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सनी लियोनी ने बताया, उनके माता-पिता ने उन्हें कैसे संस्कार दिए हैं
Updated Wed, 13 Jan 2016 01:28 PM IST
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सनी लियोनी को बॉलीवुड में चार साल हो रहे हैं। अपने मादक अंदाज के दम पर वह सबसे चर्चित नायिका हैं। इस साल वह तीन फिल्मों के लीड रोल में दिखेंगी। जिसमें से पहली जनवरी के अंत में रिलीज को तैयार हैं। वह धीरे-धीरे यहां दोस्त भी बना रही हैं और मुंबई उन्हें घर की तरह लगने लगा है।
-इरॉटिक, हॉरर और पुनर्जन्म जन्म वाली लव स्टोरी के बाद कॉमेडी। कैसा अनुभव था यह?
- यह सिर्फ फन था। न मैं डरी और न कोई पूर्वाग्रह मन में था। जब हमने वर्कशॉप किया तो शुरू में थोड़ी झिझक थी लेकिन जब मैंने टीम के साथ मिल कर जोर-जोर से डायलॉग पढ़े तो एक-दो दिन सब सामान्य हो गया। ऐक्टरों, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर ने मुझे सहज बनाया।
-परंतु यह डबल मीनिंग डायलॉग वाली एडल्ट कॉमेडी है। क्या आप अपने डायलॉग के मायने जानती थीं?
- बिल्कुल। मैंने जो भी डायलॉग बोले, उन्हें मतलब जानने के बाद ही बोला। ज्यादातर के मतलब मुझे पहले से पता होते थे। अगर कभी कुछ समझ नहीं आता तो अक्सर उसका अनुवाद सही नहीं होता था, जो बाद में मैं समझ लेती थी।
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-कॉमिक रोल के लिए कैसे तैयारी की?
- मैं पहली बार कॉमेडी नहीं कर रही हूं। इससे पहले अमेरिका में कुछ कॉमेडी शो किए थे और मुझे यह पसंद है।
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-इरॉटिक, हॉरर और पुनर्जन्म जन्म वाली लव स्टोरी के बाद कॉमेडी। कैसा अनुभव था यह?
- यह सिर्फ फन था। न मैं डरी और न कोई पूर्वाग्रह मन में था। जब हमने वर्कशॉप किया तो शुरू में थोड़ी झिझक थी लेकिन जब मैंने टीम के साथ मिल कर जोर-जोर से डायलॉग पढ़े तो एक-दो दिन सब सामान्य हो गया। ऐक्टरों, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर ने मुझे सहज बनाया।
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-परंतु यह डबल मीनिंग डायलॉग वाली एडल्ट कॉमेडी है। क्या आप अपने डायलॉग के मायने जानती थीं?
- बिल्कुल। मैंने जो भी डायलॉग बोले, उन्हें मतलब जानने के बाद ही बोला। ज्यादातर के मतलब मुझे पहले से पता होते थे। अगर कभी कुछ समझ नहीं आता तो अक्सर उसका अनुवाद सही नहीं होता था, जो बाद में मैं समझ लेती थी।
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-कॉमिक रोल के लिए कैसे तैयारी की?
- मैं पहली बार कॉमेडी नहीं कर रही हूं। इससे पहले अमेरिका में कुछ कॉमेडी शो किए थे और मुझे यह पसंद है।
क्या आपने कोई बॉलीवुड सेक्स कॉमेडी देखी है?
-कॉमेडी को निखारने के लिए वर्कशॉप में क्या किया?
- खास तौर पर लिली के रोल पर मेहनत की क्योंकि वह थोड़ी दब्बू-सी है। वर्कशॉप में मैंने नोट्स लिए, नोटबुक में डायलॉग लिखे। खास तौर पर वे शब्द सीखे, जिन्हें लिली को बोलना था। दूसरे ऐक्टरों के साथ काम करते हुए वर्कशॉप में, आप कह सकते हैं कि हमारी कैमेस्ट्री बेहतर हुई। हम सैट पर अच्छे से काम कर सके।
-क्या आपने कोई बॉलीवुड सेक्स कॉमेडी देखी है?
- नहीं। मैंने ज्यादातर बॉलीवुड फिल्में फ्लाइट्स में यात्रा को दौरान देखी हैं और उसमें सेक्स कॉमेडी नहीं दिखाई जाती। क्या कूल हैं हम और ग्रेंड मस्ती सीरीज की फिल्में मैं देखना चाहती हूं।
-एक पहेलीः लीला में आपका डबल रोल था। सेक्स कॉमेडी में भी है!
- लीला में पुनर्जन्म की कहानी की वजह से डबल रोल था। यहां वास्तविक डबल रोल है। मैं एक साथ दो लड़कियों (लैला और लिली) के रोल में हूं। जब कहानी कहानी सुनाई गई तब डबल रोल नहीं था। फैसला बाद में लिया गया।
-चार साल से आप बॉलीवुड में हैं। अब कह सकती हैं कि कुछ दोस्त बना लिए हैं?
