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12वीं क्लास में पढ़ाया जा रहा दीपिका के नाम का चैप्टर, लिखी गई हैं ये बातें
amarujala.com- Presented by: कुशमिता राणा
Updated Tue, 08 Aug 2017 10:01 AM IST
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प्रकाश पादुकोण ने अपनी बेटी दीपिका पादुकोण और अनीषा पादुकोण को एक खत लिखा था जिसे गुजरात एजुकेशन बोर्ड के 12वीं कक्षा के कॉमर्स स्टूडेंट पढ़ रहे हैं। दरअसल, स्लेबस के एक चैप्टर में फैमिली बॉन्डिंग और ह्यूमन वैल्यूज का महत्व समझाया है।
इसके लिए प्रकास पादुकोण के लिखे खत का सहारा लिया गया है और उसे किताब में छापा गया है। इसकी जानकारी मिलते ही दीपिका पादुकोण मे सोशल मीडिया पर एक ट्वीट के जरिए अपनी खुशी भी जाहिर की है।
पढ़े- एक्ट्रेस ने ब्रेस्ट फीडिंग कराते हुए शेयर की फोटो, लोगों काे इतनी बुरी लगी कि कर दिए ऐसे कमेंट्स
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ये खत कुछ यूं है-
प्यारी दीपिका और अनीषा,
तुम इस समय अपने जीवन की यात्रा की शुरुआत करने जा रही हो, ऐसे में मैं तुमसे वो अनमोल बातें साझा करना चाहता हूं जो मैंने जीवन में अनुभवो से सीखीं हैं। सालों पहले बेंगलुरू में एक छोटे बच्चे ने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, तब ना तो कोई स्टेडियम थे और ना ही कोई बैडमिंटन कोर्ट जहां ट्रेनिंग ली जा सके।
हमारे घर के पास एक बड़ा सा मैदान था जहां शादियां होती थीं। यहीं था हमारा बैडमिंटन कोर्ट और इसी मैदान में मैंने इस खेल की सारी बातें जानी। हर रोज हम यही देखते कि कहीं आज इस मैदान में कोई फंक्शन तो नहीं है अगर कोई फंक्शन नहीं होता तो हम स्कूल से आने के बाद तुरंत मैदान में खेलने भाग जाते।
अब जब में पीछे देखता हूं तो मुझे ये अहसास होता है कि बचपन से ही मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज रही कि मैं शिकायत बहुत कम करता था यही मैं तुम बच्चों को सिखाना चाहता हूं कि जुनून, कड़ी मेहनत, जिद्द और जज्बे की जगह कोई चीज नहीं ले सकती।
पढ़े- रणवीर को छोड़ इस खिलाड़ी के साथ प्यार की पींगे बढ़ा रहीं दीपिका! किसने खोला राज?
