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Hindi News ›   Entertainment ›   Bollywood ›   Shraddha Kapoor Play Role Of Vithabai Narayangaonkar In Movie Eetha Known Unknown Facts About Dancer

Eetha: बच्चे के जन्म के तुरंत बाद लावणी नृत्य की दी थी प्रस्तुति, जानिए कौन थीं ‘ईठा’ की विठाबाई नारायणगावकर

Tue, 23 Jun 2026 05:01 PM IST
पूनम कंडारी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: पूनम कंडारी Updated Tue, 23 Jun 2026 05:01 PM IST
सार

Who Was Vithabai Narayangaonkar: श्रद्धा कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'ईठा' को लेकर चर्चा में हैं। उनकी यह फिल्म लावणी साम्रज्ञी विठाबाई नारायणगावकर के जीवन पर आधारित है। पांच दशक तक लावणी लोककला के उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया। यहां जानिए उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें।

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Shraddha Kapoor Play Role Of Vithabai Narayangaonkar In Movie Eetha Known Unknown Facts About Dancer
फिल्म ‘ईठा’ में विठाबाई नारायणगावकर का किरदार निभाएंगी श्रद्धा कपूर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

रात गहरा चुकी है। गांव के मेले में लगी पैट्रोमेक्स ( गैस से चलने वाली लाइट) की रोशनी दूर तक चमक रही है। स्टेज पर रंग-बिरंगे परदे लगे हुए हैं। चारों तरफ सिर्फ घुंघरूओं और ढोलक की आवाज गूंज रही है। दर्शकों की तालियों ने आसमान सिर पर उठा रखा है। मंच पर एक महिला लावणी की प्रस्तुति दे रही है। तभी आचानक उसे प्रसव पीड़ा होती है, वो स्टेज के पीछे जाती है और एक बच्ची को जन्म देती है, फिर वापस स्टेज पर आकर लावणी की प्रस्तुति देती है। यह किसी हिंदी फिल्म का दृश्य नहीं है बल्कि महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी डांसर विठाबाई नारायणगावकर के जीवन की सच्ची घटना है। इन्हीं के जीवन पर श्रद्धा कपूर स्टारर फिल्म 'ईठा' बनी है। फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर ने किया है। हम आपको बता रहे हैं, विठाबाई नायारणगावकर के जीवन से जुड़े कुछ अनसुने किस्से। 

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Shraddha Kapoor Play Role Of Vithabai Narayangaonkar In Movie Eetha Known Unknown Facts About Dancer
'ईठा' में श्रद्धा कपूर - फोटो : सोशल मीडिया

13 साल की उम्र में बनाई अपनी लावणी मंडली 
विठाबाई नारायणगावकर का जन्म 1 जुलाई 1935 महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर गांव में हुआ था। उनके नाना नारायण खुड़े ने एक कला मंडली की स्थापना की थी। बाद में विठाबाई के पिता इसी कला मंडली को चलाते थे। विठाबाई को बचपन से ही लावणी करने का शोक था।  4 साल की उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था और अपने पिता की लावणी मंडली के साथ घूमना शुरू कर दिया था। बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के उन्होंने खुद से ही देख-देखकर गाना, नाचना, अभिनय सीखा। 1948 में महज 13 साल की उम्र में ही उन्होंने अपनी लावणी मंडली खोल दी थी।  


पिता से किया वादा जीवनभर निभाया 

1957 में जब विठाबाई के पिता का निधन हुआ, तो उनको बहुत बड़ा झटका लगा। पिता की मृत्यु से पहले विठाबाई ने अपने पिता से वादा किया था कि वो कभी भी लावणी नहीं छोड़ेंगी और हमेशा लोगों का मनोरंजन करती रहेंगी। इस वादे को उन्होंने आखिरी तक निभाया। विठाबाई ने मारुति सावंत नाम के व्यक्ति से शादी की, मारुति उनकी बुकिंग और बाकी काम संभालते थे। विठाबाई ने अपना सारा ध्यान लावणी पर केंद्रित कर लिया था। जबकि मारुति दिन भर शराब पीकर घरेलू हिंसा करते थे। इस स्थिति के बावजूद विठाबाई टूटी नहीं और लगातार अपनी कला को जीवंत रखा। 

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Shraddha Kapoor Play Role Of Vithabai Narayangaonkar In Movie Eetha Known Unknown Facts About Dancer
विठाबाई नारायणगावकर - फोटो : सोशल मीडिया

नौ महीने की गर्भावस्था के बाद भी नहीं छोड़ी लावणी

एक बार जब विठाबाई स्टेज पर आई, तो सब उन्हें देखकर हैरान रह गए। वो उस वक्त गर्भवत्ती थी। उनकी इस हिम्मत को देखकर सभी लोग दंग थे। मंच पर विठाबाई ने प्रस्तुति देनी शुरू की। तभी अचानक उनको प्रसव पीड़ा का दर्द हुआ। बिना किसी से कुछ कहे वो चुपचाप स्टेज के पीछे गई और वहीं पर उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। यहां तक की उन्होंने अपनी गर्भनाल को पत्थर से खुद काटा और वापस आकर स्टेज पर डांस किया। जब दर्शकों  को पता चला कि विठाबाई अभी-अभी बच्चे को जन्म देकर मंच पर वापस आई हैं, तो सभी भावुक हो गए कि उन्होंने शो रोक दिया। दर्शकों ने उनकी हिम्मत की बहुत तारीफ की। 


राजकपूर की फिल्मों का ऑफर मना कर दिया

महान हिंदी फिल्ममेकर राजकपूर ने जब विठाबाई की कला को देखा तो हैरान रह गए। शोमैन ने विठाबाई को हिंदी फिल्मों में काम करने का प्रस्ताव दिया। लेकिन विठाबाई ने अपने पिता से किया वादा निभाया था कि लावणी को नहीं छोड़ेंगी तो राजकपूर के प्रस्ताव को विनम्रता पूर्वक मना कर दिया। 

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विठाबाई नारायणगावकर - फोटो : सोशल मीडिया

1962 में भारतीय सेना के जावानों के लिए नृत्य प्रस्तुति दी 

1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान विठाबाई ने भारतीय सेना के जवानों के लिए लावणी की प्रस्तुति दी थी। इस प्रस्तुति में उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को बताया कि पूरा भारत उनके साथ है और भारतीय सेना के जवानों के आत्मविशवास को खूब बढ़ाया। 


पांच दशक तक मंच पर राज किया 

1940 के दशक में बाल कलाकार के रूप में शुरुआत करने वाली विठाबाई ने लगभग पांच दशक तक तमाशा और लावणी की दुनिया पर अपना दबदबा बनाए रखा। 1950 और 1960 के दशक में वे इस लोककला की सबसे बड़ा नाम बन गईं। जबकि बदलते दौर में भी यानी 1990 के दशक तक उनकी लोकप्रियता बरकरार रही। 

अंतिम वर्ष कठिनाई में बिताए

पांच दशक तक लावणी नृत्य के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली विठाबाई ने अपने अंतिम दिन गरीबी और परेशानी में काटे थे। साल 2002 में जब उनकी मृत्यु हुई तब परिवार के लोगों के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वो लोग उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से घर ले जा सकें। यह जानकर कई लोग दुखी हुए थे। लेकिन आज भी विठाबाई को उनके जज्बे और लावणी नृत्य के लिए याद किया जाता है, उन्हें अपने जीवनकाल में कई पुरस्कार भी मिले थे। 

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