शोले की कमाई के पास भी नहीं फटकतीं बजरंगी भाईजान
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हम पिछले कई दिनों से सुन रहे हैं कि सलमान खान की फिल्म 'बजरंगी भाईजान' ने करीब 600 करोड़ रुपये कमा लिए और हिन्दी सिनेमा इतिहास की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई। इससे आगे बस आमिर खान की 'पीके' है, जिसने करीब 735 करोड़ रुपये का व्यवसाय किया है। पर ये सच्चाई नहीं है, सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म कोई और है।
भारत में 1913 में पहली फिल्म बनी, दादा साहब फाल्के की 'राजा हरिश्चंद'। पर यह एक मूक फिल्म थी। हिन्दी सिनेमा की शुरुआत 1931 में आई अर्देशीर ईरानी की पहली 'आलम आरा' से हुई। लेकिन तब भारत में एक फिल्म का बन कर तैयार होना ही बड़ी बात थी। फिल्मों की लागत और कमाई में किसी की दिलचस्पी नहीं थी।
लेकिन जल्द ही वक्त बदला, फिल्मों को सफल और असफल की कसौटी पर कसा जाने लगा। इसके लिए पैमाना बनाया गया सिनेमाघरों में फिल्म की बिताई गई अवधि को। यानि जो फिल्म अधिक दिनों तक सिनेमाघरों में टंगी रहेगी वो उतनी सफल कही जाएगी। इस लिहाज से देखें तो 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई 'शोले' भारत के 100 से ज्यादा सिनेमाघरों में 25 सप्ताह से ज्यादा टंगी रही और कुछ में लगातार 50 सप्ताह। मुम्बई के मिनर्वा सिनेमाघर में यह लगातार 5 साल तक चलती रही।
पर बात यही खत्म नहीं होती। बॉक्स ऑफिस कलेक्शन की बात करें यानि सीधे-सीधे पैसों की बात करें तो भी यह फिल्म पीके, बजरंगी भाईजान, बाहुबली से ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है। अगली स्लाइड में पूरा विवरण...
लोगों को मुद्रास्फीति का नहीं है अंदाजा
जो लोग पीके, बजरंगी भाईजान, बाहुबली को भारत और हिन्दी सिनेमा के इतिहास की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बता रहे हैं, असल में उन्हें मुद्रास्फीति (inflation) का अंदाजा नहीं है। असल में हिन्दी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म शोले है। इसकी कमाई पीके, बजरंगी भाईजान और बाहुबली से कहीं अधिक है।
15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई शोले पहले दो सप्ताह में बिल्कुल नहीं चली। समीक्षकों ने भी इसकी जमकर आलोचना की। बात यहां तक आ गई कि निर्माता-निर्देशक फिल्म का क्लाइमेक्स बदलने की सोचने लगे। लेकिन तीसरे सप्ताह में फिल्म ने कमाल कर दिया। रातोरात फिल्म की चर्चा किसी सनसनी खबर की तरह फैली।
एक विश्वसनीय सर्वे के मुताबिक शोले की शुरुआती कमाई महज 15 करोड़ रुपये बताई गई। लेकिन 1975 में आई शोले के 15 करोड़, 2014 में आई पीके के 735 करोड़, 2015 में आई बजरंगी भाईजान के करीब 600 और 2015 में ही आई बाहुबली के 600 करोड़ से कहीं ज्यादा है। इस चौंकाने वाली बात के लिए जिम्मदार है मुद्रास्फीति। कैसे होता है मुद्रास्फीति का असर, कैसे शोले के 15 करोड़ 735 करोड़ से हैं ज्यादा, जानिए अगले स्लाड में।
कैसे शोले के 15 करोड़ पीके के 735 करोड़ से हैं ज्यादा
भारत की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म है शोले। मगर मुद्रास्फीति उसे दिखने नहीं देती। मुद्रास्फीति को एक लाइन में समझने के लिए यह लोकोक्ति काफी मददगार है, 'तब एक रुपये की कीमत बहुत थी', कई बूढ़े लोगों को ये कहते हुए सुना जाता है। उनके मुताबिक अब एक रुपये की कीमत कम हो गई है। जी हां, इसी रुपये की कीमतों के उतार चढ़ाव को मुद्रास्फीति कहते हैं।
आम बोलचाल की भाषा में मुद्रास्फीति एक गणितीय आकलन पर आधारित अर्थशास्त्रीय अवधारणा है, जिससे बाजार में मुद्रा के प्रसार व वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि या कमी की गणना की जाती है। आप इसे ऐसे समझिए कि अगर 1975 में कोई सामान 100 रुपये में मिल रहा हो और 1985 में वही सामान 200 में मिलने लगे तो मुद्रास्फीति शत-प्रतिशत बढ़ गई।
इस कसौटी पर कसने से पता लगता है कि शोले, पीके और बजरंगी भाईजान से कमाई के मामले में कितना आगे है। यह गणित लगाने के बाद ही पता चलता है कि सही मायने में हिन्दी सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म कौन है। क्योंकि शोले के निर्माता निर्देशक उन्हीं 15 करोड़ रुपयों से जितना उपभोग कर पाए होंगे, आज पीके के निर्माता-निर्देशक 735 करोड़ में नहीं कर पाएंगे। फिर किस आधार पर पीके को सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म कहा जाए? अगली स्लाइड में जानिए, आज हिसाब है कितनी है शोले की कमाई...