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इसके लिए प्रकास पादुकोण के लिखे खत का सहारा लिया गया है और उसे किताब में छापा गया है। इसकी जानकारी मिलते ही दीपिका पादुकोण मे सोशल मीडिया पर एक ट्वीट के जरिए अपनी खुशी भी जाहिर की है।
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ये खत कुछ यूं है-
प्यारी दीपिका और अनीषा,
तुम इस समय अपने जीवन की यात्रा की शुरुआत करने जा रही हो, ऐसे में मैं तुमसे वो अनमोल बातें साझा करना चाहता हूं जो मैंने जीवन में अनुभवो से सीखीं हैं। सालों पहले बेंगलुरू में एक छोटे बच्चे ने बैडमिंटन खेलना शुरू किया था, तब ना तो कोई स्टेडियम थे और ना ही कोई बैडमिंटन कोर्ट जहां ट्रेनिंग ली जा सके।
हमारे घर के पास एक बड़ा सा मैदान था जहां शादियां होती थीं। यहीं था हमारा बैडमिंटन कोर्ट और इसी मैदान में मैंने इस खेल की सारी बातें जानी। हर रोज हम यही देखते कि कहीं आज इस मैदान में कोई फंक्शन तो नहीं है अगर कोई फंक्शन नहीं होता तो हम स्कूल से आने के बाद तुरंत मैदान में खेलने भाग जाते।
अब जब में पीछे देखता हूं तो मुझे ये अहसास होता है कि बचपन से ही मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज रही कि मैं शिकायत बहुत कम करता था यही मैं तुम बच्चों को सिखाना चाहता हूं कि जुनून, कड़ी मेहनत, जिद्द और जज्बे की जगह कोई चीज नहीं ले सकती।
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जब 18 साल की उम्र में दीपिका ने जताई मॉडल बनने की ख्वाहिश
दीपिका जब तुमने 18 साल की उम्र में कहा था कि तुम्हें मुंबई जाना है, क्योंकि तुम मॉडलिंग करना चाहती हो तो हमें लगा था कि तुम एक बड़े शहर और एक बड़ी इंडस्ट्री के लिए बहुत छोटी हो और तुम्हें कोई तजुर्बा भी नहीं है, लेकिन आखिर में हमने तय किया कि तुम्हें तुम्हारे दिल की करने दिया जाए।
क्योंकि हमें लगा कि तुम्हें वो सपना पूरा करने का मौका नहीं देना जिसके साथ तुम बड़ी हुई हो ये बहुत गलत है। तुम कामयाब हो जाती तो हमें गर्व होता और अगर नहीं होती तो तुम्हें कभी अफसोस नहीं होता क्योंकि तुमने कोशिश की थी।
पढ़े- 6000 लड़कियों के प्रपोजल ठुकरा चुके 'बाहुबली' का दिल आया इस हीरोइन पर
याद रखो कि मैंने तुम्हें हमेशा यही बताया है कि दुनिया में अपना रास्ता कैसे बनाना है। बिना अपने माता-पिता से उम्मीद किए कि वे उंगली पकड़कर तुम्हें वहां पहुंचाएंगे। मेरा मानना है कि बच्चों को अपने सपनों के लिए खुद मेहनत करनी चाहिए न कि इस बात का इंतजार कि कोई कामयाबी उन्हें लाकर देगा।
आज भी जब तुम घर आती हो तो तुम अपना बिस्तर खुद लगाती हो, खाने बाद मेज खुद साफ करती हो और जमीन पर सोती हो जब घर में मेहमान होते हैं। तुम कभी सोचती होगी कि हम तुम्हें एक स्टार समझने को क्यों तैयार नहीं हैं, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम हमारे लिए बेटी पहले हो और एक फिल्म स्टार बाद में।
तुम्हारा पिता।
क्योंकि हमें लगा कि तुम्हें वो सपना पूरा करने का मौका नहीं देना जिसके साथ तुम बड़ी हुई हो ये बहुत गलत है। तुम कामयाब हो जाती तो हमें गर्व होता और अगर नहीं होती तो तुम्हें कभी अफसोस नहीं होता क्योंकि तुमने कोशिश की थी।
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याद रखो कि मैंने तुम्हें हमेशा यही बताया है कि दुनिया में अपना रास्ता कैसे बनाना है। बिना अपने माता-पिता से उम्मीद किए कि वे उंगली पकड़कर तुम्हें वहां पहुंचाएंगे। मेरा मानना है कि बच्चों को अपने सपनों के लिए खुद मेहनत करनी चाहिए न कि इस बात का इंतजार कि कोई कामयाबी उन्हें लाकर देगा।
आज भी जब तुम घर आती हो तो तुम अपना बिस्तर खुद लगाती हो, खाने बाद मेज खुद साफ करती हो और जमीन पर सोती हो जब घर में मेहमान होते हैं। तुम कभी सोचती होगी कि हम तुम्हें एक स्टार समझने को क्यों तैयार नहीं हैं, तो ऐसा इसलिए है क्योंकि तुम हमारे लिए बेटी पहले हो और एक फिल्म स्टार बाद में।
तुम्हारा पिता।