- हां, कह सकती हूं क्योंकि जब मैं यहां नहीं होती हूं तो उन लोगों के फोन पर हालचाल पूछती हूं। तुषार कपूर और वीर दास उन लोगों में हैं।
- खास तौर पर लिली के रोल पर मेहनत की क्योंकि वह थोड़ी दब्बू-सी है। वर्कशॉप में मैंने नोट्स लिए, नोटबुक में डायलॉग लिखे। खास तौर पर वे शब्द सीखे, जिन्हें लिली को बोलना था। दूसरे ऐक्टरों के साथ काम करते हुए वर्कशॉप में, आप कह सकते हैं कि हमारी कैमेस्ट्री बेहतर हुई। हम सैट पर अच्छे से काम कर सके।
-क्या आपने कोई बॉलीवुड सेक्स कॉमेडी देखी है?
- नहीं। मैंने ज्यादातर बॉलीवुड फिल्में फ्लाइट्स में यात्रा को दौरान देखी हैं और उसमें सेक्स कॉमेडी नहीं दिखाई जाती। क्या कूल हैं हम और ग्रेंड मस्ती सीरीज की फिल्में मैं देखना चाहती हूं।
-एक पहेलीः लीला में आपका डबल रोल था। सेक्स कॉमेडी में भी है!
- लीला में पुनर्जन्म की कहानी की वजह से डबल रोल था। यहां वास्तविक डबल रोल है। मैं एक साथ दो लड़कियों (लैला और लिली) के रोल में हूं। जब कहानी कहानी सुनाई गई तब डबल रोल नहीं था। फैसला बाद में लिया गया।
-चार साल से आप बॉलीवुड में हैं। अब कह सकती हैं कि कुछ दोस्त बना लिए हैं?
- हां, कह सकती हूं क्योंकि जब मैं यहां नहीं होती हूं तो उन लोगों के फोन पर हालचाल पूछती हूं। तुषार कपूर और वीर दास उन लोगों में हैं।
आप गुरुद्वारे जाया करती थीं। क्या पूजा-पाठ करती हैं?
-क्या बॉलीवुड घर की तरह लगने लगा है?
- मुझे मुंबई अब घर की तरह लगने लगा है। अमेरिका जाती हूं तो मुंबई को मिस करती हूं। वैसे अब मैं साल में 80-90 फीसदी समय यहीं बिताती हूं।
-मुंबई की किन बातों से सबसे ज्यादा कनेक्ट महसूस करती हैं?
- यहां के लोग और कल्चर। मैं ऐसी जगह पली-बढ़ी हूं जहां चारों तरफ सिर्फ गोरे लोग थे। जब सब आपसे अलग होते हैं तो कई मुश्किलें होती हैं। लेकिन वहां पर भारतीय भी थे और सब रविवार को गुरुद्वारे में इकट्ठा होते थे। मैं माता-पिता के साथ जाती थी। वह एक अलग बात थी। कैलीफोर्निया में होली-दीवाली नहीं होती थी। घर में हम सब त्यौहार मना लेते थे। अब मैं यह सब अपनी आंखों से देख रही हूं और सोचती हूं कि एक वक्त आएगा जब सब कुछ ऐसा नहीं होगा और मैं यहां, लॉस एंजिल्स या दुनिया के किसी कोने में बैठी इन बातों को याद करूंगी।
-आप गुरुद्वारे जाया करती थीं। क्या पूजा-पाठ करती हैं?
- मैं धार्मिक से ज्यादा आध्यात्मिक इंसान हूं और हां, मैंने गुरुद्वारे में शादी की है। मेरे माता-पिता ने जो धार्मिक संस्कार मुझे दिए हैं वे मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे।
- मुझे मुंबई अब घर की तरह लगने लगा है। अमेरिका जाती हूं तो मुंबई को मिस करती हूं। वैसे अब मैं साल में 80-90 फीसदी समय यहीं बिताती हूं।
-मुंबई की किन बातों से सबसे ज्यादा कनेक्ट महसूस करती हैं?
- यहां के लोग और कल्चर। मैं ऐसी जगह पली-बढ़ी हूं जहां चारों तरफ सिर्फ गोरे लोग थे। जब सब आपसे अलग होते हैं तो कई मुश्किलें होती हैं। लेकिन वहां पर भारतीय भी थे और सब रविवार को गुरुद्वारे में इकट्ठा होते थे। मैं माता-पिता के साथ जाती थी। वह एक अलग बात थी। कैलीफोर्निया में होली-दीवाली नहीं होती थी। घर में हम सब त्यौहार मना लेते थे। अब मैं यह सब अपनी आंखों से देख रही हूं और सोचती हूं कि एक वक्त आएगा जब सब कुछ ऐसा नहीं होगा और मैं यहां, लॉस एंजिल्स या दुनिया के किसी कोने में बैठी इन बातों को याद करूंगी।
-आप गुरुद्वारे जाया करती थीं। क्या पूजा-पाठ करती हैं?
- मैं धार्मिक से ज्यादा आध्यात्मिक इंसान हूं और हां, मैंने गुरुद्वारे में शादी की है। मेरे माता-पिता ने जो धार्मिक संस्कार मुझे दिए हैं वे मेरी जिंदगी का हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे।