बदल दी जिंदगी

Sun, 19 May 2024 09:01 AM IST
ज्योति राघव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: ज्योति राघव Updated Sun, 19 May 2024 09:01 AM IST
सार

गिरीश कर्नाड का जन्म 19 मई 1938 को महाराष्ट्र के माथेरान में हुआ। कर्नाड ने करीब चार दशकों तक प्ले लिखे। उन्होंने इतिहास औ पौराणिक कथाओं का इस्तेमाल करते हुए समकालीन मुद्दों पर नाटकों की रचना की। 

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Girish Karnad Birth Anniversary: Know About Famous Actor Film Director Kannada Writer And Play Writer story
गिरीश कर्नाड - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गिरीश कर्नाड की आज बर्थ एनिवर्सरी है। वे साहित्यकार, नाटककार, अभिनेता, फिल्म निर्देशक और प्ले राइटर थे। वह उन कुछ चुनिंदा लोगों में से थे, जिन्होंने साहित्य के साथ अभिनय और निर्देशन की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। उनके नाटकों को खूब वाहवाही मिली। उनके नाटकों की लोकप्रियता इतनी रही कि उनका अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में किया गया। पर्दे पर जब वे बतौर अभिनेता आए तो दर्शक उनकी अभिनय प्रतिभा के कायल हो गए। आइए जानते हैं उनके बारे में..

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कई भाषाओं में हुआ नाटकों का अनुवाद
गिरीश कर्नाड का जन्म 19 मई 1938 को महाराष्ट्र के माथेरान में हुआ। कर्नाड ने करीब चार दशकों तक प्ले लिखे। उन्होंने इतिहास औ पौराणिक कथाओं का इस्तेमाल करते हुए समकालीन मुद्दों पर नाटकों की रचना की। उन्होंने अपने प्ले का अंग्रेजी अनुवाद किया। उनके नाटकों का अनुवाद कई भारतीय भाषाओं में भी हुआ। उनके नाटक इब्राहिम अलकाजी, बी वी कारंत, एलिक पदमसी, अरविंद गौर, सत्यदेव दुबे, विजया मेहता, श्यामानंद जालान और अमल अल्लाना जैसे निर्देशकों द्वारा निर्देशित किए गए। दिलचस्प बात यह है कि उनका नाटक लिखने का इरादा ही नहीं था।
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कवि बनने का देखा था सपना
गिरीश कर्नाड की शुरुआती पढ़ाई मराठी में हुई। उन्होंने कर्नाटक आर्ट्स कॉलेज से स्नातक किया। वे कहते थे, 'मैं कवि बनना चाहता था, लेकिन मेरी थिएटर में भी रुचि थी, मेरा नाटक लेखक बनने का कोई इरादा नहीं था। स्कॉलरशिप मिलने के बाद मैं लंदन पहुंचा। उस समय एक धारणा थी कि यदि मैं विदेश जाऊंगा, तो मैं विदेश की किसी गोरी मेम से शादी कर लूंगा। तभी एक दिन मेरे मन में 'ययाति' लिखने का विचार आया। इसके बाद जिंदगी में कई मोड़ आए'। उनके लिखे नाटकों में 'ययाति', 'तुगलक', 'हयवदन', 'अंजु मल्लिगे', 'अग्निमतु माले', 'नागमंडल' और 'अग्नि और बरखा' काफी प्रसिद्ध रहे हैं।
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सलमान खान के साथ कीं ये फिल्में
गिरीश कर्नाड ने कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम के अलावा हिंदी और मराठी सिनेमा में भी अभिनय किया। गिरीश कर्नाड ने हिंदी फिल्मों में भी अपना हाथ अजमाया और इसमें भी सफलता पाई। 48 साल के अपने फिल्मी करियर में गिरीश कर्नाड ने 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। हिंदी में उन्होंने 'निशांत', 'मंथन' और 'पुकार' जैसी फिल्में कीं। इसके अलावा सलमान खान के साथ वे 'एक था टाइगर' और 'टाइगर जिंदा है' में भी दिखाई दिए थे, यही उनकी आखिरी हिंदी फिल्म भी थी। उनकी आखिरी फिल्म कन्नड़ भाषा में बनी 'अपना देश' थी।
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सामाजिक आंदोलनों में रही सक्रिय भूमिका
गिरीश कर्नाड की लेखनी में जितना दम था, उन्होंने उतने ही बेबाक अंदाज में अपनी आवाज को बुलंदी दी। उनकी तमाम राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका रही। गिरीश कर्नाड को अपनी प्रतिभा के लिए कई बड़े सम्मान मिले। 1970 में उन्हें राज्योत्सव अवॉर्ड से नवाजा गया। 1972 में संगीत नाटक अकादमी दिया गया। 1974 में पद्मश्री मिला। 1992 में पद्मभूषण दिया गया। 1992 में उन्हें साहित्य परिषद अवॉर्ड से नवाजा गया था। वहीं 1994 में साहित्य अकादमी अवॉर्ड दिया गया। 1998 में उन्हें ज्ञानपीठ अवॉर्ड मिला और इसी साल उन्हें कालीदास सम्मान भी दिया गया। इसके अलावा 2011 में उन्हें दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स द्वारा मानद उपाधि दी गई।
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अमर उजाला के शब्द सम्मान से नवाजा गया
गिरीश कर्नाड को अमर उजाला की ओर से आकाशदीप सम्मान दिया जा चुका है। भारतीय भाषाओं के सामूहिक स्वप्न के सम्मान में अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा लेखन-जीवन के समग्र अवदान के लिए सर्वोच्च शब्द सम्मान 'आकाशदीप' दिया जाता है। यह सम्मान उन्हें साल 2018 में दिया गया था। साल 2019 में 10 जून को प्रतिभावान गिरीश कर्नाड ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।
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