आज के हिसाब से कितनी है शोले की कमाई
चूंकि मुद्रास्फीति नापने का कोई परिभाषित पैमाना नहीं है। इसका अंदाजा वस्तुओं की कीमतों के आधार पर ही लगाया जा सकता है। इसलिए शोले की वास्तविक कमाई के बारे में जानने के लिए हमें 1975 में वस्तुओं की कीमत को जानना होगा। एक आधिकारिक स्रोत से मिली जानकारी के मुताबिक तब सोने का मूल्य प्रति दस ग्राम करीब 500 रुपये था। अब 25000 रुपये से अधिक है, 50 गुना तक उछाल। इस लिहाज से 15 करोड़ी शोले की कमाई आज 750 करोड़ पार होती।
इसी तरह बात खाद्य पदार्थों की करें, आपको जानकर आश्चर्य होगा कि शोले के टिकट उस समय 5 से 7 रुपये तक में बिके। तब सामान्य रेस्टोरेंट में एक थाली (एक प्लेट भोजन) की कीमत 3 से 5 रुपये थी, अब 150 से 200। यहां भी करीब 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। इस लिहाज से भी शोले की कमाई 750 करोड़ पार पहुंचती है। बात करें बैंकिग की, तो अगर शोले के निर्माता-निर्देशकों ने तब वो 15 करोड़ अगर सरकार की फिक्स डिपोजिट योजना में जमा किया होता, या किसी बैंक की फिक्स डिपॉजिट योजना में निवेश किया होता, तो आज यह 1000 करोड़ पार होती।
यही नहीं, सरकारी और निजी दोनों ही विभागों के कर्मचारियों के वेतनमान की तुलना करें तो भी हम पाते है कि 1975 की तुलना में 2015 में करीब 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी की गई है। हां, अगर ऑटो मोबाइल और इलेक्टॉनिक वस्तुओं की बात करें, तो कीमतों में उतनी उछाल नहीं आई है। ब्लॉकबस्टर फिल्म शोले का यही असली जादू है, जो बॉलीवुड की दुनिया भर में सबसे ज्यादा देखी गई फिल्म मानी जाती है। आमिर खान बताते हैं कि उनकी फिल्म पीके देखने के लिए महज चार करोड़ लोग सिनेमाघर तक पहुंचे, जबकि एक आंकड़े के मुताबिक शोले करीब 7 करोड़ लोगों ने सिनेमाघर में जाकर देखा है।
शोले 3डी और 40 साल बाद पाकिस्तान जाकर भी बटोरे रुपये
शोले का जादू इस कदर अब भी लोगों पर चढ़ा हुआ कि आज भी जब कभी फिल्म मैदान में उतरती है, कमाल ही करती है। पिछले साल जब इसे 3डी वर्जन में दोबारा रिलीज किया गया तब भी इसने 12 करोड़ से ज्यादा का व्यवसाय किया।
इसी तरह 40 साल बाद जब इसे पाकिस्तान में रिलीज किया गया तो वहां भी इसने तगड़ी कमाई की। फिल्म के बारे में इस्लामाबाद के सेंट्रॉस सिनेप्लेक्स में एक दर्शक ने बीबीसी से कहा, "लोग इसका ड्रामा या रहस्य देखने नहीं आते- सबने कम से कम एक बार इसे देखा हुआ है- बल्कि इसलिए आते हैं कि इसकी उत्तेजना कभी खत्म नहीं होती।"
जानकारी क में मुताबिक शोले ने पाक में रिलीज के पहले हफ्ते में ही 45 लाख रुपये (करीब 28,12,140 भारतीय रुपये) की कमाई की। खास बात ये रही कि इतने सालों बाद भी जब इस फिल्म को बिना मौलिक बदलाव के जब दोबारा रिलीज किया गया तो इसका शुरुआती कलेक्शन 'धूम 3' जैसी सुपरहिट फिल्मों को टक्कर दे रहा था।